Sugarcane Farming: गन्ने के राजा CO 0238 में रेड रॉट को कहें बाय-बाय, बस अपनाएं ये तकनीक
Ganne Ki Kheti: गन्ने की हर खेत की सफलता का रहस्य सिर्फ मेहनत में नहीं, बल्कि सही तकनीक और सावधानी में भी छिपा है. बसंत के इस मौसम में अगर आप गन्ने की बुवाई सही समय, सही बीज और आधुनिक तरीकों से करेंगे, तो न केवल रोगों से फसल सुरक्षित रहेगी, बल्कि लाभ भी दोगुना होगा. ऐसे में आइए जानते हैं, कैसे छोटी-छोटी सावधानियां और वैज्ञानिक तरीके आपके गन्ने के खेत को सोने की फसल बना सकते हैं.

उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के गन्ना बेल्ट में बसंतकालीन बुवाई सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इस समय बुवाई करने से पौधों की जड़ें अच्छी तरह से विकसित होती हैं और फसल का उत्पादन भी बेहतर रहता है.

CO 0238 जैसी संवेदनशील किस्मों में ‘रेड रॉट’ रोग का खतरा बढ़ा है. इसलिए हमेशा रोगमुक्त और प्रमाणित बीज का चुनाव करना चाहिए, ताकि फसल सुरक्षित रहे और उत्पादन प्रभावित न हो.

गन्ने की बुवाई के लिए ‘सिंगल बड तकनीक’ सबसे प्रभावी साबित हो रही है. इसे नर्सरी तैयार कर ट्रांसप्लांट करने से पौधों की ग्रोथस तेज होती है और रोगों का खतरा भी कम होता है.

ट्रेंच विधि से बुवाई करने पर गन्ने के साथ सह-फसली खेती की जा सकती है. इससे मुख्य फसल की लागत कम होती है और किसानों की कुल आय बढ़ती है.

भूमि को रोगमुक्त बनाने के लिए बवेरिया बेसियाना, ट्राइकोडर्मा और स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस को सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर 10 दिनों तक पानी छिड़कें. इस जैविक मिश्रण से खेत में पहले, दूसरे और तीसरे जुताई के समय रोग नियंत्रण और मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है.

गन्ने के टुकड़ों को कार्बेंडाजिम और क्लोरोपायरीफॉस के घोल में कम से कम 10 मिनट तक डुबोकर रखें. यह सही उपचार की प्रक्रिया है, जिससे कीट और फफूंद जनित रोगों का खतरा न्यूनतम होता है और बीज का जमाव प्रतिशत बेहतर होता है.