अब सस्ता चारा और ज्यादा फायदा! एजोला से बदलेगी पशुपालन की तस्वीर, जानें पूरा तरीका

महंगे फीड से परेशान पशुपालकों के लिए एजोला एक सस्ता और असरदार विकल्प बनकर उभरा है. यह पानी में उगने वाला पौधा गाय-भैंस, मुर्गी और मछली सभी के लिए फायदेमंद माना जा रहा है. सही तरीके से उपयोग करने पर इससे उत्पादन बढ़ता है और खर्च घटता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 2 Jan, 2026 | 11:30 PM

Azolla Farming : महंगे चारे और फीड की बढ़ती कीमतों से परेशान पशुपालकों के लिए एक सस्ता और असरदार समाधान सामने आया है. पानी की सतह पर उगने वाला एक छोटा सा हरा पौधा एजोला आज पशुपालन में गेमचेंजर बन रहा है. कम लागत, आसान उत्पादन और ज्यादा पोषण-इन तीन खूबियों की वजह से एजोला तेजी से किसानों की पसंद बनता जा रहा है. सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह गाय-भैंसों का दूध बढ़ाने के साथ-साथ मुर्गी और मछली पालन में भी जबरदस्त फायदा देता है.

क्या है एजोला और क्यों है इतना फायदेमंद

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एजोला एक जलीय पौधा  है जो पानी की सतह पर बहुत तेजी से बढ़ता है. इसमें प्रोटीन, आयरन, फाइबर और जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यही कारण है कि यह पशुओं के लिए किसी प्राकृतिक सप्लीमेंट से कम नहीं है. एजोला को अगर नियमित रूप से खिलाया जाए, तो यह न केवल पशुओं की सेहत सुधारता है, बल्कि दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों बढ़ाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे उगाने में न तो ज्यादा जगह चाहिए और न ही ज्यादा पैसा.

गाय-भैंस, मुर्गी और मछली-सबके लिए रामबाण

रिपोर्ट्स के अनुसार, एजोला गाय और भैंसों  के लिए बेहद उपयोगी हरा चारा है. इसे भूसे या हरे चारे के साथ मिलाकर देने से 10-15 दिनों में दूध उत्पादन में फर्क दिखने लगता है. दूध की फैट क्वालिटी भी बेहतर होती है. मुर्गी पालन में एजोला देने से अंडों की गुणवत्ता सुधरती है और उत्पादन बढ़ता है. वहीं मछली पालन में इसे खिलाने से मछलियों का वजन तेजी से बढ़ता है. इस तरह एजोला एक ऐसा फीड बन जाता है, जो अलग-अलग पशुपालन कार्यों में एक साथ फायदा पहुंचाता है.

बेहद आसान है एजोला उगाने का तरीका

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एजोला उगाने के लिए किसी खास तकनीक या महंगे उपकरण की जरूरत नहीं होती. इसके लिए घर या खेत  के पास एक छोटी क्यारी या टंकी बनाई जा सकती है. क्यारी में थोड़ी मिट्टी डालकर पानी भरा जाता है और उसमें थोड़ी मात्रा में फॉस्फेट खाद मिलाई जाती है. इसके बाद एजोला का कल्चर डालते ही कुछ ही दिनों में यह फैलने लगता है. सही देखभाल के साथ 7-10 दिन में रोजाना ताजा एजोला तैयार हो जाता है.

कम खर्च में ज्यादा मुनाफा, यही है असली ताकत

एजोला की सबसे बड़ी ताकत इसकी कम लागत है. बाजार से महंगा फीड खरीदने  की जरूरत कम हो जाती है, जिससे पशुपालकों का खर्च काफी घटता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जो किसान एजोला को नियमित चारे में शामिल कर रहे हैं, उनके पशु ज्यादा स्वस्थ हैं और उत्पादन भी बेहतर है. कुल मिलाकर, एजोला पशुपालकों के लिए एक ऐसा सस्ता, टिकाऊ और भरोसेमंद विकल्प है, जो दूध, अंडे और मछली-तीनों के उत्पादन को नई रफ्तार दे सकता है.

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Published: 2 Jan, 2026 | 11:30 PM

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