यूपी में 25 फीसदी कम बारिश से बढ़ी किसानों की चिंता, धान की रोपाई और खरीफ फसलों पर संकट
UP Rainfall Deficit: उत्तर प्रदेश में इस मॉनसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से 25 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. सबसे ज्यादा असर पूर्वी यूपी में देखने को मिला है, जहां कई जिलों में 50 फीसदी से अधिक बारिश की कमी है. इससे धान की रोपाई और खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.
UP Monsoon Update: उत्तर प्रदेश में इस बार मॉनसून किसानों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतर पाया है. राज्य में अब तक सामान्य से करीब 25 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. इसका सबसे ज्यादा असर उन इलाकों में देखने को मिल रहा है, जहां खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर करती है. धान की रोपाई धीमी पड़ रही है और मक्का, दलहन व तिलहन जैसी खरीफ फसलों की बुआई भी प्रभावित होने लगी है. ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ गई है.
हालांकि राहत की बात यह है कि, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगस्त के पहले सप्ताह में मॉनसून के फिर से सक्रिय होने का अनुमान जताया है. अगर पूर्वानुमान सही साबित होता है तो किसानों को कुछ राहत मिल सकती है.
प्रदेश में अब तक कितनी हुई बारिश?
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 29 जुलाई के बीच उत्तर प्रदेश में सामान्य तौर पर 342.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस दौरान में केवल 258.6 मिमी बारिश दर्ज की गई. यानी राज्य में अब तक करीब 25 प्रतिशत कम वर्षा हुई है. कम बारिश का असर सबसे ज्यादा खेती पर पड़ रहा है, क्योंकि जुलाई का महीना खरीफ फसलों की बुआई और धान की रोपाई के लिए सबसे अहम माना जाता है.
पूर्वी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा परेशानी
बारिश की सबसे ज्यादा कमी पूर्वी उत्तर प्रदेश में दर्ज की गई है. यहां सामान्य 370.4 मिमी के मुकाबले केवल 252.8 मिमी बारिश हुई, जो करीब 32 प्रतिशत कम है. भदोही, देवरिया, जौनपुर, कानपुर देहात, कौशांबी, कुशीनगर, रायबरेली, संत कबीर नगर और सीतापुर जैसे कई जिलों में हालात और भी गंभीर हैं. इन जिलों में सामान्य से 50 प्रतिशत से अधिक कम बारिश दर्ज की गई है. ऐसे इलाकों में खेतों में नमी की कमी होने लगी है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है.
पश्चिमी यूपी में स्थिति कुछ बेहतर
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश की कमी जरूर है, लेकिन हालात पूर्वी हिस्से जितने खराब नहीं हैं. यहां सामान्य 304.2 मिमी के मुकाबले 267 मिमी बारिश हुई है, यानी करीब 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. मेरठ, मुजफ्फरनगर और संभल जैसे जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है. वहीं गौतम बुद्ध नगर, पीलीभीत, शामली और अमरोहा जैसे जिलों में अब भी पर्याप्त बारिश नहीं हो सकी है.
खरीफ फसलों पर बढ़ सकता है असर
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि, जुलाई का महीना धान की रोपाई और खरीफ फसलों की बुआई के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है. अगर समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होती, तो फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है. बारिश की कमी बनी रही तो किसानों को सिंचाई पर ज्यादा खर्च करना पड़ेगा. इससे खेती की लागत बढ़ेगी और उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. खासकर छोटे और सीमांत किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है.
अगस्त के पहले सप्ताह में मिल सकती है राहत
मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी से बना गहरा दबाव मध्य छत्तीसगढ़ और उत्तरी ओडिशा की ओर बढ़ गया है. इसी वजह से मॉनसून की मुख्य गतिविधियां फिलहाल मध्य भारत में केंद्रित हैं और उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सीमित बनी हुई है.
आईएमडी का अनुमान है कि जैसे ही यह मौसम प्रणाली कमजोर पड़ेगी और मॉनसून ट्रफ फिर उत्तर की ओर खिसकेगी, अगस्त के पहले सप्ताह से उत्तर प्रदेश में बारिश की गतिविधियां दोबारा तेज हो सकती हैं. इस दौरान अच्छी बारिश होने की संभावना है, जिससे धान की रोपाई और खरीफ फसलों को राहत मिल सकती है. साथ ही तेज सतही हवाओं के कारण तापमान में भी ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है.