अरहर में माहू रोग का बढ़ा खतरा, 50 फीसदी तक कम हो सकती है पैदावार.. करें दवा का छिड़काव

अरहर की फसल आमतौर पर 6 से 8 महीने में तैयार होती है. इसकी खास बात यह है कि बुवाई के बाद पूरी फसल अवधि में सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती और शुरुआत में केवल यूरिया खाद का इस्तेमाल किया जाता है. इसी वजह से यह कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल मानी जाती है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 18 Feb, 2026 | 05:25 PM

Arhar Farming: फरवरी महीने में औसत से अधिक तापमान और सुबह-शाम हल्की ठंड होने के चलते अरहर के फसल पर रोग लगाने की आशंका बढ़ गई है.  खासकर अरहर पर माहू (रस चूसने वाले कीट) के हमले बढ़ सकते हैं. इससे पैदावार में गिरावट आ सकती है. दरअसल, अभी अरहर की फसल में फूल आ रहे हैं. इस दौरान माहू का प्रकोप बढ़ने लगता है. खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में अरहर के खेतों में अभी माहू का खतरा कुछ ज्यादा सता रहा है. ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ गई है. लेकिन कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से कुछ सावधानी बरतने की अपील की है. इससे फसल को नुकसान होने से बचाया जा सकता है.

एक्सपर्ट के मुताबिक, माहू रोग के कारण सफेद मक्खी  और फली छेदक जैसे कीट सक्रिय हो जाते हैं, जो पौधों का रस चूसकर उन्हें कमजोर कर देते हैं. इससे फूल और छोटी फलियां झड़ने लगती हैं और पैदावार पर सीधा असर पड़ता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसान समय रहते कीटों की पहचान कर उचित दवा का छिड़काव करें, नहीं तो पूरी फसल को भारी नुकसान हो सकता है.

अरहर की फसल 8 महीने में तैयार होती है

अरहर की फसल आमतौर पर 6 से 8 महीने में तैयार होती है. इसकी खास बात यह है कि बुवाई के बाद पूरी फसल अवधि में सिंचाई की जरूरत  नहीं पड़ती और शुरुआत में केवल यूरिया खाद का इस्तेमाल किया जाता है. इसी वजह से यह कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल मानी जाती है. अरहर में लगने वाला मुख्य कीट माहू है. इसकी पहचान के लिए पत्तियों और टहनियों को ध्यान से देखें. हरे, काले या भूरे रंग के छोटे-छोटे कीट झुंड में पत्तियों की निचली सतह और नई टहनियों पर चिपके दिखते हैं. ये फूलों पर हमला करते हैं, जिससे पत्तियां मुड़ जाती हैं और पौधे की बढ़वार रुक जाती है. ऐसी स्थिति में किसान ‘अमिडा क्लोरोपिड’ दवा का छिड़काव कर सकते हैं. एक बीघा खेत के लिए 15-20 लीटर पानी में 15-20 मिलीलीटर दवा मिलाकर घोल तैयार करें और प्रति बीघा के हिसाब से छिड़काव करें, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके.

रोग को लेकर क्या कहते हैं कृषि अधिकारी

कृषि अधिकारियों का कहना है कि इन दिनों अरहर की फसल  में दूसरी बार फूल आ रहे हैं. पहली बार फूल सर्दियों में आए थे, लेकिन ज्यादा ठंड की वजह से झड़ गए. अब जो दूसरे फूल निकल रहे हैं, वे फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. सुबह-शाम हल्की ठंड के कारण अरहर में माहू रोग लग जाता है. यह कीट फूलों का रस चूसता है, जिससे फलियां बनने में दिक्कत आती है. अगर पहले वाले कुछ फूल बचे हैं, तो उनमें फली छेदक कीट लगने का खतरा रहता है. इससे किसानों को करीब 50 फीसदी तक नुकसान हो सकता है.

 

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Published: 18 Feb, 2026 | 05:24 PM

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