चुनावों से पहले सौगात.. 6 लाख किसानों को 300 करोड़ भेजे, खेतिहर मजदूरों को मालिकाना हक और नौकरी में आरक्षण

असम में मार्च-अप्रैल 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं. इससे पहले मौजूदा सरकार ने वित्तीय समेत अन्य योजनाओं का लाभ देना शुरू कर दिया है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को 'एटी कोली दुती पात' (Eti Koli Duti Paat) योजना लॉन्च करते हुए 6 लाख चाय बागान मजदूरों को एकमुश्त सहायता राशि जारी कर दी है.

नोएडा | Updated On: 25 Jan, 2026 | 05:19 PM

राज्य सरकार ने घोषणा के 20 दिनों अंदर वादे को पूरा करते हुए किसानों के लिए 300 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं. असम सरकार ने 5 जनवरी को चाय बागान के मजदूरों से वादा किया था कि उन्हें वित्तीय मदद के रूप में 5 हजार रुपये देने की योजना शुरू की जाएगी. आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री को वादे को करते हुए सभी लाभार्थियों के खाते में राशि जारी कर दी गई है. राज्य सरकार ने चाय किसानों को जमीन का मालिकाना हक देने का आश्वासन दिया और सरकारी नौकरियों में आरक्षण लागू कर दिया है.

चाय बागान मजदूरों के खाते में पहुंचे 5000 रुपये भेजे

असम में मार्च-अप्रैल 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं. इससे पहले मौजूदा सरकार ने वित्तीय समेत अन्य योजनाओं का लाभ देना शुरू कर दिया है. आज 25 जनवरी 2026 को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को ‘एटी कोली दुती पात’ (Eti Koli Duti Paat) योजना लॉन्च करते हुए 6 लाख चाय बागान मजदूरों में से प्रत्येक को 5,000 रुपये की एकमुश्त सहायता राशि जारी कर दी है.

नौकरियों में आरक्षण देने की शुरुआत

राज्य सरकार ने चाय बागानों के मजदूरों को चाय बागानों की लेबर लाइनों में जमीन का मालिकाना हक देने का आश्वासन दिया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों के बच्चों, परिजनों को सरकारी नौकरियों और MBBS सीटों में आरक्षण लागू कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में चाय जनजाति समुदाय तक पहुंचने के प्रयास में शैक्षिक और स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाया है.

असम जो करता है बड़ा करता है- सीएम

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने चाय उद्योग के केंद्र तिनसुकिया जिले के डूमडूमा में योजना लॉन्च करने के बाद X पर पोस्ट किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि असम जो कुछ भी करता है, बड़े पैमाने पर करता है. आज 6 लाख से ज़्यादा चाय बागान मजदूरों को उनकी कड़ी मेहनत के लिए आभार के तौर पर 5000 रुपये मिले, जिसने चाय को असम का पर्याय बना दिया है.

200 साल पुरानी विरासत को बचाने-बढ़ाने की पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना उनकी सरकार की ओर से असम की 200 साल पुरानी चाय विरासत की रक्षा और बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई कई ऐतिहासिक पहलों का हिस्सा है. इस घोषणा से राज्य भर के हजारों चाय बागान मजदूरों को फायदा होने की उम्मीद है, जिससे उन्हें वित्तीय राहत मिलेगी और असम की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान में चाय समुदाय के योगदान को मान्यता मिलेगी.

असम की चाय इंडस्ट्री में 10 लाख से ज्यादा लोग काम कर रहे

अधिकारियों ने कहा कि यह पहल चाय बागान मजदूरों के कल्याण पर सरकार के लगातार फोकस को दर्शाती है. असम के चाय उद्योग में प्लांटेशन और फैक्टरी कार्यों में शामिल कुल मजदूरों की संख्या लगभग 10 लाख के करीब है. जबकि, 6,86,439 पत्तियां तोड़ने या चाय की खेती करने वाले मजदूर या किसान हैं.

Published: 25 Jan, 2026 | 05:16 PM

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