उत्तर प्रदेश में सोलर का कमाल, हर दिन 5 करोड़ की मुफ्त बिजली बनाकर बना देश में नंबर-1

सोलर ऊर्जा का इस्तेमाल केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पर्यावरण को भी बड़ा फायदा हो रहा है. इन सोलर संयंत्रों के कारण लाखों टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है, जिससे प्रदूषण कम हुआ है. यह कदम स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

नई दिल्ली | Updated On: 3 May, 2026 | 07:49 AM

Uttar pradesh rooftop solar: उत्तर प्रदेश अब सिर्फ खेती और आबादी के लिए ही नहीं, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. बढ़ती बिजली की मांग और महंगे बिलों के बीच लोगों ने सोलर ऊर्जा को अपनाकर एक नई मिसाल कायम की है. आज स्थिति यह है कि प्रदेश के लाखों घरों की छतें बिजली पैदा कर रही हैं और इससे लोगों को सीधा फायदा मिल रहा है.

रूफटॉप सोलर के मामले में उत्तर प्रदेश ने देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है. यह उपलब्धि न केवल ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव दिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि लोग अब स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं.

5 लाख से ज्यादा सोलर संयंत्र, बना नया रिकॉर्ड

राज्य में रूफटॉप सोलर लगाने की रफ्तार इतनी तेज रही कि अब यह संख्या 5 लाख के पार पहुंच गई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक 5,00,115 से ज्यादा रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं.

इन संयंत्रों के लिए करीब 8,94,217 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से बड़ी संख्या में इंस्टॉलेशन भी तेजी से पूरा किया गया. यह दर्शाता है कि लोगों के बीच सोलर ऊर्जा को लेकर जागरूकता और भरोसा लगातार बढ़ रहा है. इन सोलर प्लांट्स के जरिए राज्य में कुल 1,696.68 मेगावाट की बिजली उत्पादन क्षमता तैयार हो चुकी है, जो आने वाले समय में और बढ़ सकती है.

रोजाना 5 करोड़ रुपये की मुफ्त बिजली

रूफटॉप सोलर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि लोग अब अपनी बिजली खुद बना रहे हैं. यूपी नेडा के डायरेक्टर रविन्दर सिंह ने मीडिया को बताया, इन सोलर संयंत्रों से रोज करीब 5 करोड़ रुपये की बिजली मुफ्त में बन रही है. इसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ रहा है, क्योंकि बिजली बिल में बड़ी बचत हो रही है. पहले जहां लोगों को हर महीने भारी बिल चुकाना पड़ता था, वहीं अब सोलर के जरिए खर्च कम हो गया है.

पर्यावरण को भी मिला बड़ा फायदा

सोलर ऊर्जा का इस्तेमाल केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पर्यावरण को भी बड़ा फायदा हो रहा है. इन सोलर संयंत्रों के कारण लाखों टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है, जिससे प्रदूषण कम हुआ है. यह कदम स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

रोजगार के नए अवसर

रूफटॉप सोलर अभियान ने रोजगार के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खोली हैं. प्रदेश में करीब 5,000 कंपनियां इस क्षेत्र में काम कर रही हैं, जिनके जरिए 65,000 से ज्यादा लोगों को सीधा रोजगार मिला है. इसके अलावा लाखों लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से भी काम मिला है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं.

जमीन की भी बचत

सोलर प्लांट लगाने के लिए अलग जमीन की जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि ये संयंत्र घरों की छतों पर लगाए गए हैं. इससे करीब 6,500 एकड़ जमीन बची है, जिसे अब खेती या अन्य उपयोग में लाया जा सकता है. यह पहल खास तौर पर उन राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां जमीन की उपलब्धता सीमित होती है.

सब्सिडी से मिला बढ़ावा

सरकार ने सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सहायता भी दी है. केंद्र सरकार ने लगभग 3,038.08 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी है, जबकि राज्य सरकार ने 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का सहयोग किया है. इस आर्थिक मदद के कारण आम लोगों के लिए सोलर सिस्टम लगाना आसान हो गया और इसकी लागत भी कम हुई.

इंस्टॉलेशन की रफ्तार ने बनाया रिकॉर्ड

अप्रैल 2026 में सोलर इंस्टॉलेशन की रफ्तार ने नया रिकॉर्ड बनाया. सिर्फ 30 दिनों में 51,882 सोलर संयंत्र लगाए गए, जो किसी भी राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. इस दौरान हर दिन औसतन 1,729 संयंत्र लगाए गए, जो मार्च के औसत 1,700 संयंत्र प्रतिदिन से भी ज्यादा है. यही तेजी उत्तर प्रदेश को देश में नंबर-1 बनाने में अहम साबित हुई है.

Published: 3 May, 2026 | 08:00 AM

Topics: