अब हर गाय देगी साहीवाल बछिया, बिहार में टेस्ट ट्यूब तकनीक से डेयरी सेक्टर में बड़ा धमाका

Sahiwal Cow: बिहार के समस्तीपुर में पूसा यूनिवर्सिटी ने IVF तकनीक से साहीवाल बछियों का जन्म कर बड़ी सफलता हासिल की है. इस तकनीक से किसान कम समय में बेहतर नस्ल की गाय पा सकेंगे. इससे दूध उत्पादन बढ़ेगा और आमदनी में भी इजाफा होगा, जिससे डेयरी सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 27 Mar, 2026 | 11:30 PM

IVF Technology: अब वो दिन दूर नहीं जब हर किसान अपनी पसंद की नस्ल की गाय खुद तैयार कर सकेगा. सुनने में अजीब लगता है, लेकिन बिहार के समस्तीपुर में ऐसा ही कमाल हो गया है. समस्तीपुर के डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने IVF तकनीक से साहीवाल नस्ल की बछियों का जन्म कराकर एक नई राह खोल दी है. यह सफलता सिर्फ एक प्रयोग नहीं, बल्कि डेयरी सेक्टर में आने वाली बड़ी क्रांति का संकेत है.

IVF तकनीक से हुआ कमाल

बिहार के समस्तीपुर में स्थित पूसा यूनिवर्सिटी ने IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन तकनीक  का इस्तेमाल कर साहीवाल नस्ल की बछियों को जन्म दिलाया है. यह पूर्वी भारत में अपनी तरह का पहला सफल प्रयास माना जा रहा है. इस तकनीक में वैज्ञानिक लैब के अंदर ही भ्रूण तैयार करते हैं और फिर उसे किसी सामान्य गाय की कोख में विकसित कराया जाता है. खास बात यह है कि इससे शुद्ध नस्ल के बछड़े और बछिया पैदा  किए जा सकते हैं, चाहे गाय किसी भी नस्ल की क्यों न हो. इस उपलब्धि से यह साबित हो गया है कि अब अच्छी नस्ल के पशु तैयार करने के लिए वर्षों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा. किसान कम समय में बेहतर नस्ल हासिल कर पाएंगे.

देसी साहीवाल का बढ़ेगा दबदबा

अब तक ज्यादा दूध के लिए किसान विदेशी नस्लों पर निर्भर रहते थे. लेकिन बदलते मौसम और बढ़ती गर्मी ने इन नस्लों की सेहत पर असर डाला है. कई बार ये जल्दी बीमार पड़ती हैं और गर्भधारण में भी दिक्कत होती है. यहीं पर साहीवाल नस्ल उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है. यह देसी नस्ल भारत की गर्म जलवायु में आसानी से टिक जाती है और इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता  भी काफी मजबूत होती है. IVF और OPU जैसी तकनीकों के जरिए अब इस नस्ल को तेजी से बढ़ाया जा सकता है. इसका मतलब है कि आने वाले समय में खेत-खलिहानों में देसी गायों की संख्या तेजी से बढ़ेगी और किसान विदेशी नस्लों पर निर्भरता कम कर पाएंगे.

A2 दूध से बढ़ेगी कमाई

देसी साहीवाल गाय का दूध A2 कैटेगरी में आता है, जिसे सेहत के लिए बेहतर माना जाता है. यह दूध पचने में आसान होता है और शरीर को कई बीमारियों से बचाने  में मदद करता है. आजकल बाजार में A2 दूध की मांग तेजी से बढ़ रही है और इसकी कीमत भी सामान्य दूध से ज्यादा मिलती है. ऐसे में अगर किसान साहीवाल नस्ल की गाय पालते हैं तो उन्हें सीधा फायदा होगा. सबसे बड़ी बात यह है कि अब किसान के पास अगर सामान्य या विदेशी नस्ल की गाय भी है, तो IVF तकनीक की मदद से पहली ही पीढ़ी में शुद्ध साहीवाल बछिया मिल सकती है. इससे उनकी आमदनी बढ़ने के रास्ते खुलेंगे.

गांव-गांव पहुंचेगी तकनीक

पूसा यूनिवर्सिटी अब इस तकनीक को सिर्फ लैब तक सीमित नहीं रखना चाहती. योजना है कि इसे गांव-गांव तक पहुंचाया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इसका फायदा उठा सकें. अगर यह योजना सफल होती है तो बिहार दूध उत्पादन  के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता है. इससे किसानों की आय बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. यह उपलब्धि दिखाती है कि जब आधुनिक विज्ञान और देसी नस्लें एक साथ आती हैं, तो बड़े बदलाव संभव होते हैं. आने वाले समय में यह तकनीक “श्वेत क्रांति 2.0” की नींव बन सकती है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत देगी.

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Published: 27 Mar, 2026 | 11:30 PM
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