डेयरी किसानों की चमकेगी किस्मत, सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक से 90 फीसदी पैदा होंगी दुधारू बछिया

बिहार सरकार के पशुपालन निदेशालय ने डेयरी किसानों के लिए सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक पेश की है. इस जैविक तकनीक के जरिए अब पशुपालक अपनी इच्छा के अनुसार केवल बछिया का जन्म सुनिश्चित कर सकेंगे. इससे न केवल दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि सड़कों पर आवारा घूमने वाले सांडों की संख्या में भी भारी कमी आएगी.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 23 Jan, 2026 | 01:47 PM

Bihar Dairy Department : बिहार के गांवों में अक्सर पशुपालक एक बड़ी समस्या से जूझते हैं-वह है नंदी या बछड़ों की बढ़ती संख्या. दूध के लिए गाय पालने वाले किसान हमेशा यही दुआ करते हैं कि उनके घर बछिया का जन्म हो, ताकि भविष्य में डेयरी का काम बढ़ सके. पशुपालकों की इसी उम्मीद को हकीकत में बदलने के लिए बिहार सरकार का पशुपालन निदेशालय एक क्रांतिकारी तकनीक लेकर आया है, जिसका नाम है सेक्स सॉर्टेड सीमेन (Sex Sorted Semen). यह तकनीक न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाएगी, बल्कि लावारिस पशुओं की समस्या का भी समाधान करेगी.

क्या है यह सेक्स सॉर्टेड सीमेन वाली जादुई तकनीक?

यह विज्ञान का एक ऐसा कमाल है जिसमें गाय के स्पर्म (सीमेन) में मौजूद उन कणों को अलग कर दिया जाता है जो नर या मादा पैदा करते हैं. विज्ञान की भाषा में इसे X और Y क्रोमोसोम को अलग करना कहते हैं. जब कृत्रिम गर्भाधान  (AI) के दौरान केवल X क्रोमोसोम वाले वीर्य का उपयोग किया जाता है, तो इस बात की 90 से 95 प्रतिशत गारंटी होती है कि जन्म लेने वाला बच्चा बछिया ही होगी. बिहार सरकार अब इस तकनीक को हर पंचायत तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है.

पशुपालकों को कैसे होगा इससे मोटा मुनाफा?

एक पशुपालक के लिए बछड़ा पालना अक्सर घाटे का सौदा साबित होता है क्योंकि वे दूध नहीं देते और खेतों में ट्रैक्टर  आने के बाद उनकी मांग भी कम हो गई है. ऐसे में सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक से जब घर में सिर्फ बछिया पैदा होगी, तो किसान के पास आने वाले समय में दुधारू गायों  की संख्या बढ़ जाएगी. इसका सीधा मतलब है-ज्यादा दूध, ज्यादा बिक्री और दोगुना मुनाफा. यह तकनीक डेयरी फार्म को एक नए स्तर पर ले जाने वाली है, जहां किसान अपनी जरूरत के हिसाब से नस्ल तैयार कर सकेगा.

लावारिस पशुओं की समस्या पर लगेगा लगाम

बिहार के सड़कों और खेतों में घूम रहे लावारिस सांड न केवल फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि हादसों का कारण भी बनते हैं. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भविष्य में अनचाहे बछड़ों का जन्म ही कम होगा. जब किसान की मर्जी से बछिया पैदा  होगी, तो वह उसे चाव से पालेगा और सड़कों पर छोड़ने की नौबत नहीं आएगी. बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग का यह कदम पर्यावरण और सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से भी बहुत बड़ा बदलाव लाने वाला है.

कैसे उठाएं इस सरकारी सुविधा का लाभ?

बिहार सरकार इस तकनीक को बहुत ही रियायती दरों पर पशुपालकों तक पहुंचा रही है. इस सुविधा का लाभ लेने के लिए किसान अपने नजदीकी सरकारी पशु अस्पताल या कृत्रिम गर्भाधान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं. वहां तैनात पशु चिकित्सा अधिकारी आपको इस तकनीक और इसके खर्च के बारे में पूरी जानकारी देंगे. यह तकनीक न केवल गिर, साहीवाल जैसी देसी नस्लों  के लिए उपलब्ध है, बल्कि विदेशी नस्लों के सुधार में भी कारगर साबित हो रही है. अब वह दिन दूर नहीं जब बिहार का हर पशुपालक अपनी किस्मत का फैसला खुद करेगा.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

सर्दियों में गुड़ का सेवन क्यों अधिक किया जाता है?