दिखने में रुई जैसा कीट, लेकिन सेब की खेती के लिए है बड़ा खतरा, जानें बचाव के आसान तरीके

वूली एफिड की सबसे बड़ी पहचान उसके शरीर पर जमी सफेद रुई जैसी परत होती है. यह परत उसे ठंड, दवाइयों और बाहरी असर से बचाने का काम करती है. यह कीट सेब के पेड़ों की कोमल टहनियों, तनों और कई बार जड़ों तक पहुंचकर रस चूसता है.

नई दिल्ली | Published: 20 Jan, 2026 | 11:05 AM

woolly aphid control: पहाड़ों और ठंडे इलाकों में सेब की खेती किसानों की आजीविका का मजबूत सहारा है. एक सेब का पेड़ सालों की मेहनत से तैयार होता है, लेकिन कई बार एक छोटा-सा कीट पूरी बगिया को नुकसान पहुंचा देता है. ऐसा ही एक खतरनाक कीट है वूली एफिड, जिसे किसान अक्सर “रुई वाला कीड़ा” भी कहते हैं. यह कीट देखने में भले ही छोटा और हल्का लगे, लेकिन अगर समय रहते इसे नहीं रोका गया तो यह सेब के पेड़ों को अंदर से खोखला कर सकता है.

वूली एफिड की पहचान और नुकसान

वूली एफिड की सबसे बड़ी पहचान उसके शरीर पर जमी सफेद रुई जैसी परत होती है. यह परत उसे ठंड, दवाइयों और बाहरी असर से बचाने का काम करती है. यह कीट सेब के पेड़ों की कोमल टहनियों, तनों और कई बार जड़ों तक पहुंचकर रस चूसता है. जब पेड़ का रस लगातार निकाला जाता है, तो उसकी बढ़वार रुक जाती है. धीरे-धीरे टहनियां कमजोर होकर सूखने लगती हैं और नई पत्तियां व फूल ठीक से विकसित नहीं हो पाते.

इस कीट का सबसे खतरनाक असर यह है कि यह कई बीमारियों को फैलाने का जरिया भी बन सकता है. इससे फल छोटे रह जाते हैं, उनकी चमक कम हो जाती है और बाजार में सही दाम नहीं मिल पाता. कुछ मामलों में पूरा पेड़ ही धीरे-धीरे मरने लगता है.

प्राकृतिक तरीकों से नियंत्रण क्यों है जरूरी

आज के समय में किसान रसायनों पर निर्भर हो गए हैं, लेकिन वूली एफिड के मामले में प्राकृतिक उपाय काफी कारगर साबित हो सकते हैं. बागों में कुछ ऐसे लाभकारी कीट होते हैं जो वूली एफिड को खाते हैं और उसकी संख्या अपने आप कम कर देते हैं. अगर बाग का वातावरण संतुलित रखा जाए तो ये कीट खुद-ब-खुद पनपते हैं और रासायनिक दवाओं की जरूरत कम पड़ती है.

इसके अलावा, कुछ किसान बाग में ऐसे उपाय अपनाते हैं जिससे वूली एफिड को पेड़ तक पहुंचने में परेशानी हो. इससे कीट फैलने से पहले ही काबू में आ जाता है और नुकसान कम होता है.

संक्रमित शाखाओं की समय पर छंटाई

अगर किसी पेड़ की कुछ शाखाएं वूली एफिड से ज्यादा प्रभावित दिखें, तो उन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. ऐसी शाखाओं को समय रहते काटकर हटा देना बेहद जरूरी होता है. छंटाई करते समय साफ औजारों का इस्तेमाल करना चाहिए और काटी गई शाखाओं को बाग में नहीं छोड़ना चाहिए. इन्हें नष्ट करना ही सबसे सुरक्षित तरीका है, ताकि कीट दोबारा न फैले.

रसायनों का इस्तेमाल सोच-समझकर करें

जब संक्रमण बहुत ज्यादा फैल जाए और प्राकृतिक उपाय काम न करें, तब ही रासायनिक दवाओं का सहारा लेना चाहिए. हल्के कीटनाशी साबुन या बागवानी तेल वूली एफिड पर असर दिखाते हैं, लेकिन इनका छिड़काव सही समय और सही मात्रा में होना जरूरी है. ज्यादा दवा न केवल कीटों को बल्कि पेड़, मिट्टी और फायदेमंद कीड़ों को भी नुकसान पहुंचा सकती है.

नियमित निगरानी ही है सबसे बड़ा बचाव

वूली एफिड से बचाव का सबसे आसान और असरदार तरीका है बाग की नियमित निगरानी. अगर किसान हर हफ्ते अपने पेड़ों की जांच करें, तो शुरुआती स्तर पर ही कीट को पकड़ सकते हैं. समय पर की गई छोटी कार्रवाई बड़े नुकसान से बचा सकती है. सेब की खेती में धैर्य और सतर्कता ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है.

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