Animal Husbandry : जैसे ही गर्मी आती है, खेत सूखे दिखने लगते हैं और पशुओं के लिए हरे चारे की सबसे बड़ी परेशानी खड़ी हो जाती है. कई बार सही चारा न मिलने से गाय-भैंस कमजोर हो जाती हैं और दूध भी कम देने लगती हैं. लेकिन अगर थोड़ी समझदारी और सही समय पर काम कर लिया जाए, तो गर्मी के दो-तीन महीने भी हरे चारे से भरपूर गुजर सकते हैं. खास बात ये है कि इसके लिए ज्यादा खर्च या मेहनत की जरूरत नहीं, बस सही फसल चुननी होती है.
गर्मी में क्यों होती है हरे चारे की सबसे ज्यादा दिक्कत?
गर्मियों में तेज धूप और पानी की कमी के कारण ज्यादातर हरी फसलें सूख जाती हैं. खेतों में हरियाली कम हो जाती है और पशुओं को सूखा चारा देना पड़ता है. इससे उनके शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता. नतीजा ये होता है कि दूध उत्पादन घट जाता है और पशु कमजोर दिखने लगते हैं. यही वजह है कि गर्मी से पहले हरे चारे की तैयारी करना बहुत जरूरी माना जाता है.
फरवरी में बोआई, गर्मी में भरपूर फायदा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अगर फरवरी के महीने में कुछ खास चारे की खेती कर ली जाए, तो अप्रैल-मई की भीषण गर्मी में भी हरे चारे की कमी नहीं होती. इस समय मौसम ऐसा होता है कि बीज अच्छे से जम जाते हैं और फसल तेजी से बढ़ती है. सही योजना के साथ बोआई करने से हर महीने हरा चारा मिलता रहता है, जिससे पशुओं की सेहत बनी रहती है.
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बरसीम- कम खर्च में ज्यादा हरा चारा
बरसीम हरे चारे की सबसे पसंदीदा फसल मानी जाती है. एक एकड़ खेत में इसकी खेती के लिए करीब 10 से 12 किलो बीज की जरूरत होती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि एक बार बोने के बाद हर महीने दो बार कटाई की जा सकती है. बरसीम में प्रोटीन और दूसरे जरूरी पोषक तत्व भरपूर होते हैं, जो दूध बढ़ाने में मदद करते हैं. इसे खाने से पशु तंदुरुस्त रहते हैं और दूध की मात्रा भी कम नहीं होती.
अल्फाल्फा और नेपियर घास- साल भर का सहारा
अल्फाल्फा एक बारहमासी पौधा है, यानी एक बार लगाने के बाद लंबे समय तक हरा चारा देता रहता है. इसे साल के किसी भी समय उगाया जा सकता है. वहीं नेपियर घास को हरा सोना कहा जाता है. ये भी बारहमासी फसल है और तेजी से बढ़ती है. इसकी कटाई बार-बार की जा सकती है. गर्मी हो या हल्की ठंड, नेपियर घास हर मौसम में पशुपालकों का मजबूत सहारा बनती है.
लोबिया- स्वादिष्ट भी, पौष्टिक भी
लोबिया सिर्फ दाल की फसल नहीं है, बल्कि यह पशुओं के लिए बेहतरीन हरा चारा भी है. यह गर्मी में आसानी से उग जाती है और पशु इसे बड़े चाव से खाते हैं. लोबिया में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं. खास बात ये है कि इसे ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती और कम पानी में भी अच्छी फसल मिल जाती है.