यूपी का नया पोर्टल किसानों को बताएगा किस फसल की किस देश में है मांग, 3 हजार निर्यातक तैयार

यूपी के किसानों के लिए विदेशी बाजार का रास्ता खुल गया है. नया पोर्टल बताएगा कि किस जिले की कौन-सी उपज किस देश में बिक सकती है. 75 जिलों में करीब 3 हजार निर्यातक तैयार हैं. वेबसाइट पर बाजार की मांग, गुणवत्ता मानक और निर्यात प्रक्रिया की जानकारी मिलेगी.

नोएडा | Published: 28 Aug, 2026 | 12:19 PM

उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए ग्लोबल मार्केट का रास्ता अब और आसान होने जा रहा है. किसान की उपज सिर्फ स्थानीय मंडियों तक सीमित न रहे, बल्कि सीधे विदेशी बाजारों तक पहुंचे, इसके लिए राज्य सरकार ने नई पहल शुरू की है. राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड की वेबसाइट लॉन्च की गई है, जहां किसानों और निर्यातकों को विदेशी बाजारों की मांग, उत्पादों के गुणवत्ता मानक, निर्यात प्रक्रिया और सरकारी सुविधाओं की जानकारी एक ही जगह मिलेगी. खास बात यह है कि प्रदेश के सभी 75 जिलों को इस पहल से जोड़ते हुए करीब 3,000 निर्यातकों को तैयार किया गया है.

किस जिले की कौन-सी उपज विदेश जाएगी, पोर्टल बताएगा

अब किसानों को यह पता लगाने के लिए अलग-अलग जगहों पर जानकारी जुटाने की जरूरत नहीं होगी कि उनकी उपज की विदेशी बाजार  में मांग है या नहीं. बोर्ड की वेबसाइट (https://upsheb.in/) के जरिए यह जानकारी मिल सकेगी कि किस जिले में पैदा होने वाली कौन-सी अतिरिक्त कृषि और औद्यानिक उपज किस देश में भेजी जा सकती है. इसके साथ ही संबंधित देश में उत्पाद के लिए जरूरी गुणवत्ता मानक, निर्यात की प्रक्रिया और सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाओं व अनुदान की जानकारी भी उपलब्ध होगी. इससे किसानों और निर्यातकों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी.

75 जिलों में 3 हजार निर्यातक, किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार

कुछ साल पहले तक प्रदेश में निर्यात गतिविधियां  मुख्य रूप से बड़े शहरों तक सीमित थीं, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. सरकार के मुताबिक प्रदेश के सभी 75 जिलों में निर्यातक सक्रिय हो चुके हैं और करीब 3,000 निर्यातक तैयार हैं. किसानों और एफपीओ को निर्यात व्यवस्था से जोड़ने के लिए निर्यातकों तथा एफपीओ के बीच समझौता ज्ञापन भी किया गया है. इससे किसान समूहों को बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने और अपनी उपज को बेहतर कीमत पर बेचने के नए अवसर मिल सकते हैं.

9 साल में 405 करोड़ बढ़ा कृषि-औद्यानिक निर्यात

उत्तर प्रदेश से कृषि, औद्यानिक और प्रसंस्कृत उत्पादों  के निर्यात में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016-17 में प्रदेश से करीब 727 करोड़ रुपये के इन उत्पादों का निर्यात हुआ था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,132 करोड़ रुपये पहुंच गया. यानी नौ साल में निर्यात मूल्य में करीब 405 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई. प्रदेश के कृषि और औद्यानिक उत्पाद अमेरिका, यूएई, जर्मनी, सऊदी अरब, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और स्वीडन जैसे देशों तक पहुंच रहे हैं.

जेवर एयरपोर्ट से तेज होगी विदेशों तक पहुंच

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सिर्फ उत्पादन पर्याप्त  नहीं है, बल्कि गुणवत्ता, पैकेजिंग, प्रमाणन और समय पर डिलीवरी भी बेहद जरूरी है. इसी को ध्यान में रखते हुए जेवर एयरपोर्ट के जरिए कृषि उत्पादों को हवाई कार्गो से तेजी से विदेशी बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ेंगी. इसके पास इंटीग्रेटेड टेस्टिंग ट्रीटमेंट पार्क विकसित करने की दिशा में भी काम हो रहा है. यहां परीक्षण, प्रमाणन और पैकेजिंग जैसी सुविधाएं मिलने की उम्मीद है. वहीं, आलू किसानों को बाजार उतार-चढ़ाव से राहत देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये के भाव स्थिरता कोष, शीतगृह में रखे आलू पर 100 रुपये प्रति क्विंटल किराया अनुदान और प्रमाणित बीज पर 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की छूट जैसी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया गया है. सरकार का लक्ष्य है कि निर्यात बढ़ने के साथ किसानों की आमदनी और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिले.

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