Today’s Insights: बीज भिगोना क्यों है इतना जरूरी? जानें कैसे बढ़ती है इससे फसल की पैदावार
Beej Bhigone Ke Fayde: क्या आप जानते हैं कि आपकी फसल की सफलता केवल अच्छी मिट्टी या खाद पर ही निर्भर नहीं करती? कुछ मिनटों की छोटी तैयारी, यानी बीजों को बोने से पहले पानी में भिगोना, आपके पूरे खेत की किस्मत बदल सकता है.

कई बीजों के ऊपर सख्त छिलका होता है, जो मिट्टी की नमी से आसानी से टूट नहीं पाता. बीजों को बोने से पहले पानी में भिगोने से यह छिलका नरम हो जाता है, जिससे बीज के अंदर मौजूद भ्रूण आसानी से अंकुरित हो जाता है. यह पौधे के शुरुआती दिनों को मजबूत बनाता है.

कई बीजों में ऐसे नेचुरल केमिकल पाएं जाते हैं जो समय से पहले अंकुरित होने से रोकते हैं. पानी में भिगोने से ये रसायन बाहर निकल जाते हैं और बीज सही समय पर अंकुरित होने लगता है. इससे पौधों का विकास तेज और स्वस्थ होता है.

भिगोए हुए बीज अपने अंदर पहले से नमी बनाए रखते हैं. इस बजह से पौधा शुरुआत के दिनों में सूखने, गर्मी या दूसरी कठिन परिस्थितियों से सुरक्षित रहता है. जड़ें मिट्टी में मजबूती से फैलती हैं और पौधे जल्दी हरे-भरे दिखते हैं.

जब सभी बीज एक साथ भिगोए जाते हैं, तो उनका अंकुरण लगभग समान होता है. इससे पूरा खेत एकसमान हरा-भरा दिखता है, जिससे निराई-गुड़ाई और खाद प्रबंधन में आसानी होती है. साथ ही उत्पादन की योजना भी बेहतर बनती है.

बीज अपनी ऊर्जा सिर्फ अंकुरण के लिए इस्तेमाल करता है, न कि कठोर छिलके को तोड़ने में. इससे पौधा लंबा और मजबूत बनता है, जड़ें गहरी पकड़ती हैं और पौधे का विकास तेजी से होता है.

मोटे छिलके वाले बीज जैसे मटर, बीन्स, कद्दू, लौकी और खीरे को 6-24 घंटे पानी में भिगोएं. छोटे बीज जैसे सरसों या टमाटर को भिगोने से बचें, क्योंकि वे आपस में चिपक जाते हैं. भिगोने के तुरंत बाद बीजों को मिट्टी में बो दें ताकि उनकी नमी बनी रहे और अंकुरण सही समय पर हो.
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