दुनिया में पहली बार जीन एडिटेड धान उगाएंगे भारतीय किसान, ICAR करेगा अमेरिकी कंपनी से करार

भारत में विकसित जीन एडिटेड धान की किस्म पूसा DST राइस-1 की रबी सीजन में बीज उत्पादन शुरू होने की तैयारी है. इसके लिए ICAR अमेरिकी कंपनी Corteva के साथ समझौता करेगा. नई किस्म सूखा, ऊसर और खारी मिट्टी जैसी कठिन परिस्थितियों में बेहतर उत्पादन देने में सक्षम है, जिससे किसानों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.

नोएडा | Updated On: 5 Aug, 2026 | 10:05 AM

भारत में विकसित जीन एडिटेड धान की नई किस्म ‘पूसा DST राइस-1’ की इस साल रबी सीजन में बीज उत्पादन के लिए बुवाई शुरू हो सकती है. इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) अमेरिकी कंपनी Corteva के साथ समझौता करने की तैयारी में है. इस कंपनी के पास CRISPR-Cas9 जीन एडिटिंग तकनीक का लाइसेंस है. समझौता होते ही इस नई धान किस्म के व्यावसायिक उपयोग का रास्ता भी साफ हो जाएगा.

कहा जा रहा है कि ICAR को इस समझौते के लिए जरूरी तीन मंजूरियों में से दो मिल चुकी हैं, जिनमें विदेश मंत्रालय की मंजूरी भी शामिल है. तीसरी मंजूरी मिलते ही MoU पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. इसके बाद नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान  (IARI) द्वारा विकसित ‘पूसा DST राइस-1’ के व्यावसायिक उपयोग का रास्ता साफ हो जाएगा. अधिकारियों के मुताबिक, Corteva के साथ समझौते के बाद अमेरिका के MIT/Broad Institute के साथ भी एक अलग समझौता किया जाएगा. इस संस्थान के पास CRISPR-Cas12a तकनीक का पेटेंट है. इसी तकनीक का उपयोग हैदराबाद स्थित भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान (IIRR) द्वारा विकसित DRR धान-100 (कमला) किस्म तैयार करने में किया गया है.

शिवराज सिंह चौहान ने की थी घोषणा

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 मई 2025 को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि ICAR के वैज्ञानिकों ने पहली बार जीन एडिटिंग तकनीक से धान की दो नई किस्में विकसित की हैं. अब इनमें से ‘पूसा DST राइस-1’ की इस साल रबी सीजन में बीज उत्पादन शुरू होने की तैयारी है. हालांकि, खबर ये भी है कि नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) ने पूसा DST राइस-1 के करीब 2 टन बीज तैयार कर लिए हैं. यह मात्रा रबी सीजन में नवंबर के आसपास रोपाई के साथ बीज उत्पादन शुरू करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है. यह किस्म MTU-1010 धान से विकसित की गई है, जिसे दक्षिण भारत के रबी सीजन के लिए उपयुक्त माना जाता है.

कठिन मौसम में भी बढ़ेगा धान का उत्पादन

वैज्ञानिकों ने जीन एडिटिंग के जरिए इस किस्म को सूखा, खारे पानी (लवणीयता) और क्षारीय मिट्टी जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों को बेहतर तरीके से सहन करने लायक बनाया है. परीक्षणों में पूसा DST राइस-1 ने मूल MTU-1010 किस्म की तुलना में अधिक उपज दी. ICAR ने इस किस्म की खेती आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में करने की सिफारिश की है. इससे इन राज्यों के किसानों को प्रतिकूल मौसम में भी बेहतर उत्पादन मिलने की उम्मीद है.

एशिया-अफ्रीका के किसानों के लिए नई उम्मीद

ICAR और अमेरिकी कंपनी Corteva के बीच समझौते (MoU) से पहले ही अंतरराष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) ने Corteva के साथ दीर्घकालिक लाइसेंसिंग समझौता कर लिया है. 3 अगस्त को ICRISAT ने बताया कि इस समझौते के तहत उसे CRISPR-Cas9 जीन एडिटिंग तकनीक का उपयोग करने की अनुमति मिल गई है. इससे एशिया और अफ्रीका के छोटे किसानों के लिए बेहतर फसल किस्में विकसित करने में मदद मिलेगी.

पेटेंट मंजूरी के बाद ही पहुंचेगी नई धान किस्म

वैज्ञानिकों का कहना है कि शोध कार्य के दौरान पेटेंट वाली जीन एडिटिंग तकनीक  का इस्तेमाल करने में कोई दिक्कत नहीं होती. लेकिन अगर उस तकनीक से विकसित नई किस्मों को व्यावसायिक रूप से किसानों तक पहुंचाना हो, तो पेटेंट धारक या उसके लाइसेंसधारी की अनुमति लेना जरूरी होता है. यही वजह है कि ICAR को नई धान किस्मों के व्यावसायिक उपयोग के लिए Corteva के साथ MoU करना पड़ रहा है.

 

Published: 5 Aug, 2026 | 09:52 AM

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