आलू के बाद खेतों में सोने सी चमकेगी ये फसल! कम खर्च में देती है बंपर मुनाफा, जानिए खेती की पूरी रणनीति
Sunflower Cultivation: आलू की फसल खेत से उठ चुकी है और आपके खेत अब खाली पड़े हैं. यही समय है सुनहरे सूरजमुखी की खेती शुरू करने का… सिर्फ 3 महीने में कम मेहनत और कम खर्च में आपको अच्छी पैदावार और मुनाफा मिल सकता है. सूरजमुखी न केवल घर में तेल की आपूर्ति करता है, बल्कि किसानों के लिए आय का एक नया और सुरक्षित रास्ता भी बन सकता है. आइए जानते हैं कि सही बुवाई, पौधों की दूरी और सिंचाई के छोटे-छोटे टिप्स से कैसे आपका खेत भी सोने की तरह चमक सकता है.

आलू की खुदाई के बाद खेत खाली रहते हैं और इसी समय सूरजमुखी की बुवाई सबसे उपयुक्त मानी जाती है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, बुवाई 10 मार्च से पहले होनी चाहिए. अगर समय पर बुवाई हो जाए, तो सूरजमुखी की पैदावार अच्छी रहती है और किसान केवल तीन महीने में ही लाभ कमा सकते हैं.

सूरजमुखी के पौधों के बीच कम से कम 15 सेंटीमीटर और लाइन से लाइन कम से कम 45 सेंटीमीटर की दूरी रखनी चाहिए. इतनी दूरी होने पर पौधे पूरी तरह विकसित होते हैं, उन्हें पर्याप्त धूप मिलती है और सिंचाई करना भी आसान हो जाता है.

बुवाई के बाद तापमान लगातार बढ़ने लगता है, जिससे सूरजमुखी के पौधों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. नियमित सिंचाई करने से पौधे गर्मी से सुरक्षित रहते हैं और उनका विकास सही तरीके से होता है.

गर्मियों में सूरजमुखी के खेतों में खरपतवार तेजी से बढ़ने लगते हैं, जो फसल की पैदावार पर असर डाल सकते हैं. विशेषज्ञों की सलाह अनुसार, 660 लीटर पानी में 3.3 लीटर बेंडिमेथिनील का घोल तैयार करके पौधों पर छिड़काव करें. इससे खरपतवार नियंत्रण में रहता है और फसल सुरक्षित रहती है.

सूरजमुखी का तेल स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसके साथ ही, सूरजमुखी की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आय का भी स्रोत बन सकती है. घर में तेल की आवश्यकता भी सूरजमुखी की पैदावार से पूरी की जा सकती है.

सूरजमुखी की सफल खेती के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह का पालन करना जरूरी है. सही बुवाई का समय, पौधों की दूरी, नियमित सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण को ध्यान में रखने से किसान अधिक लाभ और बेहतर पैदावार सुनिश्चित कर सकते हैं.