आम की खेती में नई तकनीक की एंट्री, अब आसान होगी पेड़ों की छंटाई और बढ़ेगा उत्पादन
आम के कई पुराने बागों में पेड़ों की ऊंचाई 40 से 50 फीट तक पहुंच जाती है, जिससे उनकी देखभाल और फल तोड़ना मुश्किल हो जाता है. नई मशीन की मदद से पेड़ों की ऊंचाई को 14 से 18 फीट तक सीमित किया जा सकता है. इससे बागों में काम करना आसान होगा और उत्पादन की गुणवत्ता भी सुधरेगी.
Mango tree pruner: उत्तर प्रदेश में आम की खेती को आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है. लखनऊ के रहमानखेड़ा स्थित भाकृअनुप-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान में आम के पेड़ों की छंटाई के लिए स्पेन से आयातित एक विशेष मशीन का प्रदर्शन किया गया. इस तकनीक को किसानों के बीच लागू करने की तैयारी की जा रही है, ताकि उत्पादन बढ़े और लागत कम हो सके.
रहमानखेड़ा में नई तकनीक का प्रदर्शन
संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में राज्य परिवर्तन आयोग के सीईओ और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने कैनोपी प्रबंधन कार्यशाला का उद्घाटन किया. इस दौरान उन्होंने ट्रैक्टर से जुड़ी ट्री प्रूनर मशीन का प्रदर्शन देखा, जिसे खासतौर पर आम के बागों के लिए तैयार किया गया है. यह मशीन राज्य सरकार के सहयोग से एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत लाई गई है. इसका उद्देश्य पुराने और ज्यादा ऊंचे हो चुके पेड़ों को नियंत्रित करना है, ताकि उनकी देखभाल और उत्पादन दोनों बेहतर हो सकें.
पेड़ों की ऊंचाई कम कर आसान होगी देखभाल
आम के कई पुराने बागों में पेड़ों की ऊंचाई 40 से 50 फीट तक पहुंच जाती है, जिससे उनकी देखभाल और फल तोड़ना मुश्किल हो जाता है. नई मशीन की मदद से पेड़ों की ऊंचाई को 14 से 18 फीट तक सीमित किया जा सकता है. इससे बागों में काम करना आसान होगा और उत्पादन की गुणवत्ता भी सुधरेगी.
कैनोपी प्रबंधन तकनीक पर जोर
कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने किसानों को कैनोपी प्रबंधन की प्रक्रिया समझाई. इसके तहत बारिश के बाद, खासकर अक्टूबर में पेड़ों की ऊपरी शाखाओं की कटाई की जाती है. इसके बाद नई टहनियों को कीट और बीमारियों से बचाने के लिए देखभाल की जाती है. आने वाले समय में अतिरिक्त टहनियों को हटाकर पेड़ का आकार संतुलित रखा जाता है और “टेबल टॉप प्रूनिंग” के जरिए उसकी ऊंचाई नियंत्रित की जाती है. इससे पेड़ों पर बेहतर गुणवत्ता के फल आते हैं और उत्पादन में भी सुधार होता है.
लागत घटेगी, आय बढ़ने की उम्मीद
नई तकनीक से किसानों को कई तरह के फायदे मिलने की उम्मीद है. छोटे और संतुलित पेड़ों में पानी, उर्वरक और कीटनाशकों का इस्तेमाल अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है, जिससे खर्च कम होगा. साथ ही पेड़ों के बीच जगह बचने से किसान दूसरी फसलें भी उगा सकते हैं. इससे उनकी आय बढ़ाने का एक अतिरिक्त रास्ता खुलेगा.
बागवानी क्षेत्र की अहम भूमिका
कार्यक्रम में मनोज कुमार सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में बागवानी क्षेत्र का योगदान 30 प्रतिशत से अधिक है. राज्य की जलवायु और मिट्टी फलों की खेती के लिए अनुकूल है, जिससे निर्यात की भी अच्छी संभावनाएं हैं. उन्होंने कहा कि नई तकनीकों को तेजी से अपनाना जरूरी है, ताकि किसानों को बेहतर लाभ मिल सके और उत्पादन को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया जा सके.
मशीनों और प्रसंस्करण पर भी फोकस
कार्यक्रम में यह भी संकेत दिया गया कि सरकार आगे भी इस तरह की आधुनिक मशीनों को बढ़ावा देगी. साथ ही आम के प्रसंस्करण और उससे जुड़े उद्योगों को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया. संस्थान के निदेशक डॉ. टी. दामोदरन ने बताया कि आम के जीर्णोद्धार की यह तकनीक पुराने बागों को फिर से उत्पादक बनाने में मदद कर सकती है.