बुढ़ापे में धान-गेहूं छोड़ शुरू की सफेद चंदन की खेती, अब जमीन से कई गुना महंगे बिक रहे पेड़

White Sandalwood Farming: किसान नुराता राम ठाकुर ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में एक पौधा 200 रुपये में खरीदा था. अब एक पौधे की कीमत कई लाख रुपये है. अब वह पौधों से बीज भी तैयार करके बिक्री कर रहे हैं. उन्होंने गेहूं-धान की खेती छोड़कर ट्रेनिंग लेने के बाद बागवानी शुरू की है. अब उनसे किसान नई खेती पद्धति सीखने आते हैं.

नोएडा | Updated On: 29 Jan, 2026 | 06:41 PM

Safed Chandan Ki Kheti: धान और गेहूं की खेती में कम पैदावार होने से परेशान बुजुर्ग किसान ने अपने खेत में सफेद चंदन की खेती शुरू की है. किसान ने एक एकड़ में पौधे लगाए हैं, जो अब जमीन की कीमत से भी कई गुना महंगे हो गए हैं. किसान ने चंदन की खेती का प्रशिक्षण लेकर 200 रुपये में एक पौधे की दर से 100 पौधे लगाए थे. अब एक पौधे की कीमत कई लाख रुपये हो गई है. बुजुर्ग किसान की इस नवाचार खेती से आसपास के किसान भी प्रेरित हो रहे हैं और बागवानी करने की तैयारी कर रहे हैं.

चंदन की खास खुशबू और औषधीय गुणों के कारण इसकी देश-विदेश में जबरदस्त मांग है. भारत में कई किसान चंदन की खेती से करोड़ों रुपये कमा रहे हैं और अब हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ क्षेत्र में भी इसका सफल उदाहरण सामने आया है. नालागढ़ तहसील के गांव भांगला के 77 वर्षीय किसान नुराता राम ठाकुर सफेद चंदन की खेती कर न सिर्फ अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी इस ओर प्रेरित कर रहे हैं.

जमीन की कीमत से कई गुना महंगे हो गए पौधे

नुराता राम ठाकुर ने नवाचार की सोच के साथ अपनी एक एकड़ जमीन में सफेद चंदन के 100 पौधे लगाए थे. उन्होंने बताया कि पूरी जानकारी जुटाने और प्रशिक्षण लेने के बाद यह कदम उठाया गया. इनमें से 70 पौधे सफल रहे हैं, जो अब करीब 8 साल के हो चुके हैं. किसान का कहना है कि इन पौधों की मौजूदा कीमत लाखों रुपये में है और उनकी पूरी जमीन की कीमत भी इन पौधों के बराबर नहीं है.

पारंपरिक फसलों में कम आय होने से बागवानी शुरू की

किसान नुराता राम के अनुसार धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों में लागत अधिक और आय कम होती जा रही है. इसी कारण उन्होंने चंदन की खेती का विकल्प चुना. चंदन की खेती भले ही समय लेती है, लेकिन जितना इंतजार करवाती है, उससे कहीं ज्यादा मुनाफा देती है. उन्होंने कहा कि अब उनका एक पौधा कई लाख रुपये कीमत का है.

कम सिंचाई और कम लागत में तैयार हो जाता है पौधा

उन्होंने बताया कि सफेद चंदन के पौधों को अधिक वर्षा की आवश्यकता नहीं होती. हिमाचल प्रदेश की जलवायु इसमें अनुकूल है. इसके लिए साढ़े सात पीएच वाली, जल सोखने वाली उपजाऊ दोमट या चिकनी मिट्टी उपयुक्त होती है और 500 से 625 मिमी तक वार्षिक वर्षा पर्याप्त रहती है. चंदन की खेती में होस्ट पौधे का होना जरूरी है, क्योंकि होस्ट के बिना चंदन का पौधा सही तरीके से विकसित नहीं हो पाता.

किसान नुराता राम ठाकुर ने बताया कि शुरुआत में एक पौधा 200 रुपये में खरीदा था.

200 रुपये का एक पौधा लगाया था, अब कीमत कई लाख रुपये

नुराता राम ठाकुर ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में एक पौधा 200 रुपये में खरीदा था. अब एक पौधे की कीमत कई लाख रुपये है. अब उनके पौधों से बीज भी तैयार हो चुके हैं, जिन्हें वह अन्य किसानों को 20 रुपये प्रति बीज के हिसाब से उपलब्ध करा रहे हैं. उनका कहना है कि मुफ्त में दी गई चीजों की कद्र कम होती है, इसलिए किसान अगर थोड़ा निवेश करें तो वे खेती को गंभीरता से अपनाते हैं. नुराता राम ठाकुर अन्य किसानों से भी अपील कर रहे हैं कि वे चंदन और फलदार पौधों की खेती की ओर बढ़ें, ताकि अपनी आय बढ़ाकर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें.

Published: 29 Jan, 2026 | 06:37 PM

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