IMD Weather Forecast: देश के कई हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है, लेकिन फिलहाल इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है. मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में चल रही सूखी पश्चिमी हवाएं मानसून के आगे बढ़ने में बाधा बन रही हैं. ये हवाएं बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली मानसूनी हवाओं को आगे बढ़ने से रोक रही हैं, जिससे कई इलाकों में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ गई हैं. हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में पश्चिमी तट और कुछ अन्य क्षेत्रों में बारिश बढ़ सकती है. इससे मानसून को दोबारा रफ्तार मिलने की उम्मीद है.
एक सप्ताह से आगे नहीं बढ़ा मानसून
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, पिछले करीब एक सप्ताह से मानसून की रफ्तार धीमी बनी हुई है. मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों तक पहुंच चुका है, लेकिन इसके बाद आगे नहीं बढ़ पाया है. आमतौर पर जून के मध्य तक मानसून तेजी से आगे बढ़ता है, लेकिन इस बार मौसम की कुछ परिस्थितियों के कारण इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है.
पश्चिमी हवाएं बनीं बड़ी वजह
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में सूखी पश्चिमी हवाओं का असर ज्यादा है. ये हवाएं बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली मानसूनी हवाओं की रफ्तार को धीमा कर रही हैं.
मानसून के आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त नमी और अनुकूल मौसम की जरूरत होती है, लेकिन फिलहाल सूखी हवाओं के प्रभाव के कारण बारिश का दायरा तेजी से नहीं बढ़ पा रहा है. यही वजह है कि कई इलाकों में मानसून की प्रगति धीमी बनी हुई है और अच्छी बारिश के लिए अभी कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है.
बनी मौसमी ट्रफ, बढ़ी उम्मीदें
हालांकि मौसम विभाग ने एक राहत भरा संकेत भी दिया है. राजस्थान से लेकर पश्चिम बंगाल तक एक लंबी मौसम रेखा बनी हुई है, जो राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से होकर गुजर रही है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी को उत्तर और मध्य भारत तक पहुंचाने में मदद कर सकती है. अगर यह मौसम प्रणाली मजबूत बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है.
अगले 4-5 दिनों में आगे बढ़ सकता है मानसून
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले चार से पांच दिनों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए मौसम की परिस्थितियां अनुकूल रह सकती हैं. इस दौरान महाराष्ट्र के कुछ और हिस्सों, कर्नाटक के बाकी क्षेत्रों, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और दक्षिण छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में मानसून आगे बढ़ सकता है. अगर ऐसा होता है, तो खरीफ फसलों की बुवाई का इंतजार कर रहे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी और खेतों में बुवाई का काम तेज हो सकेगा.
कम दबाव का क्षेत्र नहीं बनने से बढ़ी चिंता
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून को रफ्तार देने के लिए बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनना बहुत जरूरी होता है. यह प्रणाली समुद्र से नमी वाली हवाओं को खींचकर देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश कराने में मदद करती है. लेकिन फिलहाल मौसम के अनुमान बता रहे हैं कि जून के बाकी दिनों में किसी मजबूत कम दबाव वाले क्षेत्र के बनने की संभावना कम है. हालांकि आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों के आसपास हल्की मौसम गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं, लेकिन इनके बड़े बारिश वाले सिस्टम में बदलने के संकेत अभी नहीं मिल रहे हैं.
ऊपरी हवा की खराब स्थिति
मौसम विभाग के अनुसार, ऊपरी हवा में बन रही कुछ मौसम प्रणालियां और पश्चिमी विक्षोभ फिलहाल मानसून की रफ्तार को प्रभावित कर रहे हैं. इनकी वजह से बंगाल की खाड़ी में मजबूत मौसम प्रणाली विकसित नहीं हो पा रही है, जो मानसून को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है. यही कारण है कि मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मानसून की प्रगति धीमी बनी हुई है और इसके तेजी से आगे बढ़ने में अभी कुछ और समय लग सकता है.