खनौरी बॉर्डर पर फिर किसानों का डेरा! डल्लेवाल ने टाला दिल्ली कूच, 28 अगस्त तक बॉर्डर पर रहेंगे किसान

Farmer Protest: भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के विरोध में दिल्ली कूच कर रहे किसानों को हरियाणा पुलिस ने खनौरी बॉर्डर पर रोक दिया. किसानों ने वहीं रात बिताई और सीमित संख्या में शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाने की अनुमति मांगी. किसान MSP की कानूनी गारंटी, कर्जमाफी समेत कई मांगें उठा रहे हैं.

नोएडा | Updated On: 17 Aug, 2026 | 09:49 AM

Kisan Bachao Padyatra: भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के विरोध में दिल्ली की ओर पैदल मार्च के लिए निकले किसानों को हरियाणा पुलिस ने खनौरी बॉर्डर पर रोक दिया. इसके बाद किसानों ने वहीं सड़क किनारे डेरा डाल लिया और रात भी बॉर्डर पर ही गुजारी. अब किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने ऐलान किया है कि, 28 अगस्त तक खनौरी बॉर्डर पर ही अपना मोर्चा जारी रखेंगे. किसानों ने साफ किया है कि वे फिलहाल बड़ी भीड़ के साथ आगे बढ़ने के बजाय सीमित संख्या में शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली पहुंचना चाहते हैं. भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर के प्रमुख जगजीत सिंह दल्लेवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा सरकार से किसानों को पैदल दिल्ली जाने की अनुमति देने की अपील की है.

बॉर्डर पर ही रुकने को मजबूर हुए किसान

किसान संगठन के मुताबिक, किसान शांतिपूर्वक दिल्ली की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन हरियाणा सीमा पर उन्हें रोक दिया गया. खनौरी चेकपॉइंट पर पुलिस ने कई जगह बैरिकेडिंग कर रखी है. रास्ता बंद होने के बाद किसानों ने सड़क पर ही बिस्तर बिछाकर रात बिताई. प्रशासन ने किसानों से कहा कि दिल्ली जाने वाले जत्थे में 51 की जगह 41 किसान भेजे जाएं. किसान संगठनों ने इस प्रस्ताव को मानते हुए 41 किसानों का जत्था भेजने पर सहमति भी दे दी. हालांकि, इसके बावजूद प्रशासन 41 किसानों को भी दिल्ली जाने की अनुमति देने के लिए तैयार नहीं हुआ.

इसके बाद प्रशासन ने किसानों से हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात करने की बात कही. हालांकि, किसान नेताओं ने साफ किया कि वे हरियाणा सरकार से नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों से सीधे बातचीत करना चाहते हैं. किसानों का कहना है कि उनका मुख्य मुद्दा भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील से जुड़ा है, इसलिए इस मामले पर बातचीत केंद्र सरकार के स्तर पर ही होनी चाहिए.

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध

किसानों के आंदोलन की एक बड़ी वजह भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौता है. किसान संगठनों को आशंका है कि इस तरह के व्यापार समझौतों का असर कृषि और किसानों की आमदनी पर पड़ सकता है. किसान नेताओं का कहना है कि सरकार को इस मुद्दे पर किसानों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले उनके हितों को ध्यान में रखना चाहिए.

MSP की कानूनी गारंटी समेत कई मांगें

किसानों की मांग सिर्फ व्यापार समझौते तक सीमित नहीं है. वे लंबे समय से MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा किसानों की कर्जमाफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग भी आंदोलन में शामिल है. किसानों का कहना है कि खेती से जुड़े इन मुद्दों पर लंबे समय से चर्चा होती रही है, लेकिन उन्हें अब तक ठोस समाधान नहीं मिला है. दल्लेवाल ने केंद्र सरकार से किसानों की समस्याओं को समझने और उनकी मांगों पर ठोस कदम उठाने की अपील की है.

कोर्ट से भी हस्तक्षेप की मांग

मामले में किसान नेता ने न्यायपालिका से भी दखल देने की अपील की है. उनका कहना है कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट इस मामले का संज्ञान लेकर आगे का रास्ता साफ कर सकते हैं. दल्लेवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी किसानों की स्थिति को समझने और उनकी मांगों पर बातचीत करने की अपील की है. उनका कहना है कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं.

आगे क्या होगा?

किसान संगठनों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार की ओर से कृषि मंत्रालय के मंत्री या अधिकारी बातचीत के लिए आगे आते हैं, तो वे बैठक के लिए तैयार हैं. किसान अपनी मांगों के साथ भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर भी सरकार के सामने अपनी बात रखना चाहते हैं. फिलहाल दिल्ली कूच रोक दिया गया है और किसान खनौरी बॉर्डर पर ही डटे रहेंगे. अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच बातचीत कब होती है और क्या कोई समाधान निकल पाता है.

Published: 17 Aug, 2026 | 08:50 AM

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