Brazil Gir Bull : राजस्थान की रेतीली धरती पर अब दूध की नदियां और भी तेजी से बहेंगी. अक्सर पशुपालक इस बात से परेशान रहते थे कि गाय बछड़ा दे देती है, जिसे पालना घाटे का सौदा साबित होता है क्योंकि वह दूध नहीं दे सकता. लेकिन अब इस समस्या का इंटरनेशनल समाधान मिल गया है. राजस्थान सरकार केंद्र के साथ मिलकर ब्राजील से उच्च गुणवत्ता वाली गिर नस्ल के सांडों का सेक्स-सॉर्टेड सीमन (Sex-sorted Semen) मंगाने जा रही है.
यह तकनीक किसी जादू से कम नहीं है-इससे पैदा होने वाले बच्चों में 90 प्रतिशत संभावना मादा बछियों की होगी. यानी अब किसान के घर सिर्फ दूध देने वाली गायें ही तैयार होंगी. यह कदम न केवल पशुपालकों की जेब भरेगा, बल्कि राजस्थान को दुग्ध उत्पादन के मामले में दुनिया के नक्शे पर चमका देगा. आइए जानते हैं सरकार की इस हाई-टेक योजना से किसानों की जिंदगी में क्या बदलाव आएंगे.
90 फीसदी बछिया होने की गारंटी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पशुपालकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती नंदी यानी बैलों की बढ़ती संख्या है. गौशालाएं भरी पड़ी हैं और सड़कों पर घूमते आवारा सांड फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं. ब्राजील से आने वाले इस खास सीमन की सबसे बड़ी खूबी यही है कि इससे होने वाली संतान मादा (बछिया) होगी. सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश की देसी गायों की नस्ल में सुधार किया जाए. जब मादा बछियां पैदा होंगी, तो भविष्य में दूध का उत्पादन खुद-ब-खुद बढ़ जाएगा और किसानों को अनुपयोगी पशुओं को पालने का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा.
40 से 50 लीटर दूध का सपना होगा सच
ब्राजील में जिस गिर नस्ल पर काम हुआ है, वह मूल रूप से भारतीय ही है, लेकिन वहां इस पर इतनी रिसर्च हुई है कि वहां की गायें प्रतिदिन 40 से 50 लीटर तक दूध देती हैं. अब वही तकनीक और सीमन राजस्थान के गांवों तक पहुंचेगा. सरकार यह सीमन पशुपालकों को बहुत ही रियायती (सस्ते) दामों पर उपलब्ध कराएगी. सोचिए, अगर आपके घर में एक ऐसी गाय तैयार हो जाए जो बाल्टी भर-भर कर दूध दे, तो आपकी आय दोगुनी होने से कोई नहीं रोक सकता. यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की एक मास्टर स्ट्रैटेजी है.
अब गांव-गांव लगेंगे पशुधन मेले
सिर्फ तकनीक ही नहीं, सरकार जानकारी भी घर-घर पहुंचा रही है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पहले राज्य में केवल 7 बड़े पशु मेले लगते थे, जिनकी संख्या अब बढ़ाकर 44 कर दी गई है. इन मेलों का मकसद किसानों को नई तकनीकों, नस्ल सुधार और पशुओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है. इन मेलों के जरिए दूरदराज के इलाकों में रहने वाले पशुपालक भी ब्राजील वाली इस नई स्कीम और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उठा सकेंगे.
गौशालाओं की समस्या का हल और मजबूत अर्थव्यवस्था
राजस्थान में इस वक्त 4,000 से ज्यादा गौशालाएं हैं. बैलों की संख्या बढ़ने से इन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है. सेक्स-सॉर्टेड सीमेन योजना लागू होने से भविष्य में नर पशुओं का जन्म कम होगा, जिससे गौशालाओं का प्रबंधन आसान हो जाएगा. इसके अलावा, जब दूध उत्पादन बढ़ेगा, तो डेयरी से जुड़ी स्थानीय इकाइयां भी बढ़ेंगी, जिससे गांव के युवाओं को रोजगार मिलेगा. यह योजना केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि किसान के सम्मान और खुशहाली की एक नई शुरुआत है.