गेहूं-जौ में तेजी से फैल सकता है पीला रोग, लक्षण दिखते ही तुरंत इस दवा का करें छिड़काव

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पीला रोग समय पर नहीं रोका गया तो पूरी फसल खराब हो सकती है. इसलिए जैसे ही लक्षण दिखें, तुरंत दवा का छिड़काव करें. इसके लिए किसान प्रोपीकोनाजोल 25 फीसदी ई.सी को 0.1 फीसदी कवकनाशी घोल  में मिलाकर छिड़काव करें.

Kisan India
नोएडा | Published: 9 Dec, 2025 | 04:13 PM

Wheat cultivation: पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूं की बुवाई लगभग पूरी हो गई है. इसके साथ ही किसानों की टेंशन भी बढ़ गई है. क्योंकि दिसंबर की दस्तक के साथ ही कड़ाके की सर्दी शुरू हो गई है. सुबह में पाला और शीतलहर का असर देखा जा रहा है. इससे गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचने की संभावना बढ़ गई है. इसलिए दिसंबर से जनवरी तक का महीना किसानों के लिए बहुत ही खास होता है. इस दौरान किसानों को फसल की अच्छी तरह से देखरेख और निगरानी करनी चाहिए. नहीं, तो फसल को नुकसान पहुंच सकता है. तो आइए आज जानते हैं पाला और शीतलहर से बचाने के लिए कुछ उन देसी उपाय के बारे में, जिन्हें अपनाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ेगा.

कृषि एक्सपर्ट के मुताबिक, ठंड और नमी बढ़ने पर अंकुरित बीजों में रोग लगने की समस्या बढ़ जाती है. साथ ही ठंड के दौरान फसलों में कीटों के हमले  की भी संभावना बढ़ जाती है. इसलिए किसानों को समय पर रोग और कीट नियंत्रण करना चाहिए, ताकि फसल सुरक्षित रहे. इसके लिए किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करनी चाहिए. अगर गेहूं की फसल में किसी तरह की बीमारी के लक्षण दिखे तो तुरंत उपचार शुरू कर दें.

गेहूं की फसल में इस रोग का बढ़ा खतरा

दरअसल, दिसंबर की ठंड और नमी में गेहूं और जौ की फसल पर सबसे ज्यादा पीला रोग  फैलता है. यह रोग पहले पत्तियों पर दिखाई देता है और तेजी से बढ़ता है. किसान इसे आसानी से पहचान सकते हैं, क्योंकि पत्तियों की ऊपरी सतह पर पीली या नारंगी रंग की उभरी हुई धारियां बन जाती हैं. अगर खेत में ऐसे निशान दिखें, तो तुरंत दवा का छिड़काव करना जरूरी है, वरना रोग पूरे पौधे को नुकसान पहुंचा सकता है.

पूरी फसल खराब हो सकती है

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पीला रोग समय पर नहीं रोका गया तो पूरी फसल खराब हो सकती है. इसलिए जैसे ही लक्षण दिखें, तुरंत दवा का छिड़काव करें. इसके लिए किसान प्रोपीकोनाजोल 25 फीसदी ई.सी को 0.1 फीसदी कवकनाशी घोल  में मिलाकर छिड़काव करें. यह मिश्रण पीला रोग फैलने से रोकने में बहुत असरदार है. गेहूं की फसल ठंडे मौसम में अच्छी बढ़ती है, लेकिन इसी समय कई रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है. इसलिए किसान फसल की नियमित निगरानी करें. खेत में जाकर पत्तियों की जांच करना जरूरी है, ताकि जैसे ही कोई रोग दिखे, तुरंत इलाज करके फसल को नुकसान से बचाया जा सके.

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