ट्रंप के टैरिफ से मचा बवाल! ईरान की अस्थिरता से डगमगाया भारतीय चावल कारोबार, किसान-एक्सपोर्टर परेशान

Trump tariff on Iran: ट्रंप द्वारा ईरान से जुड़े देशों पर 25% टैरिफ लगाने के ऐलान से भारत के बासमती चावल निर्यात पर असर दिखने लगा है. पेमेंट अटकने के डर से भारतीय एक्सपोर्टर्स नए सौदे करने से बच रहे हैं, जिससे चावल की कीमतें गिरी हैं और इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ रहा है.

नोएडा | Published: 15 Jan, 2026 | 11:45 AM

India-Iran Trade: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने के ऐलान का सीधा असर भले ही भारत की कुल अर्थव्यवस्था पर ज्यादा न दिखे, लेकिन कृषि क्षेत्र, खासकर बासमती चावल से जुड़े किसानों और एक्सपोर्टर्स के लिए यह फैसला चिंता बढ़ाने वाला साबित हो रहा है. सरकार का कहना है कि भारत और ईरान के बीच व्यापार सीमित है, इसलिए नुकसान ज्यादा नहीं होगा, लेकिन खेती-किसानी से जुड़े लोगों की नजर से देखें तो तस्वीर कुछ और ही है.

भारत-ईरान व्यापार और खेती का रिश्ता

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल भारत और ईरान के बीच करीब 1.6 बिलियन डॉलर का कारोबार हुआ. यह भारत के कुल आयात-निर्यात के मुकाबले छोटा हिस्सा जरूर है, लेकिन इसमें कृषि उत्पादों, खासकर बासमती चावल की हिस्सेदारी काफी अहम है. ईरान, भारतीय बासमती चावल का एक बड़ा खरीदार रहा है. ईरान अपने कुल चावल आयात का लगभग दो-तिहाई हिस्सा भारत से मंगाता है, जिससे लाखों भारतीय किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है.

टैरिफ का असर क्यों दिख रहा है?

ट्रंप के टैरिफ के ऐलान के बाद ईरान के साथ कारोबार को लेकर असमंजस बढ़ गया है. इसका सीधा असर भारत से होने वाले चावल के निर्यात पर दिख रहा है. अब भारतीय एक्सपोर्टर्स ईरान के साथ नए सौदे करने से बच रहे हैं. उन्हें चिंता है कि माल भेजने के बाद कहीं भुगतान न फंस जाए. इस डर का असर सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी मार किसानों और बाजार की कीमतों पर भी पड़ने लगी है.

बासमती के दाम गिरे, किसानों की चिंता बढ़ी

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के मुताबिक, लोकप्रिय पूसा बासमती-1121 की कीमत 85 रुपये प्रति किलो से गिरकर 80 रुपये पर आ गई है. वहीं 1509 और 1718 किस्मों की कीमतें भी 70 रुपये से घटकर 65 रुपये प्रति किलो हो गई हैं. कीमतों में यह गिरावट ऐसे वक्त आई है जब ईरान अब भी भारत के लिए बासमती का बड़ा बाजार बना हुआ है. दाम गिरने का सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ता है.

पेमेंट सिस्टम बना सबसे बड़ी परेशानी

IREF के नेशनल प्रेसिडेंट प्रेम गर्ग का कहना है कि ईरान में मौजूदा हालात और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते पेमेंट चैनल धीमे हो गए हैं. कई ईरानी आयातक समय पर भुगतान करने में असमर्थता जता रहे हैं. इससे एक्सपोर्टर्स के साथ-साथ किसानों में भी बेचैनी बढ़ गई है, क्योंकि निर्यात घटने पर मंडियों में कीमतें और गिर सकती हैं.

आगे का रास्ता क्या?

इंडस्ट्री डेटा बताता है कि 2025-26 के शुरुआती महीनों में ही भारत ने ईरान को हजारों करोड़ रुपये का बासमती चावल निर्यात किया है. ऐसे में साफ है कि ईरान भारतीय कृषि निर्यात, खासकर प्रीमियम बासमती के लिए बेहद अहम है. अगर यह अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रही, तो इसका सबसे ज्यादा असर किसानों, मिलर्स और निर्यातकों पर पड़ेगा. ऐसे में सरकार और निर्यात संगठनों के लिए जरूरी हो जाता है कि वे नए बाजार तलाशें, ताकि किसानों की मेहनत और कमाई सुरक्षित रह सके.

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