यूरोपीय डील से घरेलू धान किसानों की झोली भरेगी, चावल निर्यात 300 लाख टन के पार जाएगा!

एपिडा के अनुसार साल 2024-25 में भारत ने 201 लाख मीट्रिक टन चावल का निर्यात किया. अब यूरोपीय यूनियन से समझौते से 27 देशों का बाजार भारत के लिए खुल गए है. ऐसे में चावल निर्यात नए रिकॉर्ड पर पहुंचने की उम्मीद की जा रही है. वर्तमान में घरेलू चावल स्टॉक तय लिमिट से ऊपर है. जबिक, खरीफ धान की खरीद का नया रिकॉर्ड बन चुका है.

नोएडा | Updated On: 27 Jan, 2026 | 07:20 PM

भारत ने यूरोपीय यूनियन के साथ व्यापार समझौता किया है. इसके साथ ही भारतीय चावल निर्यात को नया बूस्ट मिलने वाला है. क्योंकि, यूरोपीय यूनियन में जर्मनी, फ्रांस समेत 27 देश शामिल हैं और अब नए समझौते से इन देशों के बाजारों में भारतीय चावल की मांग बढ़ेगी. इससे घरेलू धान किसानों की उपज की खरीद और बिक्री आसान हो जाएगी. क्योंकि, इन देशों की चावल मांग को भारत पूरा करेगा. उम्मीद जताई जा रही है कि अब सालाना चावल निर्यात 300 लाख मीट्रिक टन के पार जा सकता है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने व्यापार समझौते से चावल को लेकर सकारात्मक उम्मीद जताई है.

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के अनुसार भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक और निर्यातक है. साल 2024-25 में भारत ने 201 लाख मीट्रिक टन चावल का निर्यात किया. भारत का चावल खरीदने वाले प्रमुख देशों में सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका शामिल हैं. इस निर्यात आंकड़े में बासमती और गैर-बासमती दोनों किस्में शामिल हैं.

27 देशों का बाजार खुलने से चावल निर्यात 300 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान

अब पीएम मोदी ने यूरोपीय यूनियन के साथ फ्री ट्रेड होने की पुष्टि की है और उन्होंने भारतीय किसानों को लाभ मिलने की बात कही है. एपिडा ने पहले ही चावल का निर्यात 2025-26 में बढ़ने की संभावना जता दी है. जबकि, यूरोपीय यूनियन के साथ समझौते से स्पेन, जर्मनी, फ्रांस समेत 27 देशों का बाजार भी भारतीय चावल निर्यात के लिए खुल गया है. नए व्यापार समझौते से चावल निर्यात का आंकड़ा 300 लाख मीट्रिक टन के पार पहुंचने की संभावना जताई जा रहा है.

चावल निर्यात बढ़ने से 2 लाख करोड़ रुपये आने की उम्मीद

एपिडा के अनुसार भारत का चावल निर्यात में भारत विश्व में पहले नंबर पर है कुल वैश्विक निर्यात का अकेले 40 फीसदी चावल भेजता है. चावल के निर्यात का कुल मूल्य 2024-25 में 12.47 बिलियन अमेरिकी डॉलर (1 लाख करोड़ भारतीय रुपये से अधिक) हो गया, जो 7.18 फीसदी की वार्षिक बढ़त दर को दर्शाता है. जबकि, अकेले बासमती चावल का निर्यात 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का दर्ज किया गया. अब नए समझौतों के साथ ही घरेलू चावल निर्यात का मूल्य 2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है.

चावल उत्पादन में भारत पहले नंबर पर

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुआ समझौता हुआ है. यह केवल दस्तावेज नहीं, भारत के वैश्विक नेतृत्व की घोषणा है. उन्होंने कहा कि आज भारत सिर्फ आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि दुनिया को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है. आज मैं गर्व से कहता हूं- भारत दुनिया में चावल उत्पादन में पहले स्थान पर पहुंच चुका है.

कृषि विकास दर और बढ़ेगी

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारी कृषि विकास दर ने हरित क्रांति के दौर को भी पीछे छोड़ दिया है. घटिया पेस्टिसाइड और नकली बीज किसानों की कमर तोड़ देते हैं, अब ऐसा नहीं चलेगा, इसलिए हम एक सख्त पेस्टिसाइड एक्ट और नया बीज एक्ट लाने जा रहे हैं. विकसित भारत के लिए रोजगार युक्त, गरीबी मुक्त और एक स्वावलंबी गांव बनाने का भी संकल्प हमारा पूरा होगा. इसलिए ‘विकसित भारत जी-राम-जी अधिनियम’ अब देश में लागू हो रहा है. इससे हमारे गांव संपूर्ण विकसित ग्राम बन सकेंगे.

Published: 27 Jan, 2026 | 04:01 PM

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