Goat farming: भारत में बकरी पालन सदियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा रहा है. कम लागत में पाले जाने वाले इस पशु से दूध, खाद और आय तीनों का लाभ मिलता है. खासकर दुधारू बकरियां छोटे किसानों और पशुपालकों के लिए आमदनी का भरोसेमंद साधन हैं. लेकिन अक्सर देखा जाता है कि लोग बकरी पाल तो लेते हैं, पर उनकी खुराक पर सही ध्यान नहीं देते. नतीजा यह होता है कि बकरी की सेहत कमजोर रहती है और दूध का उत्पादन भी उम्मीद से कम हो जाता है. अगर दुधारू बकरी की रोजमर्रा की खुराक में कुछ खास चीजें सही मात्रा में शामिल कर ली जाएं, तो दूध की मात्रा बढ़ने के साथ-साथ बकरी लंबे समय तक स्वस्थ भी रहती है.
दुधारू बकरी की खुराक क्यों है सबसे अहम
दूध देने वाली बकरी के शरीर पर सामान्य बकरी की तुलना में ज्यादा दबाव होता है. उसे रोज दूध बनाने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा, प्रोटीन और खनिज तत्वों की जरूरत पड़ती है. अगर खुराक संतुलित नहीं होगी, तो बकरी जल्दी थक जाएगी, दूध कम देने लगेगी और कई बार बीमार भी पड़ सकती है. इसलिए दुधारू बकरी की खुराक सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि पोषण देने के लिए होनी चाहिए.
दाने में शामिल करें पोषण से भरपूर चीजें
दुधारू बकरी के आहार में दाना बहुत जरूरी होता है. आमतौर पर एक लीटर तक दूध देने वाली बकरी को रोजाना करीब 300 ग्राम दाना देना लाभकारी माना जाता है. इस दाने में मक्का, जौ, चोकर और थोड़ी मात्रा में तिल या सरसों की खली शामिल की जा सकती है. यह मिश्रण बकरी को ताकत देता है और दूध बनाने में मदद करता है. दाना एक बार में न देकर सुबह और शाम दो हिस्सों में देना ज्यादा अच्छा रहता है, ताकि पाचन सही बना रहे.
हरा और सूखा चारा बनाए संतुलन
बकरी की खुराक में सिर्फ दाना ही काफी नहीं होता. उसे दिन भर में करीब चार किलो चारा भी देना जरूरी है. हरा चारा जैसे बरसीम, लोबिया, ज्वार या बाजरा बकरी को ताजगी और जरूरी पोषक तत्व देता है. वहीं सूखा चारा जैसे भूसा या सूखी घास पाचन को संतुलित रखता है. दोनों को मिलाकर देने से बकरी को पूरा पोषण मिलता है और दूध की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.
पानी और हरी पत्तियों का रखें खास ध्यान
अक्सर लोग चारे और दाने पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन पानी को नजरअंदाज कर देते हैं. दूध का बड़ा हिस्सा पानी से ही बनता है, इसलिए दुधारू बकरी को पर्याप्त साफ पानी मिलना बहुत जरूरी है. सर्दियों में करीब 700 मिलीलीटर से एक लीटर तक पानी पर्याप्त रहता है, जबकि गर्मियों में यह मात्रा दो लीटर या उससे ज्यादा हो सकती है. इसके अलावा बकरी को नीम, बरगद, पीपल या अन्य सुरक्षित पेड़-पौधों की हरी पत्तियां खिलाने से उसकी सेहत अच्छी रहती है.
सही खुराक से कैसे बढ़ता है दूध उत्पादन
जब बकरी को संतुलित और पोषण से भरपूर आहार मिलता है, तो उसका शरीर मजबूत रहता है और दूध बनाने की क्षमता बढ़ती है. कुछ ही दिनों में दूध की मात्रा में फर्क नजर आने लगता है. साथ ही दूध का स्वाद और गुणवत्ता भी बेहतर होती है, जिससे बाजार में अच्छा दाम मिलता है. सही खुराक मिलने से बकरी तनावमुक्त रहती है और लंबे समय तक दूध देती है.
सेहतमंद बकरी, टिकाऊ कमाई
दुधारू बकरी की खुराक पर थोड़ा सा ध्यान देकर पशुपालक अपनी आमदनी में अच्छा इजाफा कर सकते हैं. सही आहार से बकरी कम बीमार पड़ती है, दवा पर खर्च घटता है और दूध का उत्पादन लगातार बना रहता है. यही वजह है कि अनुभवी पशुपालक सबसे पहले बकरी की खुराक को प्राथमिकता देते हैं.
कुल मिलाकर, अगर दुधारू बकरी की खुराक में सही दाना, हरा- सूखा चारा और पर्याप्त पानी शामिल किया जाए, तो दूध उत्पादन बढ़ना तय है. यह छोटा सा बदलाव बकरी की सेहत को भी बेहतर बनाता है और पशुपालक की जेब को भी मजबूत करता है.