प्रोटीन की भूख ने बदला सोयाबीन का खेल! खली की घरेलू खपत बढ़ी, निर्यात में 43 फीसदी की भारी गिरावट

प्रोटीन की बढ़ती मांग ने सोयाबीन खली के घरेलू बाजार को नई ताकत दी है. पशु आहार और खाद्य क्षेत्र में खपत बढ़ी, लेकिन निर्यात 43 प्रतिशत गिर गया. उत्पादन और आवक में कमी के बीच उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में सोयाबीन का रकबा बढ़ना बाजार के लिए बड़ा संकेत है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 28 Aug, 2026 | 10:29 PM

Soybean Export: भारत में प्रोटीन की बढ़ती मांग का असर अब सोयाबीन बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है. पशु आहार से लेकर खाद्य क्षेत्र तक सोयाबीन मील यानी सोयाबीन खली की घरेलू खपत बढ़ी है. हालांकि, दूसरी ओर निर्यात और उत्पादन में गिरावट ने बाजार की तस्वीर बदल दी है. नए राज्यों में सोयाबीन का रकबा बढ़ने के बावजूद बड़े उत्पादक राज्यों में कमी दर्ज की गई है.

घरेलू फीड क्षेत्र में बढ़ी सोयाबीन खली की मांग

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर से जुलाई के दौरान घरेलू पशु आहार  क्षेत्र में सोयाबीन मील की खपत करीब 53 लाख टन रही. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 52 लाख टन था. यानी घरेलू फीड उद्योग में इसकी खपत लगभग 2 प्रतिशत बढ़ी है. खाद्य क्षेत्र में भी सोयाबीन मील की मांग में तेजी देखी गई. इस अवधि में इसकी खपत 8 प्रतिशत बढ़कर 7.40 लाख टन हो गई, जबकि पिछले वर्ष यह 6.85 लाख टन थी. SOPA के कार्यकारी निदेशक डी. एन. पाठक के मुताबिक, पोल्ट्री क्षेत्र के विस्तार और प्रोटीन युक्त भोजन की बढ़ती मांग इसके पीछे प्रमुख कारण हैं.

निर्यात 43 फीसदी गिरा, उत्पादन पर भी दबाव

घरेलू मांग बढ़ने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सोयाबीन  मील को चुनौती का सामना करना पड़ा. अक्टूबर-जुलाई के दौरान इसका निर्यात 43 प्रतिशत घटकर 9.72 लाख टन रह गया. पिछले वर्ष इसी अवधि में भारत से 17.08 लाख टन सोयाबीन मील का निर्यात हुआ था. भारतीय सोयाबीन मील की कीमतें वैश्विक बाजार की तुलना में अधिक रहने को निर्यात में गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है. इसी अवधि में सोयाबीन मील का उत्पादन भी करीब 7 प्रतिशत घटकर 70.62 लाख टन रह गया, जबकि पिछले साल उत्पादन 75.75 लाख टन था.

आवक घटी, लेकिन सोयाबीन आयात में आया उछाल

घरेलू बाजार में सोयाबीन की आवक भी कमजोर रही. अक्टूबर से जुलाई के दौरान आवक 13 प्रतिशत घटकर 82.5 लाख टन रही, जबकि पिछले वर्ष यह 95 लाख टन थी. पिछले साल की कमजोर फसल के कारण बाजार में सोयाबीन की उपलब्धता  पर असर पड़ा है. हालांकि, घरेलू उपलब्धता की कमी के बीच सोयाबीन के आयात में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई. पिछले वर्ष इसी अवधि में सिर्फ 0.02 लाख टन आयात हुआ था, जो इस बार बढ़कर 8.94 लाख टन हो गया. SOPA के अनुमान के मुताबिक जुलाई के अंत तक देश में सोयाबीन का कुल स्टॉक करीब 22.75 लाख टन था.

नए राज्यों में बढ़ा रकबा, बड़े उत्पादक राज्यों में कमी

खरीफ 2026 में सोयाबीन की बुवाई  लगभग पूरी हो चुकी है. कृषि मंत्रालय के 21 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में सोयाबीन का रकबा 121.35 लाख हेक्टेयर रहा. पिछले वर्ष यह 122.76 लाख हेक्टेयर था. उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सोयाबीन का क्षेत्र बढ़ा है. वहीं मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में रकबा घटा है. SOPA के निदेशक डी. एन. पाठक के अनुसार, फिलहाल फसल की स्थिति अच्छी है, लेकिन बेहतर उत्पादन के लिए एक बार फिर बारिश की जरूरत है. ऐसे में आने वाले दिनों की बारिश सोयाबीन उत्पादन और बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है.

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Published: 28 Aug, 2026 | 10:29 PM

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