ड्यूटी-फ्री कपास आयात पर लगा ब्रेक, 11 प्रतिशत टैक्स लागू, किसानों को राहत या उद्योग को लगेगा झटका?

अगस्त 2025 में अंतरराष्ट्रीय व्यापार तनाव, खासकर अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद के बीच भारत ने कपास आयात पर लगने वाला 11 प्रतिशत शुल्क हटा दिया था. इसका मकसद घरेलू उद्योग को राहत देना और कच्चे माल की कमी को पूरा करना था.

नई दिल्ली | Updated On: 2 Jan, 2026 | 10:35 AM

Cotton Import: नए साल की शुरुआत के साथ ही कपास बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. ड्यूटी-फ्री कपास आयात की समय-सीमा खत्म होते ही 1 जनवरी 2026 से कपास के आयात पर फिर से 11 प्रतिशत शुल्क लागू हो गया है. सरकार की ओर से इस छूट को आगे बढ़ाने को लेकर कोई नई अधिसूचना जारी नहीं की गई, जिससे टेक्सटाइल उद्योग में चिंता बढ़ गई है, वहीं किसानों के हितों को लेकर बहस तेज हो गई है.

पिछले कुछ महीनों से कपास आयात पर शुल्क में छूट मिलने के कारण विदेशी कपास भारतीय बाजार में सस्ती दरों पर पहुंच रही थी. इससे कपड़ा उद्योग को कच्चा माल आसानी से मिल रहा था, लेकिन दूसरी ओर घरेलू किसानों को इसका नुकसान उठाना पड़ा. अब जब यह छूट खत्म हो गई है, तो बाजार की तस्वीर एक बार फिर बदलने लगी है.

किसानों को MSP से नीचे बेचनी पड़ रही कपास

TOI की खबर के अनुसार, विदर्भ समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों में किसान अभी भी कच्ची कपास को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं. बाजार में कच्ची कपास की कीमतें 7,500 से 7,700 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बनी हुई हैं, जबकि सरकार द्वारा घोषित MSP 8,110 रुपये प्रति क्विंटल है. ऐसे में किसानों की नाराजगी बनी हुई है.

किसान संगठनों का कहना है कि ड्यूटी-फ्री आयात के कारण विदेशी कपास की बाढ़ आ गई थी, जिससे घरेलू कीमतों पर दबाव पड़ा. यही वजह है कि किसान संगठनों ने सरकार से आयात शुल्क दोबारा लागू करने की मांग की थी. उनके अनुसार, आयात पर टैक्स लगने से घरेलू बाजार को कुछ राहत मिलेगी और आगे चलकर कीमतों में सुधार की उम्मीद बन सकती है.

टेक्सटाइल उद्योग की बढ़ी चिंता

दूसरी ओर, कपड़ा उद्योग के लिए यह फैसला झटका माना जा रहा है. प्रोसेस्ड कपास यानी लिंट की कीमतों में पहले ही तेजी देखी जा रही है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि आयात पर 11 प्रतिशत शुल्क लगने से विदेशी कपास और महंगी हो जाएगी, जिससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो सकता है.

विदर्भ की एक टेक्सटाइल यूनिट के प्रबंध निदेशक प्रशांत मोढ़ा के अनुसार, घरेलू बाजार में कपास की कीमतें 58,500 रुपये प्रति गांठ तक पहुंच चुकी हैं. वहीं, आयात पर टैक्स लगने से विदेशी कपास करीब 4,000 रुपये प्रति गांठ और महंगी पड़ रही है. इससे भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों की लागत बढ़ेगी और निर्यात पर असर पड़ सकता है.

क्यों हटाई गई थी आयात ड्यूटी

गौरतलब है कि अगस्त 2025 में अंतरराष्ट्रीय व्यापार तनाव, खासकर अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद के बीच भारत ने कपास आयात पर लगने वाला 11 प्रतिशत शुल्क हटा दिया था. इसका मकसद घरेलू उद्योग को राहत देना और कच्चे माल की कमी को पूरा करना था. अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर के मध्य तक भारत करीब 36 लाख गांठ कपास का आयात कर चुका था. इसमें सबसे ज्यादा हिस्सेदारी ब्राजील की थी, इसके बाद अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया का स्थान रहा.

MSP खरीद से किसानों को सहारा

इस सीजन में किसानों के लिए सबसे बड़ा सहारा कपास निगम की खरीद बनी है. 30 दिसंबर तक सरकारी एजेंसी ने 61.5 लाख गांठ कपास की खरीद MSP पर की है. किसानों को राहत देने के लिए MSP पर बेचने के लिए पंजीकरण की अंतिम तारीख भी 31 दिसंबर से बढ़ाकर 16 जनवरी कर दी गई है. इससे उम्मीद है कि ज्यादा किसान सरकारी खरीद का लाभ उठा सकेंगे.

बाजार का रुख

अब जबकि ड्यूटी-फ्री आयात की अवधि खत्म हो चुकी है, बाजार की दिशा आने वाले हफ्तों में साफ होगी. यदि सरकार कोई नई राहत नहीं देती, तो आयात महंगा रहेगा और घरेलू कपास की मांग बढ़ सकती है. इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना है, लेकिन टेक्सटाइल उद्योग की लागत बढ़ना तय माना जा रहा है.

Published: 2 Jan, 2026 | 10:01 AM

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