त्योहारों से पहले सोयाबीन तेल की रिकॉर्ड खरीदारी, अगस्त में आयात 6.20 लाख टन पहुंचने का अनुमान

Soybean Oil Import: त्योहारों से पहले भारत में सोयाबीन तेल की मांग बढ़ने से अगस्त में इसका आयात रिकॉर्ड 6.20 लाख टन तक पहुंच सकता है. सूरजमुखी तेल की सप्लाई में दिक्कत और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आकर्षक रहने से आयात बढ़ रहा है. वहीं, सोयाबीन की बुवाई में कमी ने घरेलू सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 22 Aug, 2026 | 10:55 AM

Soybean Oil Import India: भारत में त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले सोयाबीन तेल की मांग तेजी से बढ़ रही है. इसी वजह से अगस्त में देश का सोयाबीन तेल आयात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अध्यक्ष संजीव आस्थाना के मुताबिक, अगस्त में सोयाबीन तेल का आयात करीब 6.20 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है. अगर ऐसा होता है तो यह एक महीने में अब तक का सबसे ज्यादा आयात हो सकता है.

उन्होंने SEA सदस्यों को भेजे अपने मासिक पत्र में कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोयाबीन तेल की कीमतें प्रतिस्पर्धी बनी हुई हैं. इसके साथ ही घरेलू मांग मजबूत है. रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण सूरजमुखी तेल की सप्लाई में आ रही दिक्कतों ने भी भारतीय खरीदारों को सोयाबीन तेल की ओर मोड़ा है.

सूरजमुखी तेल की कमी से सोयाबीन को फायदा

भारत में खाद्य तेल की जरूरत पूरी करने में पाम ऑयल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल की बड़ी हिस्सेदारी है. लेकिन सूरजमुखी तेल की सप्लाई में दिक्कत आने से सोयाबीन तेल की मांग बढ़ रही है. पाम ऑयल भी बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, संजीव आस्थाना ने बताया कि अगस्त में सोयाबीन तेल का आयात करीब 6.20 लाख टन पहुंच सकता है. अगर ऐसा होता है तो यह मौजूदा मार्केटिंग ईयर के औसत मासिक आयात 4.25 लाख टन से करीब 46 फीसदी ज्यादा होगा. त्योहारों के दौरान घरों में तो खाद्य तेल की खपत बढ़ती ही है, साथ ही होटल, रेस्टोरेंट और फूड इंडस्ट्री में भी इसकी मांग बढ़ जाती है. ऐसे में अगस्त में सोयाबीन तेल का आयात बढ़ने की एक बड़ी वजह घरेलू मांग भी मानी जा रही है.

सोयाबीन की बुवाई में आई गिरावट

हालांकि, घरेलू स्तर पर सोयाबीन की स्थिति चिंता बढ़ा रही है. इस साल अल नीनो के असर और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण तिलहन की खेती पर नजर बनी हुई है. 14 अगस्त तक देश में खरीफ तिलहन की कुल बुवाई 184.46 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 185.36 लाख हेक्टेयर था. यानी कुल रकबे में मामूली कमी आई है. सोयाबीन का रकबा पिछले साल के 122.61 लाख हेक्टेयर से घटकर 120.84 लाख हेक्टेयर रह गया.

मूंगफली, तिल और सूरजमुखी के रकबे में बढ़ोतरी देखने को मिली है, लेकिन सोयाबीन में कमी चिंता का विषय है. अब सिर्फ बुवाई का रकबा ही नहीं, बल्कि फसल की हालत, पैदावार, मौसम और किसानों को मिलने वाले दाम भी अहम होंगे.

सोयाबीन बीज का आयात भी बढ़ा

भारत के खाद्य तेल कारोबार में एक और बदलाव देखने को मिला है. अप्रैल-मई 2026 के दौरान देश में 4.31 लाख टन तिलहन का आयात हुआ, जिसकी कीमत करीब 2,284.93 करोड़ रुपये रही. इसमें अकेले सोयाबीन बीज का हिस्सा 4.13 लाख टन था. यह आंकड़ा बताता है कि घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए भारत को आयात पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ रहा है. आस्थाना ने बेहतर घरेलू पैदावार और अच्छी क्वालिटी वाले बीज की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है. देश में सोयाबीन का स्टॉक कम होना भी आयात बढ़ने की एक वजह माना जा रहा है.

खाद्य तेल के निर्यात की तस्वीर कैसी रही?

दूसरी तरफ, अप्रैल-मई 2026 में भारत से खाद्य तेल का निर्यात 41,438 टन रहा. इसकी कीमत 720.85 करोड़ रुपये थी. पिछले साल इसी दौरान 49,100 टन खाद्य तेल का निर्यात हुआ था, जिसकी कीमत 707.09 करोड़ रुपये थी. यानी निर्यात की मात्रा करीब 16 फीसदी कम हुई, लेकिन कम मात्रा के बावजूद निर्यात से मिलने वाली रकम लगभग 2 फीसदी बढ़ी. इसका मतलब है कि इस दौरान बेहतर कीमत पर खाद्य तेल का निर्यात हुआ. निर्यात में मूंगफली तेल सबसे आगे रहा, इसके बाद सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का स्थान रहा.

महंगा हो सकता है आयातित खाद्य तेल

आने वाले समय में भारत के लिए वैश्विक खाद्य तेल बाजार भी महत्वपूर्ण रहेगा. रिजर्व बैंक ने भी खाद्य तेलों के एक हिस्से के ईंधन यानी बायोफ्यूल में इस्तेमाल होने की ओर ध्यान दिलाया है. दुनियाभर में बायोडीजल के लिए पाम ऑयल और दूसरे वनस्पति तेलों का इस्तेमाल बढ़ रहा है.

इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की उपलब्धता पर दबाव पड़ सकता है और कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं. भारत दुनिया के बड़े खाद्य तेल आयातकों में शामिल है. इसलिए वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी का असर देश के आयात बिल, घरेलू खाद्य तेल की कीमतों और महंगाई पर भी पड़ सकता है.

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