Livestock Care : जाड़े की ठिठुरन जैसे ही जनवरी में अपने चरम पर पहुंचती है, वैसे ही पशुपालकों की जिम्मेदारी भी कई गुना बढ़ जाती है. खेत-खलिहान से लेकर पशुशाला तक ठंड का असर साफ दिखने लगता है. ठंडी हवा, कोहरा और गिरता तापमान गाय-भैंस के दूध, सेहत और ताकत पर सीधा वार करता है. ऐसे में अगर समय रहते सही देखभाल न की जाए, तो नुकसान तय है. इसी खतरे को देखते हुए बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने जनवरी के लिए जरूरी सावधानियों की सलाह दी है.
ठंड में पानी का रखें खास ध्यान
जनवरी में पशुओं को पीने के लिए ठंडा पानी देना नुकसानदायक हो सकता है. विभाग के अनुसार, पशुओं को हमेशा ताजा या हल्का गुनगुना पानी ही पिलाना चाहिए. ठंडा पानी पीने से पशुओं को सर्दी, खांसी और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. कई बार इससे दूध उत्पादन भी प्रभावित होता है. गुनगुना पानी पशुओं के शरीर को ठंड से बचाने में मदद करता है और पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाए रखता है. इसलिए दिन में दो से तीन बार साफ और ताजा पानी देना बेहद जरूरी है.
तेल और गुड़ से मिलेगा ठंड से बचाव
दुधारू पशुओं को ठंड में अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत होती है. बिहार सरकार के अनुसार, इस मौसम में पशुओं को थोड़ा-सा तेल और गुड़ खिलाने से शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखने में मदद मिलती है. तेल और गुड़ पशुओं को अंदर से गर्मी देते हैं, जिससे वे ठंड को आसानी से सहन कर पाते हैं. इसका सीधा फायदा दूध उत्पादन पर भी पड़ता है. ध्यान रखें कि तेल और गुड़ सीमित मात्रा में ही दें, ताकि पशु को नुकसान न हो.
एफएमडी टीकाकरण है सबसे जरूरी सुरक्षा
जनवरी के मौसम में खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) जैसी संक्रामक बीमारी का खतरा भी बना रहता है. यह बीमारी बहुत तेजी से फैलती है और पूरे बाड़े को चपेट में ले सकती है. विभाग की सलाह है कि चार माह और उससे अधिक उम्र के सभी पशुओं को एफएमडी का टीका जरूर लगवाएं. समय पर टीकाकरण कराने से पशु गंभीर बीमारी से बचे रहते हैं और दूध उत्पादन पर भी असर नहीं पड़ता.
सही देखभाल से सर्दी में भी बनी रहेगी आमदनी
अगर जनवरी में पशुओं की सही देखभाल की जाए, तो ठंड का मौसम नुकसान की बजाय फायदे का सौदा बन सकता है. गुनगुना पानी, संतुलित आहार, तेल-गुड़ का सही इस्तेमाल और समय पर टीकाकरण से पशु स्वस्थ रहते हैं. स्वस्थ पशु ही अच्छा दूध देते हैं और यही पशुपालकों की आमदनी का मजबूत आधार है. विभाग का मानना है कि थोड़ी सी जागरूकता और समय पर देखभाल अपनाकर पशुपालक सर्दियों में भी नुकसान से बच सकते हैं और अच्छी कमाई कर सकते हैं.