Tomato Price Fall: दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, लखनऊ और पटना सहित उत्तर भारत के अधिकांश शहरों में टमाटर महंगा हो गया है. कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी है. इससे आम जनता के किचन का बजट बिगड़ गया है. लेकिन आंध्र प्रदेश में ऐसा नहीं है. यहां टमाटर की कीमतें बढ़ने क बजाए कम हो रही हैं. ऐसे में किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे है. खासकर अन्नमय्या, तिरुपति और चित्तूर जिलों में टमाटर के रेट में कुछ ज्यादा ही गिरावट आई है, जिससे उत्पादकों को नुकसान हो रहा है. फिलहाल 15 किलो टमाटर 220 रुपये में बिक रहा है, जो 14.67 रुपये प्रति किलो हुआ. हालांकि, दिल्ली-एनसीआर में अभी टमाटर 60 से 70 रुपये किलो बिक रहा है.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अन्नमय्या, तिरुपति और चित्तूर जिले की प्रमुख थोक मंडियों में टमाटर की आवक बढ़ने से कीमतों में तेज गिरावट आई है, जिससे किसानों की आय प्रभावित हुई है. मदनपल्ले, पलमनेर, पुंगनूर और कालिकिरी की मंडियों में 15 किलो टमाटर की एक क्रेट, जो कुछ दिन पहले 300 से 350 रुपये में बिक रही थी, अब घटकर करीब 220 रुपये रह गई है. वहीं, कम गुणवत्ता वाले टमाटर 150 से 170 रुपये प्रति क्रेट के भाव बिक रहे हैं.
25,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में टमाटर की खेती
व्यापारियों के अनुसार, रायलसीमा के प्रमुख टमाटर उत्पादक क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में आवक होने के कारण बाजार में आपूर्ति बढ़ गई है. जबकि मांग में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है. इसी वजह से टमाटर के दामों में अचानक गिरावट देखने को मिल रही है. आंध्र प्रदेश के चित्तूर और अन्नमय्या जिले राज्य के प्रमुख टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हैं, जहां इस समय 25,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में टमाटर की खेती की जा रही है. कई इलाकों में फसल की कटाई तेजी से चल रही है, जिससे मंडियों में टमाटर की आवक काफी बढ़ गई है और बाजार में अधिक आपूर्ति की स्थिति बन गई है.
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अचानक दाम गिरने से किसान चिंतित
अन्नमय्या जिले के पिलेर के किसान जाकिर हुसैन ने कहा कि कुछ दिन पहले तक कीमतें स्थिर थीं, लेकिन अचानक दाम गिरने से किसान चिंतित हैं. उनका कहना है कि अब किसानों के लिए अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. वहीं, कालिकिरी मंडल के किसान शिव शंकर ने कहा कि मौजूदा कीमतें खेती, कटाई और परिवहन का खर्च तक पूरा नहीं कर पा रही हैं. उन्होंने कहा कि कई किसानों ने टमाटर की फसल में बड़ा निवेश किया था, लेकिन अब उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.
छोटे और सीमांत किसानों की आय प्रभावित
किसानों का कहना है कि टमाटर जल्दी खराब होने वाली फसल है, इसलिए उनके पास इसे लंबे समय तक रोककर रखने का विकल्प नहीं होता. मजबूरी में उन्हें मौजूदा कम कीमतों पर ही अपनी उपज बेचनी पड़ रही है. इसका सबसे ज्यादा असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ रहा है, जिन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. किसानों ने सरकार से टमाटर की कीमतों को स्थिर रखने के लिए जरूरी कदम उठाने, सरकारी खरीद की व्यवस्था करने और बेहतर भंडारण सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है. उनका कहना है कि इससे किसानों को औने-पौने दाम पर फसल बेचने से बचाया जा सकेगा और टमाटर की खेती पर निर्भर हजारों परिवारों की आजीविका सुरक्षित रह सकेगी.