बंगाल में अमूल का बड़ा निवेश प्लान, 650 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा पहला फुली-ओन्ड डेयरी प्लांट

Amul Investment West Bengal: अमूल पश्चिम बंगाल में लगभग 650 करोड़ रुपये का निवेश कर अपना पहला फुली-ओन्ड डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की योजना बना रहा है. इससे राज्य में डेयरी सेक्टर को बड़ा बढ़ावा मिलेगा. कोलकाता में दूध की मांग तेजी से बढ़ रही है, जहां रोजाना करीब 11 लाख लीटर बिक्री हो रही है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 31 May, 2026 | 11:23 AM

Amul Dairy Plant Kolkata: पश्चिम बंगाल के डेयरी सेक्टर में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. देश की प्रमुख दूध सहकारी संस्था अमूल राज्य में करीब 650 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है. इस योजना के तहत कोलकाता में अमूल अपना पहला पूरी तरह से खुद का डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट लगा सकती है. दूध की बढ़ती मांग को देखते हुए यह कदम कंपनी की पहुंच को और मजबूत करेगा. साथ ही इससे राज्य के ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा और किसानों को भी नए रोजगार और कमाई के अवसर मिल सकते हैं.

बंगाल में तेजी से बढ़ता अमूल का कारोबार

पिछले कुछ सालों में अमूल का कारोबार पश्चिम बंगाल में तेजी से बढ़ा है. खासकर कोलकाता में दूध की मांग लगातार बढ़ रही है, जहां हर दिन करीब 11 लाख लीटर दूध की बिक्री हो रही है. इसके अलावा पूरे राज्य में दूध की खरीद लगभग 9 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच चुकी है. यह दिखाता है कि अमूल का नेटवर्क और बाजार दोनों तेजी से मजबूत हो रहे हैं.

प्लांट के लिए जगह को लेकर मंथन

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमूल फिलहाल पश्चिम बंगाल में कई संभावित स्थानों का मूल्यांकन कर रहा है. कंपनी दो प्रमुख मॉडल पर विचार कर रही है:

  • एक बड़ा, केंद्रीकृत डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट
  • या फिर छोटे-छोटे फीडर प्लांट्स का नेटवर्क, जो राज्य के अलग-अलग जिलों में फैला हो

अंतिम निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि दूध की सप्लाई, ट्रांसपोर्ट व्यवस्था, स्थानीय मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर कैसा है.

क्यों अमूल के लिए महत्वपूर्ण है बंगाल?

पश्चिम बंगाल अब देश के तेजी से बढ़ते डेयरी बाजारों में शामिल हो गया है. शहरों का विस्तार, लोगों की बदलती जीवनशैली और दूध से बने उत्पादों की बढ़ती मांग ने इस सेक्टर को और मजबूत किया है. कोलकाता जैसे बड़े शहर में बढ़ती बिक्री यह संकेत देती है कि आने वाले समय में डेयरी उत्पादों की मांग और भी ज्यादा बढ़ सकती है.

स्थानीय किसानों और सप्लाई चेन को फायदा

अगर अमूल का 650 करोड़ रुपये का निवेश जमीन पर उतरता है, तो इससे पश्चिम बंगाल की डेयरी सप्लाई चेन और मजबूत हो जाएगी. अमूल पहले से ही स्थानीय किसानों से दूध खरीद बढ़ा रहा है, जिससे गांवों की अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा मिल रहा है. अगर कोलकाता में पूरी तरह से अपना प्लांट बनता है, तो दूध और डेयरी उत्पादों को लाने-ले जाने का खर्च कम होगा और बाजार में इनकी उपलब्धता भी बेहतर हो जाएगी.

बंगाल की अर्थव्यवस्था पर असर

इस परियोजना से पश्चिम बंगाल में रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना है. साथ ही फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी. डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ने से गांवों में लोगों की कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं और किसानों की भागीदारी भी बढ़ेगी.

अमूल का यह प्रस्तावित निवेश राज्य के डेयरी सेक्टर में बड़ा बदलाव ला सकता है. अगर यह योजना सफल होती है, तो इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और पूर्वी भारत में डेयरी उद्योग का एक नया मजबूत केंद्र भी बन सकता है.

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