Vikram Samvat 2083: ‘रौद्र’ नाम से शुरू होगा हिंदू नववर्ष 2026, क्या बढ़ेंगी प्राकृतिक आपदाएं और बाजार में हलचल?

Hindu Nav Varsh 2026: 19 मार्च 2026 से विक्रम संवत 2083 की शुरुआत होगी, जिसे ‘रौद्र’ संवत्सर कहा गया है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस साल देवगुरु बृहस्पति राजा होंगे, जिससे धार्मिक और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं. वहीं मंगल और अन्य ग्रहों के प्रभाव से सामाजिक और मौसम संबंधी उतार-चढ़ाव संभव हैं. स्वास्थ्य, बाजार और प्राकृतिक परिस्थितियों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है.

नोएडा | Published: 22 Feb, 2026 | 12:36 PM

Hindu New Year 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार 19 मार्च 2026, गुरुवार से विक्रम संवत 2083 की शुरुआत होगी. इसी दिन गुड़ी पड़वा के साथ हिंदू नववर्ष मनाया जाएगा और चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व भी आरंभ होगा. भारतीय परंपरा में नव संवत्सर को नए उत्साह, सकारात्मक ऊर्जा और संकल्पों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. हर साल की तरह यह नया साल भी अपने साथ संभावनाएं और चुनौतियां लेकर आ रहा है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस बार संवत्सर का नाम ‘रौद्र’ है, जिसका प्रभाव पूरे साल देखने को मिल सकता है.

ग्रहों की कैबिनेट: किसे मिला कौन सा दायित्व?

ज्योतिष मान्यता के अनुसार हर नए साल में ग्रहों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाती हैं, जिसे आसान भाषा में ग्रहों की “कैबिनेट” कहा जाता है.

‘रौद्र’ संवत्सर का प्रभाव: कैसा रहेगा साल?

‘रौद्र’ नाम उग्रता और तीव्रता का संकेत देता है. ऐसे में साल के दौरान कई क्षेत्रों में हलचल बनी रह सकती है. मौसम की दृष्टि से कहीं अधिक गर्मी और लू का प्रभाव तो कहीं अचानक तेज बारिश या तूफान जैसी स्थितियां बन सकती हैं. प्राकृतिक आपदाओं को लेकर सतर्कता आवश्यक रहेगी.

सामाजिक स्तर पर लोगों में चिड़चिड़ापन बढ़ने और सहनशीलता कम होने की आशंका है. छोटी-छोटी बातों पर विवाद या टकराव की स्थिति बन सकती है. अपराध और हिंसा की घटनाएं चिंता का कारण बन सकती हैं.

हालांकि कृषि क्षेत्र के लिए राजा बृहस्पति का प्रभाव सकारात्मक माना जा रहा है. खेती-किसानी में सुधार और अच्छी पैदावार की उम्मीद की जा सकती है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने के संकेत हैं. वहीं सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं के दाम में उतार-चढ़ाव संभव है.

सेहत पर संभावित असर

स्वास्थ्य के मामले में रक्त संबंधी समस्याओं और नए संक्रमणों का खतरा बना रह सकता है. मौसम में बदलाव के कारण वायरल और मौसमी बीमारियां बढ़ सकती हैं. इसलिए साल भर सतर्क रहना और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां अपनाना जरूरी होगा.

नए साल में क्या करें, क्या न करें?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष संयम और धैर्य सबसे बड़ा उपाय है. दान-पुण्य, सेवा और जप-तप से नकारात्मक प्रभाव कम किए जा सकते हैं. धार्मिक पाठ और आध्यात्मिक साधना मानसिक शांति प्रदान कर सकती है.

प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी इस वर्ष विशेष महत्व रखता है. जल्दबाजी में बड़े निर्णय लेने से बचें और विवाद की स्थिति में शांतिपूर्वक समाधान निकालने का प्रयास करें.

वर्ष 2026 में 13 पूर्णिमा और मलमास का विशेष संयोग बन रहा है. मान्यता है कि इस अवधि में किए गए व्रत, पूजा और दान का विशेष फल मिलता है. आध्यात्मिक साधना के लिए यह समय अनुकूल माना जाता है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है. Kisan India इसकी पूर्ण सत्यता का दावा नहीं करता है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें.

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