Cotton Production: भारत में कम हो सकता है कपास का उत्पादन, बढ़ती घरेलू खपत से आयात पर नजर
Cotton Production India: USDA की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2026-27 सीजन में भारत का कपास उत्पादन थोड़ा घटकर करीब 24.5 मिलियन गांठ रह सकता है. कम बारिश और कपास की घटती बुवाई को इसकी वजह माना गया है. वहीं कपड़ा मिलों में मांग बढ़ने से घरेलू खपत 26.2 मिलियन गांठ तक पहुंचने का अनुमान है.
Cotton Production Decline: भारत के कपास किसानों और कपड़ा उद्योग के लिए 2026-27 सीजन अहम रहने वाला है. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की विदेशी कृषि सेवा (FAS) की 28 अगस्त 2026 को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीजन में देश में कपास का उत्पादन थोड़ा कम रह सकता है. एक तरफ कपास की खेती का रकबा घटने का अनुमान है, तो दूसरी तरफ कम बारिश की आशंका से फसल की औसत पैदावार पर भी असर पड़ सकता है. हालांकि कपड़ा उद्योग में कपास की मांग बढ़ने से किसानों को कीमतों के मोर्चे पर कुछ फायदा मिलने की उम्मीद है.
11.5 मिलियन हेक्टेयर में कपास की खेती का अनुमान
USDA के अनुमान के अनुसार, 2026-27 सीजन में भारत में करीब 11.5 मिलियन हेक्टेयर जमीन पर कपास की खेती हो सकती है. कपास का कुल उत्पादन करीब 24.5 मिलियन 480-पाउंड गांठ रहने का अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट में औसत उपज में भी करीब 2 फीसदी की गिरावट का अनुमान है. इसके चलते पैदावार घटकर लगभग 464 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह सकती है. खासकर पश्चिमी और मध्य भारत में लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति फसल के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है.
बारिश पर टिकी कपास की पैदावार
कपास की फसल के लिए आने वाले दिनों की बारिश बेहद अहम मानी जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक 12 अगस्त तक देश में मानसूनी बारिश सामान्य से करीब 12 फीसदी कम थी. हालांकि बाद में बारिश की कमी में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन कपास की बुवाई अभी भी पिछले साल के मुकाबले करीब 2 फीसदी कम बताई गई है. देश के जलाशयों में पानी का स्तर उनकी कुल क्षमता का करीब 60 फीसदी बताया गया है. ऐसे में अगस्त और सितंबर में बारिश का रुख कपास की फसल के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेगा.
कपड़ा मिलों में बढ़ेगी कपास की खपत
कपास उत्पादन में कमी के अनुमान के बीच घरेलू कपड़ा उद्योग की मांग बढ़ने की उम्मीद है. USDA ने भारतीय कपड़ा मिलों द्वारा कपास के इस्तेमाल का अनुमान बढ़ाकर 26.2 मिलियन 480-पाउंड गांठ कर दिया है. इसके पीछे कपड़े और तैयार परिधानों के निर्यात ऑर्डर में बढ़ोतरी को बड़ी वजह माना गया है. अगर निर्यात मांग मजबूत रहती है तो कपड़ा मिलों को ज्यादा कपास की जरूरत होगी. इससे देश के अंदर कपास की खपत और बढ़ सकती है.
कपास आयात पर बढ़ सकता है दबाव
घरेलू मांग बढ़ने और उत्पादन थोड़ा कम रहने की स्थिति में कपास की उपलब्धता पर दबाव बन सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, कपास का MSP ऊंचा रहने और फसल की संभावनाओं के चलते बाजार भाव मजबूत रह सकते हैं. अगर 31 अक्टूबर के बाद सामान्य टैरिफ छूट खत्म हो जाती है, तो कपड़ा मिलें अपनी जरूरत पूरी करने के लिए शुल्क-मुक्त आयात की व्यवस्था का इस्तेमाल कर सकती हैं. ऐसे में आने वाले समय में भारत का कपास आयात बढ़ने की संभावना है.
निर्यात के लिए कम कपास बचेगा
घरेलू कपड़ा मिलों की बढ़ती खपत का एक असर यह भी हो सकता है कि देश में उपलब्ध कपास का बड़ा हिस्सा घरेलू उद्योग में इस्तेमाल हो जाए. इससे कच्चे कपास के निर्यात के लिए बचने वाली अतिरिक्त मात्रा कम हो सकती है. यानी भारत से कच्चे कपास के निर्यात की गुंजाइश सीमित रह सकती है, जबकि घरेलू कपड़ा उद्योग के लिए इसकी उपलब्धता को प्राथमिकता मिल सकती है.
किसानों के लिए क्या संकेत?
कपास उत्पादन में संभावित कमी और घरेलू मांग में बढ़ोतरी से आने वाले समय में कीमतों को मजबूती मिल सकती है. इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर भाव मिलने की उम्मीद बनती है. हालांकि कीमतों का वास्तविक रुख कई बातों पर निर्भर करेगा. सबसे अहम अगस्त-सितंबर की बारिश और खेतों में फसल की स्थिति रहेगी. अगर बारिश सामान्य रहती है और फसल को नुकसान नहीं होता, तो उत्पादन अनुमान में बदलाव भी हो सकता है. वहीं बारिश कमजोर रहने पर पैदावार और बाजार में उपलब्धता दोनों प्रभावित हो सकते हैं.