आम में लगी गंभीर बीमारी.. 50 फीसदी तक पैदावार में गिरावट, किसान कैसे निकालें लागत ?
राज्य में 1.25 लाख हेक्टेयर में आम की खेती होती है, जिससे लगभग 5.38 लाख टन उत्पादन होता है. तमिलनाडु में औसत उत्पादकता 6.5 टन प्रति हेक्टेयर है. कृष्णगिरि आम उत्पादन में सबसे आगे है, जहां 33,679 हेक्टेयर में खेती होती है और लगभग 3 लाख टन उत्पादन दर्ज किया जाता है.
Mango Cultivation: इस साल आम की फसल में रोग और कीट लगने से पैदावार में गिरावट आई है. इससे किसानों को नुकसान की संभावना बढ़ गई है. उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में आंधी-तुफान से फसलों की बर्बादी हुई है. लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान का असर तमिलनाडु में देखने को मिल रहा है. धर्मपुरी और कृष्णगिरि जिलों में इस साल आम की पैदावार में करीब 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. ये दोनों जिले राज्य में ‘आम के हब’ माने जाते हैं. किसानों का कहना है इस बार कीटों के हमले और एन्थ्रेक्नोज संक्रमण के चलते फसलों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा है. कई इलाकों में आम की पैदावार 9 से 10 टन प्रति हेक्टेयर से घटकर लगभग 5 टन प्रति हेक्टेयर रह गई है. किसानों का कहना है कि अब आम की खेती में लागत बढ़ गई है, लेकिन मुनाफा कम हो रहा है.
धर्मपुरी के एलुमिचनाहल्ली गांव के किसान ई.एस. समराज ने ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा कि पिछले कुछ साल आम किसानों के लिए बहुत मुश्किल रहे हैं. उन्होंने कहा कि पिछले साल खरीद कीमत गिरकर 4,500 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई थी, जिससे भारी नुकसान हुआ. उन्होंने कहा कि इस बार तो हालात और खराब हैं, क्योंकि कटाई शुरू होने से पहले ही फसल पर कीटों का हमला हो गया. जहां पहले उनके खेत से 9 से 10 टन प्रति हेक्टेयर उत्पादन मिलता था, वहीं इस साल यह घटकर करीब 3 टन प्रति हेक्टेयर रह गया है.
आम की खेती में बढ़ गई इनपुट लागत
किसान समराज ने कहा कि कीटों पर नियंत्रण न होने से उन्हें भारी नुकसान हो रहा है और हालात बहुत खराब हैं. एक अन्य किसान बी. संकरण ने कहा कि अब कीट पहले से ज्यादा मजबूत हो गए हैं और कीटनाशकों का असर भी कम हो गया है. उन्होंने कहा कि पांच साल पहले उन्हें अपने खेत में साल में केवल एक या दो बार ही कीटनाशक का छिड़काव करना पड़ता था, लेकिन अब साल में पांच से छह बार छिड़काव करना पड़ रहा है, जिससे खर्च काफी बढ़ गया है. पहले जहां खेती पर 5,000 से 8,000 रुपये खर्च होते थे, अब यह बढ़कर 18,000 से 25,000 रुपये तक पहुंच गया है, लेकिन इसके बावजूद आम के दाम अच्छे नहीं मिल रहे हैं.
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किसान नहीं कर पाए फसल की सिंचाई
कीटों के हमले के अलावा किसानों ने गर्मी की लहर (हीटवेव) और पानी की कमी को भी बड़ी समस्या बताया है. वेलिचंदई के किसान एस. मुथुसेकर के अनुसार लगातार पड़ रही गर्मी के कारण खेतों में पानी की जरूरत काफी बढ़ गई है. कृष्णगिरि में किसानों ने कहा कि कीटों के साथ-साथ एन्थ्रेक्नोज नामक फंगल संक्रमण भी बढ़ गया है, जिससे फल आपस में चिपक जाते हैं और जल्दी सड़ जाते हैं.
1.25 लाख हेक्टेयर में होती है आम की खेती
ऐसे राज्य में कुल 1.25 लाख हेक्टेयर में आम की खेती होती है, जिससे लगभग 5.38 लाख टन उत्पादन होता है. तमिलनाडु में औसत उत्पादकता 6.5 टन प्रति हेक्टेयर है. कृष्णगिरि आम उत्पादन में सबसे आगे है, जहां 33,679 हेक्टेयर में खेती होती है और लगभग 3 लाख टन उत्पादन दर्ज किया जाता है. इसके बाद धर्मपुरी का स्थान है, जहां 18,388 हेक्टेयर में खेती होती है और सालाना उत्पादन करीब 1.69 लाख टन है. कृष्णगिरि और धर्मपुरी में होने वाले कुल आम उत्पादन में करीब 80 फीसदी हिस्सा तोतापुरी या बंगालूरा किस्म का होता है, जिसे अक्सर यहां की पल्प (रस/जूस) फैक्ट्रियां खरीद लेती हैं. बाकी 20 फीसदी में नीलम, अल्फांसो, इमाम पसंद जैसी टेबल किस्में शामिल होती हैं, जो स्थानीय बाजारों में बेची जाती हैं.
क्या कहते हैं बागवानी विभाग के अधिकारी
वहीं, बागवानी विभाग की उप निदेशक जी. फातिमा ने कहा कि तमिलनाडु सरकार ने पहले थेनि, डिंडीगुल और कुछ अन्य जिलों में आम किसानों के लिए उन्नत कीट नियंत्रण और बेहतर मार्केटिंग को लेकर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए थे. लेकिन धर्मपुरी और कृष्णगिरि में यह प्रशिक्षण चुनाव और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के कारण नहीं हो पाया था. उन्होंने कहा कि अब धर्मपुरी में यह प्रशिक्षण 8 मई को करीमंगलम में आयोजित किया जाएगा, जिससे किसानों को आम की बेहतर कीमत दिलाने में मदद मिलेगी. उत्पादन में गिरावट के सवाल पर धर्मपुरी और कृष्णगिरि के बागवानी विभाग के अधिकारियों ने कहा कि फसल उत्पादन में कमी या नुकसान का सही आकलन केवल सीजन शुरू होने के बाद ही किया जा सकता है.