मॉनसून से पहले मवेशियों में बढ़ा गलाघोटू और FMD का खतरा, पशुपालक बरतें ये सावधानियां

Monsoon Animal Health: बरसात का मौसम जहां एक ओर किसानों और पशुपालकों के लिए हरियाली और राहत लेकर आता है, वहीं दूसरी ओर यही मौसम पशुओं के लिए कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, लगातार बारिश, कीचड़ और गंदगी के कारण संक्रमण तेजी से फैलता है, जिससे पशु कमजोर पड़ सकते हैं और कई बार स्थिति जानलेवा भी हो जाती है. ऐसे में सही देखभाल, साफ-सफाई और समय पर सावधानी ही पशुधन को सुरक्षित रखने का सबसे बड़ा उपाय बन जाती है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 6 Jun, 2026 | 04:26 PM
1 / 6मानसून के दौरान लगातार बारिश, नमी और कीचड़ की वजह से पशुओं में संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता है. गंदे माहौल और दूषित पानी के कारण पशु जल्दी बीमार पड़ सकते हैं, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ता है.

मानसून के दौरान लगातार बारिश, नमी और कीचड़ की वजह से पशुओं में संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता है. गंदे माहौल और दूषित पानी के कारण पशु जल्दी बीमार पड़ सकते हैं, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ता है.

2 / 6बरसात में नई घास तो उगती है, लेकिन उसमें कई बार हानिकारक तत्व होते हैं. इसके साथ ही गीला और खराब चारा बैक्टीरिया व वायरस का घर बन जाता है, जो पशुओं की सेहत पर बुरा असर डालता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है.

बरसात में नई घास तो उगती है, लेकिन उसमें कई बार हानिकारक तत्व होते हैं. इसके साथ ही गीला और खराब चारा बैक्टीरिया व वायरस का घर बन जाता है, जो पशुओं की सेहत पर बुरा असर डालता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है.

3 / 6यह बीमारी बरसात में सबसे गंभीर मानी जाती है. इसमें पशु को अचानक तेज बुखार आता है, मुंह से लगातार लार बहती है, खाने-पीने में परेशानी होती है और गले से घरघराहट जैसी आवाज आती है. अगर समय पर इलाज न मिले तो 24 घंटे के अंदर पशु की मौत भी हो सकती है.

यह बीमारी बरसात में सबसे गंभीर मानी जाती है. इसमें पशु को अचानक तेज बुखार आता है, मुंह से लगातार लार बहती है, खाने-पीने में परेशानी होती है और गले से घरघराहट जैसी आवाज आती है. अगर समय पर इलाज न मिले तो 24 घंटे के अंदर पशु की मौत भी हो सकती है.

4 / 6मानसून के समय खासकर गायों में लंगड़ा बुखार का खतरा अधिक रहता है. इसमें पशु के शरीर में तेज बुखार आता है और प्रभावित हिस्से में सूजन दिखाई देती है. सूजन वाले स्थान पर दबाने से असामान्य आवाज भी सुनाई देती है, इसलिए समय पर इलाज और संक्रमित पशु को अलग रखना जरूरी है.

मानसून के समय खासकर गायों में लंगड़ा बुखार का खतरा अधिक रहता है. इसमें पशु के शरीर में तेज बुखार आता है और प्रभावित हिस्से में सूजन दिखाई देती है. सूजन वाले स्थान पर दबाने से असामान्य आवाज भी सुनाई देती है, इसलिए समय पर इलाज और संक्रमित पशु को अलग रखना जरूरी है.

5 / 6इस बीमारी में पशु के मुंह और खुरों में दर्दनाक छाले हो जाते हैं, जिससे वह खाना-पीना कम कर देता है. इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है और धीरे-धीरे पशु कमजोर होने लगता है, जिससे पशुपालकों को बड़ा नुकसान होता है.

इस बीमारी में पशु के मुंह और खुरों में दर्दनाक छाले हो जाते हैं, जिससे वह खाना-पीना कम कर देता है. इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है और धीरे-धीरे पशु कमजोर होने लगता है, जिससे पशुपालकों को बड़ा नुकसान होता है.

6 / 6पशुओं की सुरक्षा के लिए समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी है. गौशाला को साफ और सूखा रखना, पानी का जमाव रोकना और पशुओं को साफ व पोषक आहार देना जरूरी है ताकि मानसून में बीमारियों से बचाव हो सके और पशुधन सुरक्षित रहे.

पशुओं की सुरक्षा के लिए समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी है. गौशाला को साफ और सूखा रखना, पानी का जमाव रोकना और पशुओं को साफ व पोषक आहार देना जरूरी है ताकि मानसून में बीमारियों से बचाव हो सके और पशुधन सुरक्षित रहे.

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