करना चाहते हैं ज्यादा कमाई तो करें ‘फ्रूट कवरिंग’.. सरकार दे रही है 50 फीसदी सब्सिडी, जानें इसके फायदे

10 एकड़ में आम की खेती करने वाले किसान और कृषि एक्सपर्ट सुमन कुमार चौधरी ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि आप अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो आम ही नहीं, बल्कि अमरूद और सेब की भी 'कवरिंग' करनी होगी. इससे बारिश, तेज धूप और कीटों का असर फल के ऊपर बहुत कम होता है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 29 Mar, 2026 | 12:38 PM

आंध्र प्रदेश के कडपा जिले में आम उत्पादकों के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब उनके आम की क्वालिटी पहले से बेहतर रहेगी. क्योंकि राज्य सरकार कीट और बीमारियों से बचाने के लिए ‘फ्रूट कवरिंग’ को बढ़ावा दे रही है. इसके लिए किसानों को 50 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है. सरकार को उम्मीद है कि उसकी इस योजना से किसानों को काफी फायदा होगा. फल के उपर किसी तरह के दाग-धब्बे नहीं देखने को मिलेंगे. ऐसे में मार्केट में उनकी उपज को बेहतर रेट मिलेगा. वहीं, कृषि एक्सपर्ट सुमन कुमार चौधरी ने भी ‘फ्रूट कवरिंग’ को किसानों के लिए फायदेमंद बताया है.

आंध्र प्रदेश सरकार ने कीट और बीमारियों से बचाने के लिए एक नया ‘फ्रूट कवरिंग’ तरीका अपनाया है, जिससे किसानों के नुकसान कम होते हैं और पैदावार बढ़ती है. किसानों को इस तकनीक के लिए 50 फीसदी सब्सिडी मिल रही है, जो प्रति हेक्टेयर 15,000 रुपये होती है. खास बात यह है कि ‘फ्रूट कवरिंग’ के चलते कीटनाशक कम इस्तेमाल करने पड़ते हैं. इससे फल की गुणवत्ता बढ़ती है और मुनाफा भी ज्यादा मिलता है. कदापा, बड़वेल, पोरुममिल्ला, पुलिवेंडुला, मुद्दनूर और मिदुकुरु क्षेत्रों में करीब 50 हेक्टेयर के लिए किसान फ्रूट कवरिंग के लिए आवेदन कर चुके हैं.

फलों की गुणवत्ता बेहतर रहती है

गोपालवरम के किसान सुब्बारायुडु ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि हमने 15 एकड़ में आम की खेती की है और 60  फीसदी से ज्यादा पेड़ों को कवर कर दिया है, जिससे अच्छे परिणाम दिख रहे हैं. इससे कीटों का हमला कम होता है और फलों की गुणवत्ता बेहतर रहती है. साथ ही आमदनी भी बढ़ती है. उन्होंने कहा कि सब्सिडी मिलने से खर्च भी कम हुआ है.

कब करें ‘फ्रूट कवरिंग’

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फलों को सही समय पर कवर करना बहुत जरूरी है. जब फल लगभग 100 ग्राम का हो तो कवर कर दें. अगर आप बहुत जल्दी या देर से कवर करते हैं तो फायदा कम होगा. खास बात यह है कि इस तकनीक से कीटनाशक का भी कम इस्तेमाल  होता है, जिससे फल सुरक्षित रहते हैं. इसके अलावा पक्षी भी फल को नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं. जिला कलेक्टर डॉ. श्रीधर चेर्कुरी ने किसानों से कहा कि सब्सिडी का पूरा लाभ उठाएं और इस तरीके को अपनाएं. सरकार इस योजना के तहत प्रति किसान दो हेक्टेयर तक वित्तीय मदद दे रही है.

‘फ्रूट कवरिंग’ से क्या होता है फायदा

10 एकड़ में आम की खेती करने वाले किसान और कृषि एक्सपर्ट सुमन कुमार चौधरी ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि आप अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो आम ही नहीं, बल्कि अमरूद और सेब की भी ‘कवरिंग’ करनी होगी. इससे बारिश, तेज धूप और कीटों का असर फल के ऊपर बहुत कम होता है. ऐसे में आम, सेब और अमरूद की चमक और क्वालिटी  बरकरार रहती है. उन्होंने कहा कि ‘फ्रूट कवरिंग’ का सबसे बड़ा फयदा यह है कि पक्षी फल को नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं. इससे फल का वजन तेजी से बढ़ता है. उन्होंने कहा कि मौजूदा वक्त में विदेशों में निर्यात होने वाले उन्नत किस्म के आमों के लिए किसान ‘फ्रूट कवरिंग’ का इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि, कई प्रोग्रेसिव किसानों ने अमरूद के लिए भी ‘फ्रूट कवरिंग’ शुरू कर दी है. इससे मार्केट में अमरूद के दाम बढ़ गए हैं. 50 से 60 रुपये किलो बिकने आले अमरूद की कीमत अब 100 से 120 रुपये हो गई है.

 

 

 

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Published: 29 Mar, 2026 | 12:31 PM
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