क्या आप भी हैं कन्फ्यूज? जानिए अंडे और मुर्गी की लड़ाई में विज्ञान ने किसे बताया विजेता

सदियों से बहस का विषय रही अंडा या मुर्गी की पहेली को विज्ञान ने सुलझा लिया है. शोधकर्ताओं ने प्रोटीन संरचना और जीवाश्मों के गहन अध्ययन के बाद यह स्पष्ट किया है कि पृथ्वी के विकास क्रम में किसका स्थान पहले आता है. यह दिलचस्प लेख आपको विकासवाद के उन अनसुने पहलुओं से रूबरू कराएगा जो बेहद हैरान करने वाले हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 11 Jan, 2026 | 06:27 PM

Chicken or Egg Mystery:  हम सबने बचपन में कभी न कभी दोस्तों या बड़ों से यह सवाल जरूर पूछा होगा कि पहले अंडा आया या मुर्गी? यह सवाल सुनने में जितना सरल लगता है, इसका जवाब उतना ही पेचीदा रहा है. कभी इसे दर्शन से जोड़ा गया, तो कभी धर्म से. लेकिन इस बार विज्ञान ने अपनी प्रयोगशालाओं और जीवाश्मों (fossils) के जरिए इस गुत्थी को सुलझा लिया है. वर्ल्ड एग डे के मौके पर चलिए जानते हैं कि आखिर वह कौन था, जिसने इस धरती पर पहला कदम रखा.

समंदर की गहराइयों में छिपा था अंडे का राज

अगर हम जीवन की शुरुआत की बात करें, तो विज्ञान कहता है कि अंडा, मुर्गी से करोड़ों साल बड़ा है. जब धरती पर परिंदों का नामो-निशान भी नहीं था, तब समुद्र के भीतर सूक्ष्म जीवों और कशेरुकियों (vertebrates) ने अंडे देना शुरू कर दिया था. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रॉयल बेल्जियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरल साइंसेज के डॉ. कोएन स्टीन बताते हैं कि अंडा विकास की यात्रा में एक क्रांतिकारी मोड़ था. इसने जीवों को पानी की मजबूरी से निकालकर सूखी जमीन पर फलने- फूलने की आजादी दी. यानी तकनीकी रूप से, डायनासोर के दौर में भी अंडे मौजूद थे, जबकि मुर्गी तो बहुत बाद में आई.

ओवोक्लेडिन 17- वो जादुई प्रोटीन जिसने बाजी पलट दी

अब आप सोच रहे होंगे कि अगर अंडा पहले आया, तो फिर मुर्गी को लेकर विवाद क्यों? यहां कहानी में एक ट्विस्ट है. अगर सवाल मुर्गी के अंडे का है, तो जवाब बदल जाता है. वैज्ञानिकों ने पाया कि मुर्गी के अंडे  के कठोर खोल (shell) को बनाने के लिए ओवोक्लेडिन-17 (OC-17) नाम का एक खास प्रोटीन चाहिए होता है. चौंकाने वाली बात यह है कि यह प्रोटीन केवल मुर्गी के अंडाशय (Ovary) में ही बनता है. इसका सीधा मतलब यह है कि बिना मुर्गी के, मुर्गी का अंडा तैयार ही नहीं हो सकता. इस लिहाज से, पहले मुर्गी आई, जिसने उस खास अंडे को जन्म दिया.

पूर्वज नहीं देते थे अंडे, सीधे पैदा होते थे बच्चे

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नेचर इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन में छपे एक ताजा शोध ने सबको हैरान कर दिया है. 51 जीवाश्म प्रजातियों के अध्ययन से पता चला कि मुर्गियों के जो शुरुआती सरीसृप (reptilian) पूर्वज थे, वे अंडा नहीं देते थे, बल्कि सीधे बच्चे पैदा करते थे. समय के साथ प्रकृति ने खुद को बदला. सुरक्षा और विकास  के नजरिए से कठोर खोल वाले अंडे देना ज्यादा फायदेमंद साबित हुआ. धीरे-धीरे विकास की सीढ़ी चढ़ते हुए जीव विविपेरस (बच्चे देने वाले) से ओविपेरस (अंडे देने वाले) बन गए.

जेनेटिक म्यूटेशन- एक लगभग मुर्गी की कहानी

अब आपके मन में सवाल होगा कि पहली मुर्गी कहां से आई? वैज्ञानिकों का मानना है कि हजारों साल पहले एक पक्षी था जो लगभग मुर्गी जैसा था. उस पक्षी ने एक अंडा दिया, जिसमें एक छोटा सा जेनेटिक म्यूटेशन हुआ. उस अंडे से जो जीव निकला, वह पूरी तरह से मुर्गी था. इस तरह, एक छोटे से बदलाव ने दुनिया को उसका पहला घरेलू पक्षी दिया, जिसे आज हम मुर्गी के रूप में जानते हैं.

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