ईरान में हालात बिगड़ते ही बासमती कारोबार डगमगाया, मंडियों में गिरने लगे चावल के दाम

निर्यातकों के सामने सबसे बड़ी समस्या भुगतान को लेकर है. ईरान के कई आयातकों ने साफ तौर पर कहा है कि वे मौजूदा हालात में समय पर पैसे भेजने की स्थिति में नहीं हैं. इससे निर्यातकों की पूंजी अटक रही है और गोदामों में रखा माल बिक नहीं पा रहा.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 13 Jan, 2026 | 04:13 PM

Basmati rice export: भारतीय बासमती चावल के कारोबार से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. ईरान में चल रही आंतरिक अशांति का सीधा असर अब भारत के बासमती चावल निर्यात पर दिखने लगा है. हालात ऐसे बन गए हैं कि निर्यातकों को भुगतान मिलने में देरी हो रही है और नए सौदों को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ गई है. इसका नतीजा यह हुआ है कि देश की मंडियों में बासमती चावल की कीमतों में अचानक तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ गई है.

ईरान क्यों है बासमती का बड़ा बाजार

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान लंबे समय से भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है. हर साल बड़ी मात्रा में बासमती चावल भारत से ईरान भेजा जाता है. मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से नवंबर के बीच भारत ने ईरान को करीब 5.99 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया है, जिसकी कीमत लगभग 468 मिलियन डॉलर बताई जा रही है. लेकिन इस साल हालात बदले हुए नजर आ रहे हैं. ईरान में राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता के कारण वहां के आयातक समय पर भुगतान नहीं कर पा रहे हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों पर दबाव बढ़ गया है.

मंडियों में साफ दिखने लगा असर

ईरान से जुड़े संकट का असर अब सीधे घरेलू बाजार में दिखने लगा है. बीते एक हफ्ते में ही बासमती की प्रमुख किस्मों के दाम तेजी से नीचे आए हैं. बासमती 1121 की कीमत, जो पिछले हफ्ते तक 85 रुपये प्रति किलो थी, अब गिरकर करीब 80 रुपये प्रति किलो रह गई है. इसी तरह 1509 और 1718 किस्मों के दाम भी 70 रुपये से घटकर 65 रुपये प्रति किलो तक आ गए हैं. व्यापारियों का कहना है कि खरीदार नए सौदे करने से बच रहे हैं और पहले से हुए करार भी टलते जा रहे हैं.

भुगतान में देरी से बढ़ी मुश्किल

निर्यातकों के सामने सबसे बड़ी समस्या भुगतान को लेकर है. ईरान के कई आयातकों ने साफ तौर पर कहा है कि वे मौजूदा हालात में समय पर पैसे भेजने की स्थिति में नहीं हैं. इससे निर्यातकों की पूंजी अटक रही है और गोदामों में रखा माल बिक नहीं पा रहा. उद्योग संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर यह स्थिति ज्यादा समय तक बनी रही, तो इसका असर किसानों को मिलने वाले दामों पर भी पड़ेगा.

निर्यातकों को सतर्क रहने की सलाह

भारतीय चावल निर्यातकों के संगठन ने कारोबारियों को सलाह दी है कि वे ईरान से जुड़े सौदों में अतिरिक्त सावधानी बरतें. बिना सुरक्षित भुगतान व्यवस्था के नए अनुबंध करने से बचने को कहा गया है. साथ ही, यह भी चेताया गया है कि केवल ईरान बाजार पर निर्भर रहना इस समय जोखिम भरा हो सकता है. निर्यातकों से कहा गया है कि वे अपने स्टॉक और निवेश को संतुलित तरीके से संभालें.

दूसरे बाजारों की ओर रुख जरूरी

ईरान में जारी संकट को देखते हुए अब नजरें वैकल्पिक बाजारों पर टिक गई हैं. उद्योग जगत का मानना है कि पश्चिम एशिया के अन्य देशों, अफ्रीका और यूरोप में नए बाजार तलाशे जाने चाहिए, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम हो सके. इससे अगर ईरान को होने वाला निर्यात लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तब भी नुकसान को कुछ हद तक संभाला जा सकेगा.

आगे और उतार-चढ़ाव की आशंका

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है और आने वाले हफ्तों में बासमती चावल के बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. कीमतों में अस्थिरता, नकदी की कमी और व्यापारिक माहौल में अनिश्चितता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में किसानों से लेकर निर्यातकों तक सभी को हालात पर नजर रखकर सोच-समझकर कदम उठाने की जरूरत है.

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