FSSAI के रडार पर फूड लेबल, दावे और पैकेजिंग, नोटिस के बाद कंपनियों ने प्रोडक्ट में किए बड़े बदलाव

FSSAI Action: एफएसएसएआई (FSSAI) ने खाने-पीने की चीजों पर गलत या गुमराह करने वाली जानकारी देने, प्रोडक्ट की कैटेगरी गलत बताने, सामग्री की सही जानकारी नहीं देने और पैकेट पर जरूरी जानकारी ठीक से नहीं लिखने को लेकर कई कंपनियों पर कार्रवाई की है.

नोएडा | Published: 19 Aug, 2026 | 02:14 PM

Food Safety India: खाने-पीने की चीजों के पैकेट, लेबल और विज्ञापनों को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सख्ती बढ़ा दी है. गलत या लोगों को गुमराह करने वाली जानकारी देने, प्रोडक्ट की कैटेगरी गलत बताने, सामग्री की पूरी जानकारी नहीं देने और पैकेजिंग के नियमों का पालन नहीं करने पर कई कंपनियों को नोटिस दिया गया है. कार्रवाई के बाद कुछ कंपनियों ने अपने पैकेट के लेबल, विज्ञापन और प्रचार सामग्री में बदलाव भी किया है. इसका मतलब साफ है कि अब FSSAI सिर्फ खाने-पीने की चीजों की क्वालिटी पर ही नजर नहीं रख रहा, बल्कि पैकेट पर लिखी जानकारी और कंपनियों के किए गए दावों की भी जांच कर रहा है.

‘100%’ दावे पर Lotte India को नोटिस

लोट्टे इंडिया कॉरपोरेशन के कुछ उत्पादों पर ‘100%’ जैसे दावे किए गए थे, जिन्हें लेकर FSSAI ने सवाल उठाए. कार्रवाई के बाद कंपनी ने संबंधित उत्पादों के पैकेट पर दी गई जानकारी में जरूरी बदलाव किए. दरअसल, किसी खाने-पीने के प्रोडक्ट पर ‘100%’ जैसे दावे देखकर ग्राहक उसके बारे में खास राय बना सकता है. ऐसे में FSSAI यह जांच रहा है कि पैकेट पर लिखी जानकारी सही है या नहीं और वह असल प्रोडक्ट के साथ-साथ तय नियमों के मुताबिक है या नहीं.

खाने के तेल की कैटेगरी को लेकर डाबर पर सवाल

डाबर इंडिया के एक प्रोडक्ट की कैटेगरी को लेकर भी FSSAI ने आपत्ति जताई. कंपनी का एक आयुर्वेदिक औषधीय तेल बाजार में खाद्य तेल के तौर पर दिखाया जा रहा था. इसे लेकर नियामक ने सवाल उठाए. इसके बाद कंपनी ने ई-कॉमर्स वेबसाइटों को प्रोडक्ट की सही कैटेगरी के बारे में जानकारी दी. साथ ही, उस प्रोडक्ट पर ‘खाद्य तेल’ लिखना भी बंद कर दिया गया.

चॉकलेट में सामग्री और लेबलिंग पर उठे सवाल

फर्न्स एन पेटल्स के एक प्रोडक्ट को लेकर भी FSSAI ने आपत्ति जताई. इसमें कोकोआ बटर की जगह हाइड्रोजनेटेड वेजिटेबल फैट के इस्तेमाल का मामला सामने आया. इसके अलावा प्रोडक्ट की सामग्री और पोषण से जुड़ी जानकारी में भी कुछ कमियां पाई गईं. कंपनी से रोजाना जरूरी पोषक तत्वों से जुड़ी जानकारी और प्रोडक्ट में आम की सही मात्रा बताने को लेकर भी सवाल किए गए. इसके बाद कंपनी ने ‘रोस्टेड आलमंड चॉकलेट’ समेत प्रभावित उत्पादों के पैकेट पर दी गई जानकारी में जरूरी बदलाव किए.

‘No Added Sugar’ दावे पर भी कार्रवाई

ईट बेटर वेंचर्स के एक प्रोडक्ट पर ‘अतिरिक्त चीनी नहीं’ होने का दावा किया गया था. साथ ही, इसकी तुलना सामान्य लड्डुओं से की गई थी. FSSAI ने इन दावों को लेकर आपत्ति जताई. इसके बाद कंपनी ने प्रोडक्ट के विज्ञापन में बदलाव करते हुए तुलना से जुड़े दावों को हटा दिया. यह मामला दिखाता है कि FSSAI सिर्फ पैकेट पर लिखी जानकारी ही नहीं, बल्कि खाद्य उत्पादों के विज्ञापनों में किए जा रहे दावों पर भी नजर रख रहा है.

पैकेजिंग और हेल्थ सप्लीमेंट पर भी नजर

एस एस प्रोडक्ट प्रॉप के मामले में FSSAI ने ऐसी पैकेजिंग सामग्री के इस्तेमाल पर सवाल उठाए, जो खाने-पीने की चीजों के लिए तय मानकों के मुताबिक नहीं थी. साथ ही, जरूरी लेबलिंग नियमों का सही तरीके से पालन नहीं करने की बात भी सामने आई. नियामक ने कहा कि, इस तरह की पैकेजिंग से खाद्य उत्पाद के दूषित होने या उसमें मिलावट का खतरा बढ़ सकता है. कंपनी ने बताया कि फरवरी 2026 से उसका कारोबार बंद है. कंपनी का कहना है कि अगर कारोबार दोबारा शुरू किया गया तो उस समय लागू सभी नियमों का पालन किया जाएगा.

वहीं, ओएम साई हेल्थकेयर के वेडेफाल कैप्सूल को लेकर भी FSSAI ने आपत्ति जताई. कंपनी के इस उत्पाद में हेल्थ सप्लीमेंट और न्यूट्रास्यूटिकल से जुड़े नियमों का सही तरीके से पालन नहीं करने की बात सामने आई. इसके अलावा, प्रोडक्ट के बारे में किए गए दावों और दी गई जानकारी में भी कुछ कमियां पाई गईं. कंपनी ने FSSAI की इन आपत्तियों को स्वीकार किया और अपनी मार्केटिंग सामग्री में जरूरी बदलाव किए.

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