तिब्बत में भूस्खलन के बाद नेपाल में आया जलप्रलय, इन 4 जगहों पर भारी तबाही.. 140 भारतीय तीर्थयात्री लापता

तिब्बत में भूस्खलन के बाद ग्लेशियर झील फटने से नेपाल में भयंकर सैलाब आया. भोटेकोशी नदी में आए तेज बहाव ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई. रसुवागढ़ी-टिमुरे, स्याफ्रुबेसी, त्रिशूली और धादिंग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए. बाढ़ में सड़कें, पुल, घर और होटल बह गए. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 157 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है.

नोएडा | Updated On: 27 Aug, 2026 | 09:02 AM

नेपाल-चीन सीमा के पास तिब्बत में हुए भीषण भूस्खलन के बाद ग्लेशियर की झील फट गई, जिससे नेपाल में अचानक भयंकर सैलाब आ गया. 26 अगस्त की सुबह मलबे और पत्थरों से भरा पानी भोटेकोशी नदी के रास्ते नेपाल पहुंचा और कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस जलप्रलय में 157 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि 750 से अधिक लोग लापता हैं. इनमें करीब 140 भारतीय तीर्थयात्री भी शामिल बताए जा रहे हैं. वहीं, इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है. बाढ़ के तेज बहाव में घर, सड़कें और पुल बह गए हैं.

नेपाल-चीन सीमा से सटा रसुवागढ़ी-टिमुरे कॉरिडोर सैलाब की पहली बड़ी चपेट में आया. तिब्बत की ओर से आया तेज बहाव अपने साथ बड़ी मात्रा में पानी, पत्थर और मलबा लेकर पहुंचा. देखते ही देखते इसने इलाके में भारी तबाही मचा दी. सैलाब के तेज बहाव में ऐतिहासिक मितेरी फ्रेंडशिप ब्रिज भी नहीं बच सका. तेज पानी और मलबे के दबाव में पुल नदी में बह गया. इससे नेपाल और चीन के बीच इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई है.

टिमुरे में सीमा शुल्क कार्यालय मलबे में दबा, कई इलेक्ट्रिक वाहन और ट्रक बहे

सैलाब ने नेपाल-चीन सीमा से लगे टिमुरे इलाके में भी भारी तबाही मचाई है. तेज बहाव के साथ आए मलबे में टिमुरे का सीमा शुल्क कार्यालय दब गया. इसके अलावा चीन से आयात किए गए कई इलेक्ट्रिक वाहन और कंटेनर ट्रक भी मलबे के साथ बह गए. टिमुरे नेपाल और चीन के बीच व्यापार का एक अहम केंद्र है. ऐसे में सीमा शुल्क कार्यालय, वाहनों और माल के नुकसान से नेपाल-चीन व्यापार को बड़ा आर्थिक झटका लगने की आशंका है.

स्याफ्रुबेसी में होटल-लॉज और घर ढहे

भोटेकोशी नदी के किनारे बसे स्याफ्रुबेसी बाजार में सैलाब ने भारी तबाही मचाई है. लांगटांग ट्रैकिंग और पर्यटन के लिए मशहूर इस पहाड़ी कस्बे में तेज पानी के साथ बड़े-बड़े पत्थर और मलबा आया. इसके दबाव में 60 से ज्यादा बहुमंजिला होटल, लॉज और पक्के मकान ढह गए. कई इमारतें सीधे नदी में समा गईं. भूस्खलन से सेना का मुख्य हेलीपैड भी प्रभावित हुआ है, जिससे राहत और बचाव कार्य में परेशानी आ रही है.

त्रिशूली बाजार और बेत्रावती में तबाही

सैलाब का पानी आगे बढ़कर त्रिशूली नदी तंत्र में पहुंचा, जिससे नुवाकोट के त्रिशूली बाजार और बेत्रावती इलाके भी बुरी तरह प्रभावित हुए. करीब 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आया मलबे और पानी का तेज बहाव निचले इलाकों में घुस गया. कई घरों में 6 से 8 फीट तक गाद और कीचड़ भर गया. घरों के ग्राउंड फ्लोर डूब गए, जबकि कई परिवारों को जान बचाने के लिए छतों पर शरण लेनी पड़ी.

धादिंग में सैलाब और भूस्खलन से सड़क-पुलों को भारी नुकसान

नेपाल के धादिंग जिले का गल्छी कॉरिडोर सैलाब और भूस्खलन से बुरी तरह प्रभावित हुआ है. यह सड़क काठमांडू को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ने के लिए बेहद अहम है. नदी के तेज बहाव और पहाड़ी इलाकों में कटाव के कारण यहां 50 से ज्यादा जगहों पर बड़े भूस्खलन हुए हैं. करीब 10 किलोमीटर सड़क को भारी नुकसान पहुंचा है, जबकि 19 पक्के पुल भी बह गए. इसके चलते काठमांडू और उत्तरी नेपाल के बीच आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है. सड़कें बंद होने से प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है.

Published: 27 Aug, 2026 | 08:58 AM

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