जर्सी-एचएफ को छोड़ इस देसी गाय पर भरोसा जता रहे किसान, कम खर्च में रोज देती है 15 लीटर तक A2 दूध

Tharparkar Cow Speciality: अगर आप पशुपालन से अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो गाय की सही नस्ल का चुनाव बेहद जरूरी है. आजकल कई किसान विदेशी नस्लों की बजाय देशी गायों की ओर रुख कर रहे हैं, क्योंकि ये कम खर्च में बेहतर उत्पादन देने के साथ भारतीय मौसम में आसानी से ढल जाती हैं. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, ऐसी ही एक खास नस्ल है थारपारकर गाय, जो अपने A2 दूध, अच्छी दूध क्षमता और कम रखरखाव लागत के लिए तेजी से लोकप्रिय हो रही है. यही वजह है कि देश के कई हिस्सों में पशुपालक इसे डेयरी कारोबार के लिए बेहतर विकल्प मान रहे हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 10 Jun, 2026 | 03:19 PM
1 / 6थारपारकर गाय मूल रूप से राजस्थान के थारपारकर क्षेत्र की नस्ल है. अपनी सहनशीलता, अच्छी सेहत और दूध उत्पादन क्षमता के कारण यह अब देश के कई राज्यों में पशुपालकों की पसंद बनती जा रही है.

थारपारकर गाय मूल रूप से राजस्थान के थारपारकर क्षेत्र की नस्ल है. अपनी सहनशीलता, अच्छी सेहत और दूध उत्पादन क्षमता के कारण यह अब देश के कई राज्यों में पशुपालकों की पसंद बनती जा रही है.

2 / 6इस नस्ल की गाय A2 प्रोटीन युक्त दूध देती है, जिसे सामान्य दूध की तुलना में अधिक पौष्टिक और आसानी से पचने वाला माना जाता है. यही वजह है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग इस दूध को ज्यादा पसंद कर रहे हैं.

इस नस्ल की गाय A2 प्रोटीन युक्त दूध देती है, जिसे सामान्य दूध की तुलना में अधिक पौष्टिक और आसानी से पचने वाला माना जाता है. यही वजह है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग इस दूध को ज्यादा पसंद कर रहे हैं.

3 / 6थारपारकर गाय भारतीय मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार खुद को आसानी से ढाल लेती है. यही कारण है कि यह कई सामान्य बीमारियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकती है और इसका रखरखाव भी आसान होता है.

थारपारकर गाय भारतीय मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार खुद को आसानी से ढाल लेती है. यही कारण है कि यह कई सामान्य बीमारियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकती है और इसका रखरखाव भी आसान होता है.

4 / 6एक स्वस्थ थारपारकर गाय प्रतिदिन लगभग 12 से 15 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है. खास बात यह है कि इसके लिए किसी विशेष या महंगे चारे की जरूरत नहीं होती, जिससे पशुपालकों की लागत कम रहती है.

एक स्वस्थ थारपारकर गाय प्रतिदिन लगभग 12 से 15 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है. खास बात यह है कि इसके लिए किसी विशेष या महंगे चारे की जरूरत नहीं होती, जिससे पशुपालकों की लागत कम रहती है.

5 / 6अच्छी दूध उत्पादन क्षमता और कम रखरखाव खर्च के कारण यह नस्ल डेयरी व्यवसाय से जुड़े किसानों के लिए मुनाफे का अच्छा विकल्प बन रही है. इससे नियमित आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

अच्छी दूध उत्पादन क्षमता और कम रखरखाव खर्च के कारण यह नस्ल डेयरी व्यवसाय से जुड़े किसानों के लिए मुनाफे का अच्छा विकल्प बन रही है. इससे नियमित आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

6 / 6थारपारकर जैसी देशी गायों का पालन न सिर्फ किसानों को आर्थिक लाभ देता है, बल्कि शुद्ध और बेहतर क्वालिटी वाले दूध की उपलब्धता भी बढ़ाता है. इसके संवर्धन से देशी नस्लों को बचाने और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने में मदद मिल सकती है.

थारपारकर जैसी देशी गायों का पालन न सिर्फ किसानों को आर्थिक लाभ देता है, बल्कि शुद्ध और बेहतर क्वालिटी वाले दूध की उपलब्धता भी बढ़ाता है. इसके संवर्धन से देशी नस्लों को बचाने और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने में मदद मिल सकती है.

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