अनपढ़ ग्रामीण महिलाओं का कमाल.. सब्जियों के पत्ते, हल्दी-फूल से गुलाल बनाकर आत्मनिर्भर बनीं, देशभर में बिक्री
Holi Herbal Gulal: परिवर्तन महिला स्वयं सहायता समूह की मुखिया गीता राजपूत ने किसान इंडिया को बताया कि महिलाएं फूल, पालक, हल्दी सहित अन्य प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग कर बड़ी मात्रा में हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं. मानव स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे इस हर्बल गुलाल की क्षेत्र के साथ ही देश के कई बड़े शहरों में अच्छी मांग है.
छत्तीसगढ़ के दुर्ग की अनपढ़ ग्रामीण महिलाओं ने खुद के जीवन स्तर को ठीक करने और अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए नायाब तरीका खोज निकाला है. वह स्वयं सहायता समूह के साथ जुड़कर हर्बल गुलाल बनाती हैं. इसके लिए वह सब्जियों के हरे पत्ते, हल्दी और फूलों का इस्तेमाल करती हैं. हर्बल गुलाल की बिक्री देशभर के बड़े शहरों में हो रही है. इसके अलावा महिलाएं अगरबत्ती, दीया और धूपबत्ती जैसे उत्पाद बनाकर अपनी कमाई बढ़ा रही हैं. खास बात ये है कि यह महिलाएं इन उत्पादों की खुद पैकेजिंग आदि भी करती हैं. इससे इन महिलाओं की घर बैठे आमदनी बढ़ी है, जिससे पारिवारिक आर्थिक स्थितियां बेहतर हुई हैं.
हर्बल गुलाल बनाकर आत्मनिर्भर बन रही दुर्ग की महिलाएं
होली के पर्व को सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल तरीके से मनाने के लिए प्रदेशभर में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं हर्बल गुलाल के निर्माण में जुटी हुई हैं. दुर्ग जिले की महिलाएं भी इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रही हैं. जिले बघेरा स्थित परिवर्तन महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य महिलाएं फूल, पालक, हल्दी सहित अन्य प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग कर बड़ी मात्रा में हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं. मानव स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे इस हर्बल गुलाल की क्षेत्र में अच्छी मांग है.
गुलाल बनाकर होने वाली कमाई से बच्चों की फीस भर रहीं कमलेश्वरी
स्वयं सहायता समूह की सदस्य कमलेश्वरी यादव और हेमलता राजपूत ने बताया कि इस काम से उन्हें आर्थिक रूप से लाभ हो रहा है, जिससे वे अपनी और अपने परिवार की छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा कर पा रही हैं. वह अपने बच्चों को पढ़ाने-ट्यूशन आदि की फीस भी खुद भर पा रही हैं. उन्होंने कहा कि समूह की महिलाएं पिछले कई वर्षों से हर्बल गुलाल का निर्माण कर रही हैं और प्रत्येक सीजन में सैकड़ों किलोग्राम गुलाल की बिक्री करती हैं. पूरी तरह प्राकृतिक सामग्री से तैयार किया गया यह गुलाल स्वास्थ्य और त्वचा के लिए सुरक्षित है.
3 साल से काम कर रही महिलाएं, प्रशासन से सहयोगी की मांग
परिवर्तन महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष गीता राजपूत ने ‘किसान इंडिया’ को बताया कि उनका समूह हर्बल गुलाल के अलावा अन्य उत्पादों का भी निर्माण करता है और उसकी पैकेजिंग भी खुद महिलाएं ही करती हैं. यह काम वह 3 साल से कर रही हैं. उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन की ओर से उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए, तो उन्हें और अधिक आर्थिक लाभ मिल सकता है. जबकि, उन्होंने जिला प्रशासन से उन्नत स्तर की ट्रेनिंग कराने की भी अपील की है. उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्होंने निजी तौर पर ट्रेनिंग लेकर काम करा रही हैं.
परिवर्तन महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष गीता राजपूत (ऊपर). सदस्य कमलेश्वरी यादव (नीचे).
200 किलो गुलाल बिक्री, हर महीने महिलाओं की 10 हजार की कमाई
गीता राजपूत ने बताया कि हम लोग सीजन के हिसाब से हम लोग काम भी करते हैं. अभी जैसे नवरात्रि में ध्वज बनेगा और दीवाली में दीया बनता है, धूप बत्ती बनती है. गुलाल की मार्केटिंग तो बहुत अच्छी रहता है, मतलब हर साल हम लोग का 200 किलो ग्राम तक गुलाल बनाकर बेच देते हैं. उन्होंने बताया समूह की महिलाएं हर महीने 10 हजार रुपये तक आसानी से हासिल कर पा रही हैं. उन्होंने कहा यह पहले महिलाएं घर पर ही बैठी रहती थीं और जब से समूह के जरिए काम शुरू किया है तो उन्हें रोजगार मिला है.
लागत से दोगुना मुनाफा हासिल कर रहीं गीता
गीता राजपूत ने बताया कि वह एक व्हाट्सएप पर जैविक उत्पादों का समूह बना है. जिसमें देशभर के लोग जुड़े हुए हैं. उन्होंने बताया कि व्हाट्सएप नेटवर्क के जरिए उनके ऑर्गनिक उत्पादों के लिए दिल्ली, पुणे, हैदराबाद, नांदेड़ जैसे शहरों से ऑर्डर मिल जाते हैं. उन्होंने कहा कि इस सीजन में वह एक किलो गुलाल का पैकेट 200 रुपये बेच रही हैं, होलसेल में 170-180 रुपये में भी बेच देती हैं. एक किलो गुलाल बनाने में उनका खर्चा 70-80 रुपये के आसपास रहता है. इस तरह वह लगभग दोगुना मुनाफा हासिल कर पाती हैं.