आलू से डर गया था फ्रांस! कभी इस फसल पर लगा था बैन, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान
आलू मूल रूप से दक्षिण अमेरिका की फसल है. 16वीं सदी में जब इसे यूरोप लाया गया, तो लोगों के लिए यह बिल्कुल नई और अनजान चीज थी. उस समय यूरोप के कई हिस्सों में इसे अपनाने में हिचक दिखाई गई, लेकिन फ्रांस में मामला कुछ ज्यादा ही गंभीर हो गया.
Potato protest history: आज शायद ही कोई रसोई होगी जहां आलू न मिलता हो. फ्रेंच फ्राइज से लेकर चिप्स और पराठे तक, आलू हर जगह अपनी जगह बना चुका है. लेकिन इतिहास में एक ऐसा दौर भी आया जब एक यूरोपीय देश में लोगों ने आलू का खुलकर विरोध किया था. इतना ही नहीं, उसकी खेती तक पर रोक लगा दी गई थी. यह देश था फ्रांस, जहां कभी आलू को शक, अंधविश्वास और डर की नजर से देखा गया.
अमेरिका से यूरोप तक का सफर
लैंकेस्टर विश्वविद्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, आलू मूल रूप से दक्षिण अमेरिका की फसल है. 16वीं सदी में जब इसे यूरोप लाया गया, तो लोगों के लिए यह बिल्कुल नई और अनजान चीज थी. उस समय यूरोप के कई हिस्सों में इसे अपनाने में हिचक दिखाई गई, लेकिन फ्रांस में मामला कुछ ज्यादा ही गंभीर हो गया.
चूंकि आलू जमीन के नीचे उगता है, इसलिए कई लोगों को यह अजीब लगा. उस दौर में लोगों को जो चीज समझ में नहीं आती थी, उससे वे डर जाते थे. आलू भी उसी डर का शिकार हुआ.
बीमारी और अंधविश्वास का डर
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस में 18वीं सदी के दौरान यह अफवाह फैल गई कि आलू खाने से कोढ़ जैसी खतरनाक बीमारी हो सकती है. लोगों का मानना था कि मिट्टी के नीचे उगने वाली यह फसल गंदगी और बीमारी से जुड़ी है.
कुछ धार्मिक लोगों ने यह भी कहा कि बाइबिल में आलू का जिक्र नहीं है, इसलिए इसे खाना उचित नहीं है. धीरे-धीरे यह धारणा मजबूत हो गई कि आलू इंसानों के खाने के लायक नहीं है. कई जगह इसे “शैतान की फसल” तक कहा गया. नतीजा यह हुआ कि लोग आलू को खाने के बजाय पशुओं को खिलाना ज्यादा ठीक समझते थे.
जब लगा कानूनी प्रतिबंध
लगातार फैलती अफवाहों और डर के कारण फ्रांस के कुछ इलाकों में 1748 से 1772 के बीच आलू की खेती पर आधिकारिक रोक लगा दी गई. अधिकारियों को भी लगने लगा था कि यह फसल लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है. यह विडंबना ही थी कि उसी समय यूरोप के कई हिस्सों में अकाल और भोजन की कमी की समस्या थी. फिर भी लोग आलू को अपनाने के लिए तैयार नहीं थे.
सोच बदलने वाला अनोखा प्रयोग
फ्रांस में आलू के प्रति धारणा बदलने का श्रेय एक फार्मासिस्ट और कृषि विशेषज्ञ एंटोनी ऑगस्टिन पारमेंटियर को जाता है. उन्होंने देखा कि आलू पोषण से भरपूर है और अकाल के समय लोगों को भूख से बचा सकता है. लेकिन सीधे लोगों को समझाने से बात नहीं बन रही थी. तब उन्होंने एक अनोखी रणनीति अपनाई. उन्होंने आलू के खेत लगाए और दिन में वहां सैनिक तैनात कर दिए. इससे लोगों को लगा कि यह कोई बेहद कीमती फसल है. रात के समय सैनिक हटा लिए जाते थे. उत्सुक ग्रामीण चुपके से खेतों से आलू ले जाते और घर पर उगाने लगते. धीरे-धीरे लोगों को समझ में आया कि यह फसल सुरक्षित और स्वादिष्ट है.
विरोध से लोकप्रियता तक का सफर
समय के साथ फ्रांस में आलू की स्वीकार्यता बढ़ती गई. अकाल के दौर में इसने लाखों लोगों को भोजन दिया. बाद में यही आलू फ्रांसीसी खानपान का अहम हिस्सा बन गया. आज फ्रांस में फ्रेंच फ्राइज, ग्रेटिन और मैश्ड पोटैटो जैसी डिश दुनिया भर में मशहूर हैं. जिस फसल को कभी शक और डर से देखा गया, वही आज रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा है.