SHG महिलाओं के कृषि उत्पाद खुद खरीदेगी सरकार, बिक्री और पेमेंट भी तेज होगी

ग्रामीण महिलाओं के छोटे उद्योगों को नई उड़ान मिलने जा रही है. केंद्र सरकार की नई पहल से SHG के उत्पाद सरकारी खरीद से जुड़ेंगे. GeM पोर्टल, टेंडर और गुणवत्ता सुधार की ट्रेनिंग से महिलाएं बड़े बाजार तक पहुंचेंगी और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखेंगी.

नोएडा | Published: 30 Jul, 2026 | 02:48 PM

ग्रामीण इलाकों में मेहनत और हुनर से छोटे-छोटे उद्योग चला रहीं महिलाओं के लिए अब बड़े बाजार के दरवाजे खुलने जा रहे हैं. गांव की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए अचार, पापड़, हस्तशिल्प, कपड़े, खाद्य उत्पाद और अन्य सामान अब सरकारी खरीद व्यवस्था से जुड़ सकेंगे. केंद्र सरकार ने स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं को सरकारी संस्थानों तक पहुंच दिलाने के लिए एक नई पहल शुरू की है. इससे महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर मंच मिलेगा और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी. नई व्यवस्था के तहत सरकार खुद महिलाओं के उत्पाद की खरीद-बिक्री करेगी. इससे महिला उत्पादकों का प्रोडक्शन बढ़ाने पर फोकस रहेगा और उन्हें बिक्री और मार्केटिंग का झंझट नहीं झेलना होगा.

SHG उत्पादों को सरकारी खरीद से जोड़ने की नई पहल

ग्रामीण महिलाओं  के छोटे उद्योगों को मजबूत करने के उद्देश्य से दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) और प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल इंडिया के बीच एक गैर-वित्तीय समझौता ज्ञापन (MoU) किया गया है. इस समझौते का मुख्य लक्ष्य स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए जा रहे उत्पादों को सरकारी खरीद प्रणाली से जोड़ना है. इस पहल के बाद SHG से जुड़ी महिलाएं अपने उत्पादों को सरकारी विभागों और संस्थानों तक पहुंचा सकेंगी. इससे उन्हें स्थानीय बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और बिक्री के नए अवसर मिलेंगे. सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण महिला उद्यमियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद मिलेगी.

तीन साल चलेगा विशेष कार्यक्रम, बनेगा नेशनल रिसोर्स सेल

इस साझेदारी को तीन साल यानी 2026 से 2029 तक लागू किया जाएगा. ग्रामीण विकास विभाग  के सचिव रोहित कंसल की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया. इस योजना के तहत एक नेशनल रिसोर्स सेल की स्थापना की जाएगी. यह सेल राज्यों की आजीविका मिशन टीमों को तकनीकी सहायता और जरूरी मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा. इसका उद्देश्य महिलाओं के उत्पादों को बाजार की जरूरतों के अनुसार तैयार करना और उन्हें सरकारी खरीद प्रक्रिया के लिए सक्षम बनाना है.

GeM पोर्टल, टेंडर और गुणवत्ता सुधार की मिलेगी ट्रेनिंग

इस पहल में महिलाओं को कई तरह की सुविधाएं दी जाएंगी. स्वयं सहायता समूहों को सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर अपने उत्पादों की लिस्टिंग करने में सहायता मिलेगी. इसके अलावा सरकारी टेंडर में भाग लेने के नियम, दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों  की जानकारी भी दी जाएगी. महिलाओं को उत्पादों की पैकेजिंग, गुणवत्ता सुधार और बाजार की मांग को समझने के लिए विशेषज्ञों की मदद मिलेगी. साथ ही सौर ऊर्जा और टिकाऊ खेती जैसे तरीकों को अपनाकर नए बिजनेस मॉडल विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा.

6 करोड़ लखपति दीदी का लक्ष्य

केंद्र सरकार इस योजना की शुरुआत वित्तीय वर्ष 2026-27 में सात राज्यों से करेगी. इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक और असम शामिल हैं. शुरुआत में इन राज्यों की SHG महिलाओं को विशेष तकनीकी सहायता दी जाएगी. इसके बाद योजना को धीरे-धीरे देश के अन्य राज्यों तक विस्तार दिया जाएगा. यह पहल सरकार के 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य का हिस्सा है. सरकार का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को केवल उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी बनाना है. सरकारी बाजार से जुड़ने के बाद SHG महिलाओं के उत्पादों  को नई पहचान मिलेगी और गांवों में महिला रोजगार व आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी.

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