Budget 2026: पशुपालकों की बल्ले-बल्ले, बजट में 27 फीसदी की बढ़ोतरी.. अब गांवों में इस तरह बढ़ेगा रोजगार

केंद्रीय बजट 2026-27 में पशुपालन क्षेत्र को रिकॉर्ड बजट मिला है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. इस बजट से पशु स्वास्थ्य, डेयरी विकास, मछली पालन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. सरकार का फोकस किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने पर है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 2 Feb, 2026 | 12:20 PM

Union Budget 2026 : इस बार का केंद्रीय बजट पशुपालकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है. पशुपालन क्षेत्र को साल 2026-27 में रिकॉर्ड 6153 करोड़ रुपये का बजट मिला है, जो पिछले साल के 4850 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा है. यह बढ़ा हुआ बजट सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे गांवों में रोजगार, दूध उत्पादन, पशु स्वास्थ्य और आमदनी के नए रास्ते खुलने वाले हैं. सरकार का साफ संदेश है कि अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालन को और मजबूत किया जाएगा.

पशुपालन बजट में बड़ी बढ़ोतरी, गांवों को मिलेगा सीधा फायदा

पशुपालन क्षेत्र  को इस साल जो बजटीय समर्थन मिला है, उसे ऐतिहासिक कहा जा रहा है. बजट में हुई बढ़ोतरी से पशुओं की देखभाल, डेयरी सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी. इसका सीधा असर छोटे और सीमांत पशुपालकों पर पड़ेगा, जिनकी आमदनी का बड़ा हिस्सा दूध और पशुधन पर निर्भर है. सरकार का मानना है कि पशुपालन मजबूत होगा तो गांवों की आर्थिक हालत भी अपने-आप सुधरेगी.

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केंद्रीय बजट 2026-27

मछली पालन और एकीकृत खेती पर खास जोर

बजट 2026-27 में ग्रामीण अर्थव्यवस्था  को मजबूत करने के लिए मछली पालन को भी अहम जगह दी गई है. एकीकृत खेती मॉडल के तहत 500 अलग-अलग तरह के सरोवर विकसित किए जाएंगे. इन सरोवरों में वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन होगा, जिससे उत्पादन बढ़ेगा और खर्च कम आएगा. इससे किसानों को खेती के साथ-साथ अतिरिक्त कमाई का मौका मिलेगा. मछली पालन से जुड़ी गतिविधियां बढ़ने पर गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

डेयरी विकास से बढ़ेगा दूध उत्पादन और बेहतर दाम

बजट में पशुपालन को ग्रामीण विकास का मजबूत आधार बताया गया है. इसके तहत दूध संग्रह, भंडारण और प्रोसेसिंग की सुविधाओं को बेहतर किया जाएगा. गांवों में डेयरी ढांचे को मजबूत करने से पशुपालकों को अपने दूध का सही दाम  मिल सकेगा. इसके साथ ही क्रेडिट लिंक सब्सिडी की शुरुआत होगी, जिससे पशुपालकों को लोन लेने में आसानी होगी और वे अपने काम को आगे बढ़ा सकेंगे.

पशु डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी, इलाज होगा आसान

सरकार ने बजट 2026-27 में पशु-चिकित्सा सेवाओं पर भी बड़ा फैसला लिया है. पशु डॉक्टरों की संख्या 20 हजार से ज्यादा करने का ऐलान किया गया है. इससे गांवों और दूर-दराज के इलाकों में पशुओं के इलाज की परेशानी काफी हद तक कम होगी. समय पर इलाज मिलने से पशु स्वस्थ रहेंगे, दूध उत्पादन बढ़ेगा  और पशुपालकों की आमदनी में भी सुधार आएगा.

निजी निवेश, नई तकनीक और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

सरकार पशुधन क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने के लिए लोन-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना शुरू करेगी. इसके तहत पशु अस्पताल, डायग्नोस्टिक लैब, प्रजनन केंद्र और पैरा-वेटनरी कॉलेज को बढ़ावा मिलेगा. इसके साथ ही पशु-चिकित्सा सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए देशी और विदेशी संस्थानों के बीच साझेदारी को आसान किया जाएगा. पशुचारा और बिनौले की आपूर्ति करने वाली सहकारी संस्थाओं को टैक्स में छूट दी जाएगी, जिससे डेयरी और पशुपालन  से जुड़ी सप्लाई चेन मजबूत होगी और लागत घटेगी.

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