दुनिया के खाड़ी क्षेत्र में इन दिनों बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ राजनीति या सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा है. इसका असर धीरे-धीरे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है. भारत में इसका सबसे बड़ा असर खाद यानी उर्वरकों की कीमतों पर पड़ता दिखाई दे रहा है. दरअसल कच्चे तेल और एलएनजी यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेजी आ रही है. जैसे ही ऊर्जा की कीमतें बढ़ती हैं, वैसे ही यूरिया और डीएपी जैसे उर्वरकों की लागत भी बढ़ जाती है. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद के दाम तेजी से ऊपर जा रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो यूरिया की कीमत 1000 डॉलर प्रति टन से भी ऊपर जा सकती है.
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