Azolla Feed : बकरी पालन आज सिर्फ सहायक काम नहीं रहा, बल्कि कई किसानों के लिए कमाई का मजबूत जरिया बन चुका है. लेकिन इस काम में सबसे बड़ी परेशानी होती है-अच्छा, सस्ता और पौष्टिक चारा. बाजार में मिलने वाला चारा महंगा है और हर समय उपलब्ध भी नहीं रहता. ऐसे में अब किसान एक ऐसे हरे चारे की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, जो सस्ता भी है, पौष्टिक भी और जिसे घर पर ही आसानी से तैयार किया जा सकता है. इस चारे का नाम है अजोला. अजोला बकरियों के लिए किसी सुपरफूड से कम नहीं है.
क्या है अजोला और क्यों हो रहा है इतना लोकप्रिय
अजोला एक प्रकार का हरा जलीय पौधा है, जो पानी की सतह पर तेजी से फैलता है. देखने में यह शैवाल जैसा लगता है, लेकिन इसके पोषक तत्व इसे बेहद खास बनाते हैं. अजोला बहुत कम समय में तैयार हो जाता है और इसे उगाने के लिए ज्यादा जगह या खर्च की जरूरत नहीं होती. यही वजह है कि छोटे किसान भी इसे आसानी से अपना पा रहे हैं. जिन इलाकों में हरे चारे की कमी रहती है, वहां अजोला एक भरोसेमंद विकल्प बनता जा रहा है.
बकरियों के लिए अजोला क्यों है जरूरी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजोला में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन A, विटामिन B, बीटा-कैरोटिन और जरूरी अमीनो एसिड पाए जाते हैं. ये सभी तत्व बकरियों की सेहत के लिए बेहद जरूरी होते हैं. अजोला खाने से बकरियों का पाचन बेहतर रहता है, शरीर मजबूत बनता है और बीमारियों का खतरा भी कम होता है. यही नहीं, इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर भी देखने को मिलता है.
कितना और कैसे खिलाएं अजोला
विशेषज्ञों के अनुसार, एक दुधारू बकरी को रोजाना करीब 500 ग्राम अजोला खिलाना पर्याप्त होता है. इतनी मात्रा देने से दूध उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जा सकती है. इसके साथ ही, इससे अन्य चारे की खपत भी 30 से 35 प्रतिशत तक कम हो जाती है. अजोला को सीधे या सूखे चारे में मिलाकर खिलाया जा सकता है. ध्यान रखें कि शुरुआत में कम मात्रा दें, ताकि बकरी को इसकी आदत पड़ जाए.
कम लागत में ज्यादा फायदा, किसानों के लिए वरदान
अजोला की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत है. इसे तैयार करने में लगभग 1 किलो अजोला पर सिर्फ 2 रुपये का खर्च आता है. किसान इसे घर, खेत या पशुशाला के पास किसी छोटे टैंक या गड्ढे में भी उगा सकते हैं. यही वजह है कि अजोला बकरी पालन करने वाले किसानों के लिए सस्ता, टिकाऊ और फायदे का सौदा साबित हो रहा है. ऐसे में अगर किसान कम खर्च में बकरियों की सेहत सुधारना और दूध उत्पादन बढ़ाना चाहते हैं, तो अजोला उनके लिए एक स्मार्ट और भरोसेमंद विकल्प बन सकता है.