Egg Price Fall: अंडा हुआ सस्ता, कीमत में 20 फीसदी से ज्यादा गिरावट.. चिकन के दाम भी गिरे

सावन में मांग घटने से अंडे और चिकन के दाम नरम हुए हैं, लेकिन सप्लाई और फीड लागत का दबाव बना हुआ है. अंडे की उत्पादन लागत बढ़कर 5.20-5.50 रुपये प्रति पीस पहुंच गई है. उद्योग के मुताबिक, फीड लागत कुल उत्पादन खर्च का 65-70 फीसदी है. सावन खत्म होने के बाद मांग बढ़ने से कीमतों में फिर तेजी आ सकती है.

नोएडा | Updated On: 27 Aug, 2026 | 11:30 AM

सावन महीने में मांग घटने से अंडे और चिकन के दामों में नरमी आई है. फार्म-गेट पर अंडों की कीमत पिछले महीने के उच्चतम स्तर से 20 फीसदी से ज्यादा गिर गई है. वहीं, चिकन के भाव भी करीब एक महीने पहले के मुकाबले नीचे आ गए हैं. हालांकि, सावन खत्म होने के बाद मांग बढ़ने से कीमतों में फिर तेजी आने की संभावना है. पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के संयुक्त सचिव रिकी थापर के मुताबिक, सावन के दौरान मांग कम रहने से ब्रॉयलर चिकन का एक्स-फार्म थोक भाव 90-95 रुपये प्रति किलो और अंडों का भाव 6-6.50 रुपये प्रति पीस है. हालांकि, उन्होंने कहा कि यह कीमत अलग-अलग इलाकों के हिसाब से बदल सकती है.

वहीं, श्रीनिवास फार्म्स के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सुरेश चित्तूरी ने बिजनेसलाइन से कहा कि गिरावट के बावजूद अंडों की कीमत पिछले साल के मुकाबले अभी भी ज्यादा है. श्रावण का महीना खत्म होने के बाद मांग बढ़ने से कीमतों में फिर तेजी आने की संभावना है. श्रावण महीने में आमतौर पर अंडों की खपत कम हो जाती है, लेकिन इस बार कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. सीएलएफएमए ऑफ इंडिया के चेयरमैन दिव्या कुमार गुलाटी के मुताबिक, फिलहाल सप्लाई से जुड़ा दबाव मांग में आई मौसमी कमी पर भारी पड़ रहा है.

अंडे की कीमत 5.20 रुपये पर आई

देश के प्रमुख पोल्ट्री हब नमक्कल में बुधवार को एक अंडे की कीमत 5.20 रुपये रही. यह अगस्त की शुरुआत में 5.90 रुपये और जुलाई के मध्य में 6.80 रुपये थी. तमिलनाडु पोल्ट्री फार्मर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी के अध्यक्ष वंगिली सुब्रमणियन ने कहा कि निर्यात मांग घटने से अंडों के दाम में गिरावट आई है. वहीं, रिकी थापर ने कहा कि श्रावण का महीना खत्म होने के बाद अंडे और चिकन की मांग बढ़ सकती है, जिससे कीमतों में फिर तेजी आने की संभावना है. उद्योग से जुड़े अन्य लोगों ने भी इस अनुमान से सहमति जताई है.

मक्का-सोयाबीन की कीमतों का सीधा असर

सीएलएफएमए ऑफ इंडिया के चेयरमैन दिव्या कुमार गुलाटी ने कहा कि जुलाई में अंडों की कीमतों में बढ़ोतरी को पोल्ट्री फीड की बढ़ती लागत और सप्लाई में कमी के साथ देखना चाहिए. उन्होंने बताया कि पोल्ट्री उत्पादन  की कुल लागत में फीड की हिस्सेदारी करीब 65-70 फीसदी होती है. ऐसे में मक्का और सोयाबीन मील जैसी चीजों की कीमत बढ़ने का सीधा असर अंडे की लागत पर पड़ता है. गुलाटी के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में सिर्फ एक महीने में सोयाबीन मील की कीमत करीब 25 फीसदी बढ़ गई थी, जिससे अंडा उत्पादकों पर लागत का दबाव बढ़ा. अब इसका असर पूरी सप्लाई चेन में दिखाई दे रहा है.

अंडों की सप्लाई घटने का खतरा

वहीं, महाराष्ट्र के पोल्ट्री उद्योग के मुताबिक, पोल्ट्री किसानों पर सिर्फ फीड की बढ़ती लागत का असर नहीं पड़ा है. लंबे समय से कम मुनाफे के कारण कई किसानों ने पुरानी मुर्गियों को समय से पहले हटाना शुरू कर दिया है. साथ ही, नए चूजों की संख्या भी कम की गई है. इससे आने वाले समय में अंडों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. गुलाटी ने कहा कि सप्लाई बेहतर होने पर अंडों की कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है, लेकिन लंबे समय तक कीमतों में स्थिरता के लिए फीड की बढ़ती लागत और जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता पर ध्यान देना होगा.

Published: 27 Aug, 2026 | 11:24 AM

Topics: