प्याज की ग्रेडिंग में बड़ा बदलाव! नई मशीन 1 घंटे में करेगी 10 टन छंटाई, 80 फीसदी तक घटेगी मजदूरी

Onion Grading Machine: महाराष्ट्र के पिंपलगांव में प्याज की ग्रेडिंग के लिए नई ऑटोमेटेड मशीन लगाई गई है. यह मशीन एक घंटे में 10 टन तक प्याज की छंटाई कर सकती है और मैनुअल ग्रेडिंग की तुलना में करीब 80 फीसदी तक मजदूरी की जरूरत घटाने का दावा किया गया है.

नोएडा | Published: 20 Aug, 2026 | 08:34 AM

Automated Onion Grading: महाराष्ट्र के नासिक जिले का पिंपलगांव देश के बड़े प्याज कारोबार और निर्यात केंद्रों में गिना जाता है. यहां अब प्याज की छंटाई और ग्रेडिंग के काम में नई तकनीक का इस्तेमाल शुरू हुआ है. कृषि मशीनरी कंपनी Agrograde ने एक किसान उत्पादक कंपनी (FPO) में अपनी ऑटोमेटेड ग्रेडप्लस प्रो प्याज ग्रेडिंग सिस्टम मशीन लगाई है. कंपनी का दावा है कि यह मशीन एक घंटे में 10 मीट्रिक टन तक प्याज की ग्रेडिंग कर सकती है और हाथ से होने वाली छंटाई के मुकाबले करीब 80 फीसदी तक मजदूरी की जरूरत कम कर देती है.

10 टन प्याज की एक घंटे में ग्रेडिंग

प्याज की बिक्री और निर्यात में उसका आकार और क्वालिटी काफी मायने रखती है. अभी तक कई जगहों पर प्याज की ग्रेडिंग का काम मजदूर हाथ से करते हैं, जिसमें समय और मेहनत दोनों ज्यादा लगते हैं. नई मशीन इस काम को काफी तेज कर सकती है. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के मुताबिक, ग्रेडप्लस प्रो की ग्रेडिंग सटीकता करीब 99 फीसदी तक है. इससे मैनुअल तरीके के मुकाबले काम की रफ्तार तीन से पांच गुना तक बढ़ सकती है. खास बात यह है कि मशीन सिर्फ ग्रेडिंग ही नहीं करती, बल्कि प्याज को उतारने और बैग में भरने का काम भी अपने आप कर सकती है.

प्याज की बाहरी परत को नुकसान से बचाने पर जोर

कृषि मशीनरी के इस्तेमाल में सबसे बड़ी चुनौती प्याज की ऊपरी पतली परत को नुकसान पहुंचना है. ज्यादा रगड़ या तेज झटके से प्याज का छिलका उतर सकता है. इससे उसकी स्टोरेज लाइफ कम होने के साथ किसानों और कारोबारियों को कीमत में भी नुकसान हो सकता है. Agrograde का कहना है कि उसकी मशीन में वेव मोशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. इसमें प्याज को ग्रेडिंग लाइन के दौरान कम झटकों और रगड़ के साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती है. इसका मकसद प्याज की बाहरी परत को बचाना है.

महंगी मशीनों के बावजूद रही थी परेशानी

कंपनी के मुताबिक, भारत में कुछ पारंपरिक और विदेशी ग्रेडिंग मशीनों को अपनाने में इसलिए दिक्कत आई क्योंकि भारतीय प्याज की कुछ किस्मों की बाहरी परत काफी पतली होती है. मशीन के संपर्क में आने से इनमें स्कफिंग और छिलका उतरने की समस्या देखी गई. कंपनी ने दावा किया कि करीब 1.25 करोड़ रुपये तक की कीमत वाली कुछ आयातित मशीनों में भी ऐसी समस्या सामने आई थी. ऐसे में भारतीय परिस्थितियों और प्याज की किस्मों को ध्यान में रखकर मशीन तैयार करने पर जोर दिया गया है.

खेत से मंडी तक ले जा सकेंगे मशीन

Agrograde ने इसका ट्रैक्टर पर लगने वाला मॉडल भी तैयार किया है. इसकी मदद से मशीन को खेत, पैकहाउस, कोल्ड स्टोरेज और मंडी जैसी अलग-अलग जगहों पर ले जाया जा सकता है. इसका फायदा यह होगा कि किसान या कारोबारी प्याज को ग्रेडिंग के लिए किसी एक बड़े केंद्र तक ले जाने के बजाय फसल के नजदीक ही यह काम कर सकेंगे.

कंपनी के सह-संस्थापक राकेशकुमार बराई के मुताबिक, मशीन को भारतीय प्याज सप्लाई चेन की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. कंपनी का दावा है कि ग्रेडिंग की लागत करीब 0.05 रुपये प्रति किलो तक लाई गई है और सिस्टम एक दिन में 200 मीट्रिक टन तक प्याज संभाल सकता है.

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