सरकार ने खोला निर्यात का रास्ता, 25 लाख टन गेहूं जाएगा विदेश… मिलेंगे दो बड़े फायदे

Wheat export: सरकार ने गेहूं के साथ-साथ गेहूं के आटे और उससे जुड़े उत्पादों के 5 लाख टन अतिरिक्त निर्यात की भी अनुमति दी है. हालांकि आटे के निर्यात पर भी सामान्य रूप से रोक जारी रहेगी, लेकिन विशेष मंजूरी के तहत तय मात्रा में निर्यात किया जा सकेगा.

नई दिल्ली | Published: 25 Feb, 2026 | 09:58 AM

Wheat export: केंद्र सरकार ने गेहूं को लेकर अहम फैसला लिया है. सरकार ने 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं के निर्यात की अनुमति दे दी है. हालांकि गेहूं का सामान्य निर्यात अभी भी बंद रहेगा, लेकिन तय मात्रा तक इसे बाहर भेजने की छूट दी गई है.

यह फैसला पहले ही ले लिया गया था, लेकिन अब विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने मंगलवार को इसकी आधिकारिक जानकारी जारी की है. सरकार ने यह भी कहा है कि निर्यात से जुड़ी पूरी प्रक्रिया और नियम अलग से बताए जाएंगे.

FCI के गोदाम भरे हुए हैं

खाद्य मंत्रालय के अनुसार 1 अप्रैल 2026 तक भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास केंद्रीय भंडार में लगभग 182 लाख टन गेहूं उपलब्ध रहने का अनुमान है. यह मात्रा देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है.

इसके अलावा निजी कंपनियों और व्यापारियों के पास भी लगभग 75 लाख टन गेहूं का स्टॉक मौजूद है. यह पिछले साल की तुलना में करीब 32 लाख टन अधिक है. यानी कुल मिलाकर देश में गेहूं की आपूर्ति फिलहाल मजबूत स्थिति में है.

क्यों लिया गया निर्यात का फैसला

जब बाजार में फसल ज्यादा मात्रा में आती है और भंडार भर जाते हैं, तो कई बार कीमतों में गिरावट आ जाती है. ऐसी स्थिति में किसान को अपनी उपज कम दाम पर बेचनी पड़ती है, जिसे मजबूरी में बिक्री या ‘डिस्ट्रेस सेल’ कहा जाता है.

सरकार का मानना है कि सीमित मात्रा में निर्यात की अनुमति देने से बाजार में संतुलन बना रहेगा. इससे मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन कायम होगा और कीमतों में अनावश्यक गिरावट नहीं आएगी. इसका फायदा सीधे किसानों को मिलेगा.

आटे को भी मिली सीमित छूट

सरकार ने गेहूं के साथ-साथ गेहूं के आटे और उससे जुड़े उत्पादों के 5 लाख टन अतिरिक्त निर्यात की भी अनुमति दी है. हालांकि आटे के निर्यात पर भी सामान्य रूप से रोक जारी रहेगी, लेकिन विशेष मंजूरी के तहत तय मात्रा में निर्यात किया जा सकेगा. जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त निर्यात की अनुमति भी दी जा सकती है.

रबी 2026 में बढ़ा गेहूं का रकबा

इस बार रबी सीजन 2026 में गेहूं की बुवाई का रकबा बढ़कर करीब 334.17 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है. पिछले साल यह लगभग 328.04 लाख हेक्टेयर था. रकबे में बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि किसानों का भरोसा गेहूं की खेती पर बना हुआ है.

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और सरकारी खरीद की व्यवस्था ने किसानों को गेहूं बोने के लिए प्रोत्साहित किया है. अच्छे रकबे और अनुकूल मौसम के चलते इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है.

किसानों और उपभोक्ताओं दोनों का संतुलन

सरकार का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह संतुलित है. एक तरफ किसानों को बेहतर दाम दिलाने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ घरेलू खाद्य सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है. पर्याप्त भंडार होने के कारण निर्यात से देश के भीतर गेहूं की उपलब्धता पर असर नहीं पड़ेगा.

इस कदम से बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा, स्टॉक का सही उपयोग होगा और नई फसल के लिए जगह बनेगी. इससे सरकारी गोदामों में पुराना स्टॉक भी समय पर निकल सकेगा.

आगे की रणनीति क्या होगी

सरकार ने साफ किया है कि घरेलू जरूरतें सबसे पहले पूरी की जाएंगी. अगर भविष्य में उत्पादन या बाजार की स्थिति बदलती है, तो निर्यात नीति की दोबारा समीक्षा की जा सकती है.

फिलहाल, 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन आटा उत्पादों के निर्यात की अनुमति को किसानों के हित में उठाया गया कदम माना जा रहा है. मजबूत स्टॉक और बढ़े हुए रकबे के बीच यह फैसला बाजार को संतुलित रखने और किसानों की आय को सहारा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.

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