क्या आपने कभी चलते हुए पेड़ के बारे में सुना है? जानिए ‘वॉकिंग ट्री’ के पीछे का विज्ञान
वॉकिंग पाम को खास बनाती हैं इसकी जड़ें. आम पेड़ों की तरह इसकी जड़ें जमीन के भीतर गहराई तक नहीं जातीं, बल्कि जमीन के ऊपर दिखाई देती हैं. ये जड़ें किसी मकड़ी के पैरों या लकड़ी के खंभों जैसी लगती हैं, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में स्टिल्ट रूट्स कहा जाता है. यही जड़ें इस पेड़ को बाकी पेड़ों से बिल्कुल अलग बना देती हैं.
Walking tree: धरती पर पेड़-पौधों को हम आमतौर पर एक ही जगह जमे हुए देखते हैं. बीज गिरा, पौधा उगा और फिर पूरी जिंदगी उसी स्थान पर खड़ा रहा. लेकिन दुनिया के घने जंगलों में एक ऐसा पेड़ भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह अपनी जगह बदल सकता है. यही वजह है कि इसे लोग प्यार से और हैरानी के साथ ‘वॉकिंग ट्री’ या ‘चलता हुआ पेड़’ कहते हैं. यह बात सुनकर अक्सर लोगों को लगता है कि यह कोई कहानी या लोककथा होगी, लेकिन सच यह है कि इस रहस्य के पीछे प्रकृति का एक अनोखा खेल छिपा है.
जंगलों में छिपा एक अनोखा पेड़
इस पेड़ का वैज्ञानिक नाम Socratea exorrhiza है और इसे आम भाषा में वॉकिंग पाम कहा जाता है. यह पेड़ मुख्य रूप से दक्षिण और मध्य अमेरिका के वर्षावनों में पाया जाता है. अमेजन के घने जंगल, कोस्टा रिका, पनामा, इक्वाडोर, कोलंबिया और पेरू जैसे इलाकों में यह पेड़ आम तौर पर देखने को मिलता है. ये इलाके सालभर नमी से भरे रहते हैं, जहां धूप जमीन तक मुश्किल से पहुंच पाती है.
क्यों कहा जाता है इसे ‘चलता हुआ पेड़’
वॉकिंग पाम को खास बनाती हैं इसकी जड़ें. आम पेड़ों की तरह इसकी जड़ें जमीन के भीतर गहराई तक नहीं जातीं, बल्कि जमीन के ऊपर दिखाई देती हैं. ये जड़ें किसी मकड़ी के पैरों या लकड़ी के खंभों जैसी लगती हैं, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में स्टिल्ट रूट्स कहा जाता है. यही जड़ें इस पेड़ को बाकी पेड़ों से बिल्कुल अलग बना देती हैं.
कहा जाता है कि जब जंगल में किसी एक दिशा से ज्यादा धूप मिलने लगती है, तो यह पेड़ उस ओर नई जड़ें उगाने लगता है. धीरे-धीरे पुरानी जड़ें कमजोर होकर खत्म हो जाती हैं. इस प्रक्रिया में ऐसा लगता है मानो पेड़ अपनी जगह छोड़कर थोड़ी दूरी तक आगे बढ़ गया हो.
क्या सच में चलता है यह पेड़?
लोक मान्यताओं के अनुसार, यह पेड़ हर साल कुछ मीटर तक अपनी जगह बदल सकता है. कुछ कहानियों में तो यह भी कहा गया है कि यह रोज कुछ सेंटीमीटर आगे बढ़ जाता है. हालांकि, वैज्ञानिक इस दावे को लेकर पूरी तरह सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि पेड़ सचमुच पैरों की तरह चल नहीं रहा, बल्कि जड़ों के असमान विकास की वजह से उसकी स्थिति बदली-सी प्रतीत होती है.
असल में, यह एक बहुत धीमी प्रक्रिया है, जिसे इंसानी आंखें सीधे महसूस नहीं कर पातीं. सालों और दशकों में जब पेड़ की जड़ें एक दिशा में मजबूत और दूसरी दिशा में कमजोर होती हैं, तब उसका तना थोड़ा खिसका हुआ नजर आता है. इसी वजह से लोगों को लगता है कि पेड़ ‘चल’ गया.
वैज्ञानिक क्या कहते हैं इस रहस्य पर
कई वनस्पति वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने इस पेड़ पर अध्ययन किया है. उनका मानना है कि वॉकिंग पाम का चलना एक तरह का भ्रम है, लेकिन यह भ्रम भी प्रकृति की अनोखी रणनीति को दिखाता है. जंगल में जहां धूप, नमी और मिट्टी की स्थिति लगातार बदलती रहती है, वहां इस तरह की जड़ें पेड़ को संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं.
कुछ वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि ये जड़ें तेज बारिश, मिट्टी के कटाव और ढलान वाले इलाकों में पेड़ को गिरने से बचाती हैं. यानी ‘चलना’ भले ही पूरी तरह सच न हो, लेकिन इस पेड़ की बनावट इसे कठिन हालात में जीवित रहने की ताकत जरूर देती है.
प्रकृति का अद्भुत संतुलन
वॉकिंग ट्री हमें यह सिखाता है कि प्रकृति स्थिर नहीं है, बल्कि लगातार खुद को ढालती रहती है. जंगलों में जहां हर दिन सूरज की रोशनी का रास्ता बदलता है, वहां पेड़-पौधे भी अपने तरीके से परिस्थितियों के साथ समझौता करते हैं.
रहस्य बना रहेगा आकर्षण
आज भी यह सवाल पूरी तरह सुलझा नहीं है कि वॉकिंग पाम सचमुच चलता है या नहीं. लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि यह पेड़ प्रकृति की सबसे दिलचस्प रचनाओं में से एक है. यह हमें याद दिलाता है कि धरती पर अभी भी बहुत कुछ ऐसा है, जिसे हम पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं. शायद यही वजह है कि ‘चलता हुआ पेड़’ आज भी लोगों की जिज्ञासा और कल्पना दोनों को जगाता है.