किसानों के पानी बचाने की कोशिशें रंग ला रहीं.. यूपी से लेकर छत्तीसगढ़ तक मिल रही सफलता, पीएम ने सराहा

restore ground water level : 11 सालों में 'जल संचय अभियान' ने देशभर में करीब 50 लाख कृत्रिम जल संचयन संरचना (तालाब, झील, छोटे पोखर, कुएं) बनाए गए हैं. पीएम मोदी ने जल संकट से निपटने के लिए गांव-गांव में सामुदायिक स्तर पर हो रहे प्रयास पर खुशी जताते हुए कहा कि अमृत सरोवर अभियान से देशभर में करीब 70 हजार सरोवर बनाए गए हैं.

नोएडा | Updated On: 29 Mar, 2026 | 02:54 PM

जलसंकट को लेकर देश ही नहीं दुनियाभर में विशेषज्ञ चिंतित हैं. भारत के कुछ हिस्सों में भूजल स्तर 300 से 400 फीट की गहराई तक चला गया है. हालांकि, इन चिंताओं के बीच कई ऐसी कहानियां भी हैं सामने आई हैं जो बताती हैं कि जल बचाने के लिए आम जन और किसान-ग्रामीण मेहनत कर रहे हैं. इससे उन्हें सफलता भी मिली है. बुंदेलखंड में 75 तालाबों को पुनर्जीवित करने वाले रामबाबू तिवारी ने किसान इंडिया को बताया कि अधिक दोहन से भूजल स्तर में गिरावट आई है. लेकिन, किसान और ग्रामीणों को पानी बचाने के प्रति जागरूकता बढ़ी है. पीएम मोदी ने भी मन की बात कार्यक्रम में ओडिशा से लेकर छत्तीसगढ़ में पानी बचाने के प्रयासों का जिक्र किया है.

50 लाख पोखर, कुएं और जलाशय बनाने में कामयाबी मिली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मन की बात कार्यक्रम में जल संरक्षण के लिए काम कर रहे लोगों की सराहना की. पीएम ने कहा कि पिछले 11 साल में ‘जल संचय अभियान’ ने लोगों को बहुत जागरूक बनाया है और जल संकट से निपटने के लिए गांव-गांव में सामुदायिक स्तर पर भी प्रयास होने लगे हैं. पीएम ने कहा कि गर्मियों की शुरुआत हो चुकी है, यानि ये समय जल संरक्षण के अपने संकल्प को फिर से दोहराने का है. पिछले 11 सालों में ‘जल संचय अभियान’ ने देशभर में करीब 50 लाख कृत्रिम जल संचयन संरचना (तालाब, झील, छोटे पोखर, कुएं) बनाए गए हैं. उन्होंने जल संकट से निपटने के लिए गांव-गांव में सामुदायिक स्तर पर हो रहे प्रयास पर खुशी जताते हुए कहा, “अमृत सरोवर अभियान के तहत भी देशभर में करीब 70 हजार अमृत सरोवर बनाए गए हैं. बारिश का मौसम आने से पहले इन सरोवरों की साफ-सफाई भी शुरू हो गई है.

3 हजार ऊंचाई पर बसे गांव ने छत पर पानी रोकने की व्यवस्था की

पीएम मोदी ने त्रिपुरा के वांगमुन गांव, तेलंगाना के मुधिगुंटा गांव और छत्तीसगढ़ के कोरिया के लोगों की तरफ से किए गए प्रयासों की सराहना की. पीएम मोदी ने बताया कि त्रिपुरा की जंपुई पहाड़ियों में वांगमुन गांव 3000 फीट की ऊंचाई पर बसा है. ये गांव पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहा था. गर्मियों के दिनों में गांव के लोग पानी के लिए लंबी दूरी तय करते थे. आखिरकार गांव के लोगों ने बारिश की हर बूंद को सहेजने का निर्णय किया. आज वांगमुन गांव के लगभग हर घर में ‘रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम’ स्थापित हो गया है। जो गांव कभी पानी की कमी से जूझ रहा था, वो जल संरक्षण की एक प्रेरक मिसाल बन गया है.

छत्तीसगढ़ में किसानों ने खेतों में छोटे तालाब बनाकर भूजल स्तर सुधारा

प्रधानमंत्री ने आगे कहा इसी तरह छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में भी एक अनोखी पहल देखने को मिली. यहां के किसानों ने एक सरल लेकिन प्रभावशाली विचार पर काम किया. यहां के किसानों ने अपने खेतों में छोटे-छोटे रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे बनाएं, जिससे बारिश का पानी खेतों में ही रुकने लगा और धीरे-धीरे वह जमीन के अंदर जाने लगा. आज इस क्षेत्र के 1200 से अधिक किसान इस मॉडल को अपना चुके हैं और गांव का भूजल स्तर बहुत बेहतर हो गया है.

छत्तीसगढ़ के किसानों ने खेतों में छोटे गड्ढे बनाकर पानी बचा रहे हैं.

तेलंगाना में गांव के 400 परिवारों ने जन आंदोलन चलाया

उन्होंने तेलंगाना के मंचेरियाल जिले के मुधिगुंटा गांव के लोगों के प्रयास के बारे में कहा कि यहां के लोगों ने मिलकर पानी की समस्या दूर की है. गांव के 400 परिवारों ने अपने घरों में सोख गड्ढा बनाया और जल संरक्षण का जन-आंदोलन बना दिया. इससे गांव का भूजल स्तर बेहतर हुआ है, साथ ही प्रदूषित पानी की वजह से होने वाली बीमारियां बहुत कम हो गई हैं.

यूपी में रामबाबू के संगठन ने 75 तालाबों को जिंदा किया, पीएम से मिली प्रशंसा

मंगलभमि फाउंडेशन के प्रमुख रामबाबू तिवारी ने किसान इंडिया को बताया कि उनके संगठन ने बीते कुछ वर्षों के दौरान बुंदेलखंड के अलग-अलग जिलों में 75 तालाबों को बचाने, पुनर्जीवित करने का काम किया है. उन्होंने बताया कि इसके लिए उन्हें केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय की ओर से वॉटर हीरोज का पुरस्कार और 10 हजार रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि भी मिली है. जबकि, पीएम मोदी भी उनके काम की सराहना अपने 27 जून 2021 को प्रसारित मन की बात कार्यक्रम में कर चुके हैं.

किसानों-ग्रामीणों के प्रयास काफी नहीं, आमजन को एकजुट होना होगा

रामबाबू तिवारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड का इलाका जल संकट से जूझ रहा है. यहां पहले से ही भूजल स्तर काफी गहराई में है और बांदा में धान की अत्यधिक खेती से भूजल का अधिक दोहन बढ़ा है, जो खतरे को इशारा दे रहा है. उन्होंने बताया कि भूजल स्तर में आ रही गिरावट को रोकने के लिए आमजन को आगे आना होगा. वह अपने संगठन के जरिये गांवों में पानी चौपाल कार्यक्रम का आयोजन कर किसान और ग्रामीणों को पानी बचाने के प्रति जागरूक करते हैं, इससे सुधार तो हो रहा है. लेकिन, भूजल स्तर ऊपर लाने के लिये यह काफी नहीं है.

Published: 29 Mar, 2026 | 02:46 PM

Topics: